स्व रचित : तेरी याद में अश्क़ बह रहे हैँ
स्व रचित : तेरी याद में अश्क़ बह रहे हैँ
🖋️प्रमोद कुमार सिन्हा, बाघी
जो कहा नहीं जाता वही कह रहा हूँ
जो सुना नहीं जाता वही सुना रहा हूँ
क्या वो दिन थे क्या वो थी रातें
भुलाये नहीं कभी भुल पाता रहा हूँ
जो कहा नहीं........
सुनहरे पल की वो यादें सताती है
ज़ब मिले थे गले बातें याद दिलाती है
सुहाना सफर था चाँदनी थी रातें
गुजरे पल की आज याद सता रहा है
तेरी याद में अश्क़ बह रहे हैँ
ओठों पे थिरकन हो रहे हैँ
क्या सुनाऊँ हाल अपना मैं
गिरा नहीं फिर भी गिरा जा रहा हूँ
जो कहा नहीं.
जो कहा नहीं......
बीत गये बरस हो गये बीस बरस
तड़प रहा हूँ तुम बिन गये तरस
मिल ना सकूँगा कभी भी ना सही
सोता हुआ भी याद दिला रहा है
जो कहा नहीं.....
👆उपरोक्त ग़ज़ल प्रकाशन हेतु प्रेषित प्रमोद कुमार सिन्हा, केंद्रीय ब्यूरो चीफ जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन कार्यालय समस्तीपुर द्वारा प्रकाशित व प्रसारित।

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