जब पत्रकारिता खबर से ज्यादा तस्वीरों की होड़ बन जाए, तो सवाल उठना लाजिमी है,
जब पत्रकारिता खबर से ज्यादा तस्वीरों की होड़ बन जाए, तो सवाल उठना लाजिमी है, जनक्रांति कार्यालय रिपोर्ट प्रशासन और राजनीतिज्ञों के आगे-पीछे घूमने की प्रवृत्ति से लेकर छोटे पत्रकारों पर दबाव तक—क्या पत्रकारिता अपने मूल धर्म, यानी सच और जनसरोकार से दूर होती जा रही है..? पत्रकारिता लोकतंत्र का वह महत्वपूर्ण स्तंभ है, जिसका मूल उद्देश्य सत्ता के गलियारों की चमक दिखाना नहीं, बल्कि समाज के उन सवालों को सामने लाना है, जिनकी आवाज अक्सर व्यवस्था तक नहीं पहुंच पाती। पत्रकार का काम किसी अधिकारी, नेता या प्रभावशाली व्यक्ति के साथ तस्वीर खिंचवाना नहीं, बल्कि जनता की समस्याओं, प्रशासनिक खामियों और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्षता के साथ सामने रखना है। लेकिन वर्तमान समय में पत्रकारिता के सामने एक गंभीर सवाल खड़ा हो रहा है—क्या खबर अब प्राथमिकता है या सत्ता और प्रशासन के करीब दिखना? कई जगहों पर यह देखने को मिलता है कि कुछ पत्रकार प्रशासनिक अधिकारियों और राजनीतिक नेताओं के साथ लगातार तस्वीरें खिंचवाने तथा अपनी नजदीकी प्रदर्शित करने की होड़ में नजर आते हैं। सवाल यह नहीं कि पत्रकार किसी अध...