नुकताचीनी की आदत ने अपनों से किया दूर, बुढ़ापे में अकेले रह गए रिटायर्ड प्रिंसिपल
नुकताचीनी की आदत ने अपनों से किया दूर, बुढ़ापे में अकेले रह गए रिटायर्ड प्रिंसिपल जनक्रांति कार्यालय से जॉली अंकल की रिपोर्ट दूसरों की छोटी-छोटी गलतियां निकालने की आदत ने उजाड़ दी हरीश बाबू की खुशहाल गृहस्थी, डॉक्टर की सीख से हुआ अपनी भूल का एहसास विशेष आलेख | नुकताचीनी रिटायर्ड प्रिंसिपल हरीश बाबू के जीवन का एक ही सिद्धांत बन गया था—दूसरों की गलतियां निकालना। स्कूल में तीन दशक तक बच्चों की कॉपियों पर लाल पेन चलाने और अध्यापकों की कमियों पर सवाल उठाने की आदत ने उनके स्वभाव को इतना कठोर बना दिया था कि उन्हें हर अच्छी चीज में भी कोई न कोई खामी नजर आने लगी। सुबह की चाय हो या त्योहार पर पहना जाने वाला नया कपड़ा, बहू के हाथों से बनी स्वादिष्ट सब्जी हो या घर के किसी सदस्य का कोई काम, वे तारीफ करने के बजाय कमियां गिनाने लगते थे। उनकी इस आदत से घर का माहौल हमेशा तनावपूर्ण बना रहता था। परिवार के सदस्य उनके सामने सहज रहने के बजाय हर समय इस आशंका में रहते थे कि न जाने किस छोटी-सी बात पर उन्हें डांट सुननी पड़ जाए। धीरे-धीरे उनकी लगातार टोका-टाकी से परेशान होकर बेटा और बहू अलग रहने...