आज की राजनीति परिदृश्य : संसदीय लोकतंत्र बहुदलिय प्रणाली औऱ सहकारी संघवाद पर है भारतीय राजनीति
आज की राजनीति परिदृश्य : संसदीय लोकतंत्र बहुदलिय प्रणाली औऱ सहकारी संघवाद पर है भारतीय राजनीति
जनक्रांति कार्यालय से केंद्रीय ब्यूरो चीफ प्रमोद कुमार सिन्हा
बिहार में नीतीश कुमार क़े केंद्रीय राजनीति में सक्रिय होने से राज्य राज्य की सियासत में बड़े बदलाव की है बयार
इंडिया जनक्रांति न्यूज़ डेस्क (जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन कार्यालय न्यूज़ डेस्क 16 मार्च, 2026)। मार्च २०२६ में भारत की राजनीती संसदीय लोकतंत्र बहुदलिय प्रणाली औऱ सहकारी संघवाद पर आधारित है। जहाँ भाजपा क़े नेतृत्व में केंद्र सरकार का प्रभुत्व बना हुआ है बिपक्षी दल गठबंधन ( india )क़े माध्यम से एकजुट होने का प्रयास कर रहे है। राज्य स्तर पर बिहार जैसे बदलाव ( नीतीश कुमार का राज्य सभा जाना ) औऱ पश्चिम बंगाल में संबैधानिक हलचलें प्रमुख है।
राजनीति स्थिति क़े मुख्य विन्दु :-
सत्ता का केंद्रीकरण - भारतीय राजनीति में भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार का दबदबा है। जिसके तहत कार्यकारी शक्तियाँ काफ़ी मज़बूत हुई है। विपक्षी एकता - विपक्षी दल २०२४ क़े बाद भी गठबंधन क़े जरिये राष्ट्रीय स्तर पर एक मज़बूत विकल्प पेश करने की कोशिश कर रहे हैँ। राज्य स्तरीय बदलाव-बिहार में नीतीश कुमार क़े केंद्रीय राजनीति में सक्रिय होने से राज्य राज्य की सियासत में बड़े बदलाव की बयार है पश्चिम बंगाल में भी राजनितिक तनाव औऱ चुनाव आयोग की सक्रियता बनी हुई है प्रमुख मुद्दे -रोजगार, बेरोजगारी, क़ृषि संकट, मुद्रा सफ्रीती औऱ आर्थिक सुधार मतदाताओं क़े केंद्र में है।
भू - राजनितिक पुनर्गठन - भारत गुट निर्पेक्ष से आगे बढ़कर अमेरिका औऱ जापान जैसे देशों क़े साथ राजनितिक औऱ महत्वपूर्ण खनीजों पर मज़बूत समझौते कर रहा है।
राजनीतिक संरचना -भारत एक संघीय लोकतान्त्रिक गणराज्य है, जहाँ चुनाव आयोग स्वतंत्र रूप से चुनाव कराता है औऱ एक जिवंत बहूदलिय प्रणाली से ६ से अधिक राष्ट्रीय दल औऱ दर्जनों राज्य दल सक्रिय हैँ। विपक्ष क़े मुख्य मुद्दे -वर्तमान राजनीति में विपक्ष ( मुख्यतः कांग्रेस, सपा, टी एम सी, आप )आदि सत्ता पक्ष ( n d a)क़े खिलाफ उठाये जाने बाले मुख्य मुद्दे निम्न लिखित है :-
महंगाई -आवश्यक वस्तुओं, खाद्य पदार्थों, पेट्रोल - डीजल औऱ गैस की क़ीमतों में वृद्धि लेकर आबाज उठा रहे हैँ जिसे वे सरकार की आर्थिक विफलताओं क़े रूप में उठाते हैँ। लोकतंत्र औऱ संविधान की रक्षा - विपक्ष का आरोप है कि सरकार संवैधानिक संस्थाओं औऱ लोकतंत्र क़े सिद्धांतों को कमजोर कर रही है। जिसे वे प्रमुखता से उठाते हैँ जाँच एजेंसीयों का दुरूपयोग - (c b i / e d / e c i ) विपक्ष आरोप लगाता रहा है कि की राजनितिक विरोधियों को दबाने क़े लिये किया जा रहा है।
किसान औऱ ग्रामीण संकट - किसानों की समस्या फसलों क़े उचित मूल्य ( m s p )औऱ ग्रामीण अर्थ व्यवस्था में मंदी को बिपक्ष द्वारा मजबूती से उठाया जा रहा है कारपोरेट भ्रष्टाचार औऱ सांठगांठ - बड़े कारपोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने क़े आरोप औऱ भ्रस्टाचार क़े मामले की जाँच की माँग है।
संसदीय लोकतंत्र की प्रभावशीलता -संसद में चर्चा की कमी, विरोधियों को बिना बहस बिल पास करना औऱ विपक्ष को बोलने का मौका ना देना मुख्य मुद्दा है.
महाभियोग की तैयारी -विपक्ष क़े कुछ दल विशेष रूप से टी एम सी मुख्य चुनस्व आयुक्त क़े खिलाफ महाभियोग लाने की बात कर रही है सरकारी नीतियों पर सवाल उठाना औऱ जनहित मुद्दे उठाना प्रमुख है सोनिया गाँधी की नागरिकता से जुड़ी अर्जी पर सुनबाई होना बाकी है।
इधर पाँच राज्यों में चुनावी बिगुल हो चुका है औऱ चुनावी विगुल होते ही सभी पार्टियों द्वारा लोक लुभावन वादे किये जा रहे हैँ रेबड़ी बाँटने की प्रथा संबिधान में कहीं जिक्र नहीं है जिस संबिधान की बात सभी करते हैँ वहीं सभी संबिधान क़े विपरीत कार्य करते नजर आते हैँ इसपर चुनाव आयोग औऱ न्यायपालिका को स्वतः संज्ञान लेना चाहिये आखिर ये देश रासतल की ओर कहाँ जा रही है ये रेबड़ी बाँटने की प्रथा को बन्द होना चाहिये ये रेबड़ी बाँटने हेतु धन कहाँ से आयेगा या तो कारपोरेट घराने से या जनता की पसीने की कमाई से इससे यह हाल होगा की महंगाई चरम चोटी पर चला जायेगा जहाँ दस दस हज़ार में महिला बिक रही है वहाँ का प्रशासन कैसा होगा ? पाँच किलो अनाज बाँटकर देश की प्रतिभा को नष्ट किया जा रहा है जगह जगह इस संबाददाता ने देखा है लोग अधिकतर समय ताश खेलने में बिताते हैँ मुफ्त में अनाज जो मिलता है मोहन भागवत कहते हैँ आरक्षण सतत जारी रहेगा क्यों ? बाबा साहब अम्बेडकर ने तो सिर्फ पाँच साल की आरक्षण की बात की थी आज द्रोपदी की चीड़ की तरह आरक्षण बढ़ता जा रहा है मजेदार तथ्य है आरक्षण का हकदार सिर्फ उन्हें ही मिल रहा है जो एक बार लाभान्वित हो चुके हैँ जो लाभान्वित नहीं हुए हैँ आज तक वो आरक्षण से वंचित हैँ ऐसा क्यों ? मेरा तो कहना है आरक्षण क़े हकदार केवल उन्हें ही दिया जाये जो अंतरजातीय शादी करे बाकी का आरक्षण बन्द होना चाहिये क्योंकि जो आरक्षण पा चुके हैँ वो फॉरवर्ड होगये उनके बच्चे क़े बच्चे को लगातार आरक्षण देना क्या हितकर है..?

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