ग़ज़ल : यूँ ही चुप ना रहा कीजिये कुछ ना कुछ तो वयां कीजिये ज़िन्दगी है मात्र चार दिन की होशो -हबास में रहा कीजिये यों ही चुप....
ग़ज़ल :
यूँ ही चुप ना रहा कीजिये
कुछ ना कुछ तो वयां कीजिये
ज़िन्दगी है मात्र चार दिन की
होशो -हबास में रहा कीजिये
यों ही चुप....
🖋️प्रमोद कुमार सिन्हा, बाघी
यूँ ही चुप ना रहा कीजिये..
कुछ ना कुछ तो वयां कीजिये..
ज़िन्दगी है मात्र चार दिन की..
होशो -हबास में रहा कीजिये..
यों ही चुप.....।
ईमान क्या है..? जहाँ खुदा नहीं
गम गफ़लत में ना रहा कीजिये
यों ही चुप.....
रहम होता है परवरदिगार की
जुबां सम्भलकर ही बोला कीजिये
यों ही चुप.....
ज़ब तेरा ही नाम लिखा तकदीर ने
मुस्कुराते हुऐ ही मिला कीजिये
यों ही चुप....
यों तो तन्हाई में कट रही है ज़िन्दगी
हँसी - खुशी का भी मज़ा लिया कीजिये
यों ही चुप....
गफ़लत में ही गुज़र जाये ये जहां
गफलत से तो हँसकर तौबा कीजिये
यों ही चुप......
प्रमोद हुस्न - ए - आलम है ये जहां
खूबसूरत नज़्म ही वयां कीजिये
यों ही चुप......

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