"₹200 करोड़ का सवाल, 40 सांसद कटघरे में — बिहार का विकास किसके भरोसे..?”

"₹200 करोड़ का सवाल, 40 सांसद कटघरे में — बिहार का विकास किसके भरोसे..?”

जनक्रांति कार्यालय से मोहम्मद बैरम रकी की रिपोर्ट
क्या बिहार की जनता दो दर्जों की है?
क्या कुछ सीटें VIP हैं और कुछ सिर्फ वोट बैंक.?

इंडिया न्यूज़ डेस्क (जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन कार्यालय न्यूज़ डेस्क, 14 जनवरी, 2026)। "₹200 करोड़ का सवाल, 40 सांसद कटघरे में — बिहार का विकास किसके भरोसे..?”
जहाँ विकास अब भी फ़ाइलों में दौड़ता है,और ज़मीन पर जनता इंतज़ार करती है।
आज हमारे सामने बिहार के सभी 40 लोकसभा सांसदों का MPLADS रिपोर्ट कार्ड है—
कोई बहाना नहीं,
कोई भाषण नहीं,
सिर्फ़ आंकड़े, और वही सबसे ज़्यादा बोलते हैं।
🏛️ MPLADS: जनता का पैसा, सांसदों की परीक्षा
नियम साफ है—
हर सांसद को अपने क्षेत्र के विकास के लिए हर साल ₹5 करोड़ मिलते हैं।
यानी 2 साल में लगभग ₹9–10 करोड़ प्रति सांसद।
40 सांसद = करीब ₹400 करोड़।
अब सवाल उठता है—
 यह पैसा गया कहाँ?
 किसने काम किया, और किसने कुर्सी संभाली.?
शून्य विकास वाले सांसद: जब जवाब ‘₹0’ हो
इन सीटों पर विकास का मीटर शून्य है
पाटलिपुत्र – मीसा भारती
मुंगेर – ललन सिंह
समस्तीपुर – शांभवी चौधरी
सारण – राजीव प्रताप रूडी
पश्चिम चंपारण – संजय जायसवाल
नवादा – विवेक ठाकुर
💸 खर्च: ₹0
📑 रिकमेंडेशन: ₹0 (या नाममात्र)
यह महज़ लापरवाही नहीं—
यह जनादेश की अवहेलना है।
🟢 काम करने वाले भी हैं — फर्क साफ दिखता है.
कुछ सांसदों ने साबित किया कि
अगर नीयत हो तो काम मुमकिन है—
अररिया, वैशाली, सीवान जैसे क्षेत्रों में
₹9 करोड़ से अधिक खर्च/रिकमेंडेशन
मुजफ्फरपुर, कटिहार, किशनगंज, पूर्णिया में स्पष्ट प्रयास और प्रस्ताव
यानी समस्या सिस्टम नहीं, नीयत की है।
⚖️ असमानता का सच: एक ही बिहार, दो तस्वीरें
कहीं सड़क बनी
कहीं अस्पताल पहुँचा
कहीं पानी आया
और कहीं दो साल में एक ईंट तक नहीं लगी।
क्या बिहार की जनता दो दर्जों की है?
क्या कुछ सीटें VIP हैं
और कुछ सिर्फ वोट बैंक?
❓ असली सवाल: जवाबदेही किसकी?
सांसद निधि किसकी है? जनता की।
सांसदों की सैलरी किसकी है? जनता की।
संसद चलाने का खर्च? जनता का।
तो फिर जवाब कौन देगा..?
जनता को।
 बिहार को अब रिपोर्ट कार्ड चाहिए
बिहार अब यह नहीं पूछेगा कि
“आप किस पार्टी से हैं.?”
बिहार पूछेगा—
आपने कितना काम किया.?
कितना पैसा खर्च हुआ.?
मेरे गांव को क्या मिला?
📢 अब चुप्पी नहीं, सवाल होंगे
यह लेख किसी पार्टी के खिलाफ नहीं,
यह जवाबदेही के पक्ष में है।
 जो काम करे— उसकी तारीफ।
जो शून्य पर हो— उससे सवाल।
 इस लेख को शेयर कीजिए।
हर सांसद तक पहुँचाइए।
ताकि उन्हें याद रहे—
बिहार अब सिर्फ वोट नहीं देगा,
हिसाब भी मांगेगा।
समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से मोहम्मद Bairam Rakee की रिपोर्ट प्रकाशक/सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व ष्रसारित।

Comments