छायावादी रचना : जमाना बदल गया,सुहाना बदल गया, मौसम बदल गये,फसाना बदल गया..?
छायावादी रचना :
जमाना बदल गया,सुहाना बदल गया,
मौसम बदल गये,फसाना बदल गया..?
जमाना बदल गया,सुहाना बदल गया,
मौसम बदल गये,फसाना बदल गया..
जमाना बदल गया,सुहाना बदल गया,
मौसम बदल गये,फसाना बदल गया..
सब कुछ बदल गया
दोस्त बदल गये
दोस्ताना बदल गये
सब कुछ बदल गया
हवा तो वही है,फ़िज़ा तो वही है
आसमां वही है, धरती भी वही है
दीखता तो है सब के सब हैँ दीबाने
चाँद - सूरज भी है अरमान वही है
क्या नहीं बदला तन के कपड़े बदले
सच्चाई ही नहीं, ईमान भी हैँ बदले
देश दुनिया टकटकी लगाये प्रभुता
एक हम एक हिंदुस्तान नहीं बदले
घटा वही है दर्शन छटा भी वही है
बिभाजन देश का आर्यावर्त वही है
अखण्ड भारत टुकड़े टुकड़े हो गये
क्या से क्या हुआ ठहरे हम वही हैँ
तरक्की से चिढ है घोटालेबाज को
दोष कैसे ना दें हम आपातकाल को
एक साथ बंदी हमें जिसने बनाया
मौनी की बेइज्जती संसद काल को
पप्पू तो पप्पू ठहरा जय चंद हो गये
घर की झगड़ा बिदेश क्यों ले गये
उनकी फुहरता देख रही है दुनिया
बंदर भांति उछल कूद की दुनिया
जोर पर जोर लगाये हारते क्यों गये
आँगन की बात या रोई की धुनिया
हाल बेहाल हैँ बड़े ही परेशान हैँ
दिग्गी राजा बड़ बोले अरमान हैँ
अस्सी बरस में जोश जवानी दिखाये
मुस्लिम चरित्र क्या ही अहसान हैँ
कितनी बात बतायें कितना गिनायें
लम्बी फितरत हम कितना सुनायें
चोरों की जमात है चोरों की बारात
इटली नहीं भारत है कैसे गुनगुनायें
खेला होबे खेला होबे जुमला उनका
दर्द नहीं दिल में पर दिखाबा उनका
अबकी बार गये फिर ना ही मिलेंगें
साथ बैठकर झाल मृदंग है उनका
सबकी हाल मैं किससे कैसे सुनाऊँ
रहस्य की बात रहस्य ही मैं बताऊं
समझना गर है तो समझ लो यारों
चूर - चूर सपना इशारों में समझाऊं
बहुत लिख गया अब ना ही लिखूंगा
राज की बात है राज में ही कहूंगा
समझने बाले समझ लेंगे ही सभी
प्रमोद जहां हूँ वहाँ ही मैं रहूँगा..

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