ग़ज़ल :प्रमोद जहाँ है इश्क की जुबां पर तेरा ही नाम है दिल मेरा तोड़कर तूने अच्छा नहीं किया नाजुक दिल शीशे का तूने चकनाचूर किया

ग़ज़ल :
प्रमोद जहाँ है इश्क की जुबां पर तेरा ही नाम है 
दिल मेरा तोड़कर तूने अच्छा नहीं किया 
नाजुक दिल शीशे का तूने चकनाचूर किया 
       🖋️प्रमोद कुमार सिन्हा, बाघी

दिल मेरा तोड़कर तूने अच्छा नहीं किया 
नाजुक दिल शीशे का तूने चकनाचूर किया 
कहाँ तक गिनाऊँ ख्वाबों की फ़ितरत मैं तुम्हें 
अच्छा बर्बाद कर आबाद किया मज़बूर किया 
लम्हा जो था प्रेम का ह्रदय मेँ हर धड़कन पर 
धड़कते दिल पे गम गफलत से भरपुर किया 
बेज़ुबान है दिल की धड़कन हर शय पे तुम्हारा नाम 
सोचने की बात है टुटा नहीं अब भी मगरूर किया 
प्रमोदे जहाँ है इश्क की जुबां पर तेरा ही नाम है 
फिसला नहीं हूँ फिर भी जाम उठा सुरूर किया 
ये तो फ़ितरत तुम्हारी मेरी फ़ितरत कुछ औऱ है 
जमाना आज़मा लिया जारी प्रेम तूने बदस्तूर किया 
क्या कहूँ किससे कहूँ जुबां अब लड़खराने लगी 
हवा के झोकों ने मुझे गुनाहों पे तकरार किया।
उपरोक्त 👆ग़ज़ल प्रकाशन हेतु  प्रमोद कुमार सिन्हा, केंद्रीय ब्यूरो चीफ, जनक्रांति हिंदी न्यूज़ बुलेटिन द्वारा प्रेषित समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक/सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित।

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