स्व रचित काव्य रचना : पता नहीं क्यों बीस वर्ष बाद तुम याद आ रही हो....
स्व रचित काव्य रचना : पता नहीं क्यों बीस वर्ष बाद तुम याद आ रही हो.... 🖋️रचनाकार :प्रमोद कुमार सिन्हा, बाघी यादें.... पता नहीं क्यों बीस वर्ष बाद तुम याद आ रही हो , तरस गये हैँ नैन हमारे भरी जवानी याद दिला रही हो , वहीं जा रहा हूँ जहाँ हर कोना में तुम बस्ती थी , हर क्षण हर पल बीते लम्हें की क्यों याद दिला रही हो, पता नहीं क्यों...... मेरी याद में पल पल तुम्हारा दिन गुजरता था , रूठ जाता था ज़ब भी तुम बहुत घबड़ा जाती थी, सुनहरा पल बीत गये जवानी भी ढल गयी है अब , फिर भी गुज़रा पल आज बरबस तुम्हारी याद सताती है, पता नहीं क्यों....... वो चाँदनी रातें बांहों में बाहें डाल फिर से बुला रही है , कुछ भी नहीं बदला सब धरे वही मीठी बातें सता रही है , कैसे हमने बितायी है जिंदगी की ये घड़ी कैसे बताऊं ? वही तुम्हारा घर गुज़रा जहाँ बचपन दिल में समा रही है , पता नहीं क्यों..... प्रमोद तुम्हारा था है औऱ तुम्हारा ही रहेगा धरकन बता रही है, कसक दिल की अश्क़ आज भी क्यों घुला रही है , बीत गये लम्हें कितने फूल तुम्हारे संजोये कैसे मैंने , खिलता हुआ गुलशन चार फूलों की सु...