मंज़िलें बफा में साथ -साथ चलें हैँ , साथ -साथ ही चलते रहेंगे हमदम ।

मंज़िलें बफा में साथ -साथ चलें हैँ , 

साथ -साथ ही चलते रहेंगे हमदम ।


प्रमोद कुमार सिन्हा
 बेगूसराय, बिहार 


बेगूसराय,बिहार ( जनक्रांति हिन्दी न्यूज बुलेटिन कार्यालय 15 मई,20 )।

मंज़िलें बफा में साथ -साथ चलें हैँ , 
साथ -साथ ही चलते रहेंगे हमदम , 
हर मोड़ पर यूँ होता रहेगा इंतज़ार , 
इंतज़ार में नज़रें बिछायेंगे हमदम 
मंज़िलें..........। 
कदम -कदम पर टिकी होंगी निगाहें , 


एक झलक को बेताब रहेंगे हमदम , 
प्यार हुआ है तो फिर डरना क्यों ? 
हाथों में हाथ लेकर चलेंगे हमदम , 
मंज़िलें..........। 
वासना रूपी प्यार हमने किया ही नहीं 
दिल से दिल की बात सुनेंगें हमदम , 
बेताब होंगी तुम बेताब होंगे हम भी , 
प्रमोद दुनियां से ना डरेंगे ये हमदम, 
मंज़िलें......। 
निशानी छोड़ जायेगा ही प्यार हमारा , 
अंतरात्मा से प्यार हुआ मेरे हमदम , 
भूल ना पाओगी क्षण भर भी मुझे , 
निः स्वार्थ तेरा मेरा प्रेम रहा है हमदम 
मंज़िलें....... ।
इनायत खुदा की होगी कभी ना कभी, 
जनम नहीं अगले जनम मिलेंगे हमदम 
दिल से दिल का आत्मा से है आत्मा , 
दूर रह भी सलामती दुआ करेंगे हमदम  
मंज़िलें...... ।
एक चोट भी सहन हो सकेगा ना कभी 
चोट तुम पे तो चोट मुझ पर भी हमदम 
आह निकलोगी उधर तड़प पड़ेंगे हम , 
निशानी शरीर पर मजनूं भांति हमदम....।।
समस्तीपुर कार्यालय से प्रमोद कुमार सिन्हा की स्वरचित मूल रचना राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित ।
 Published by Rajesh kumar verma

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