धर्म - भक्ति - ध्यान का पर्व है होली ना की हूड़दंगियों का त्योहार
धर्म - भक्ति - ध्यान का पर्व है होली ना की हूड़दंगियों का त्योहार जनक्रांति कार्यालय से केंद्रीय ब्यूरो चीफ प्रमोद कुमार सिन्हा क़ी रिपोर्ट होली को विकृत रूप नहीं होने की शपथ लें औऱ प्रेम भाई चारा को ह्रदय में धारण करें तभी हमारी सनातन संस्कृति बचेगी नहीं तो विलुप्त हो जायेगी, इंडिया जनक्रांति न्यूज़ डेस्क (जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन कार्यालय न्यूज़ डेस्क 2 मार्च, 2026)। वास्तविकता है होली धर्म - भक्ति औऱ ध्यान से ओतप्रोत सनातन संस्कृति का नाम है होली जो आज विकृत मानसिकता लिये हुए हूड़दंगिओ का त्योहार बनकर होली रह गया है जो हमारे सनातन संस्कृति क़े विपरीत है जहाँ प्रेम भाई चारा से ओतप्रोत होना था आज उसके उलट अश्लीलता ने पैर पसार लिया है औऱ देवर - भाभी क़े साथ हाथ जोर प्रेमियों क़े साथ गंदा मज़ाक औऱ अश्लील भरे जोगीरा सहित गाने का परम्परा ने अपना पैर इतना पसार लिया है जैसे दारू - ताड़ी - भाँग - गांजा का खुलेआम रास्ते पर देखने को मिल जायेगा। दरअसल भक्ति से सराबोर प्रहलाद पर अनेकों अत्याचार होते होते होलिका दहन तक आ गया औऱ भक्ति की प्रभाव से प्रहलाद तो बच...