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स्व. रचित रचना : अनहद धुनअनहद धुन है प्यारी प्यारी न्यारी न्यारी सुने जा रहा हूँ सुने जा रहा हूँ सुने जा रहा हूँ कभी झींगुर कभी डम डम कभी है शंख ध्वनि ध्यान लगे जा रहे हैँ लगे जा रहे हैँ सुने जा रहा हूँ अनहद धुन सुने.......