बस जाइये या बसा लीजिये अपने ह्रदय में मुझको बसा लीजिये ,

बस जाइये या बसा लीजिये अपने ह्रदय में मुझको बसा लीजिये  , 

प्रमोद कुमार सिन्हा

बेगूसराय, बिहार 

समस्तीपुर,बिहार(जनक्रान्ति हिन्दी न्यूज बुलेटिन कार्यालय 09 जून,2020 ) ।

बस जाइये या बसा लीजिये अपने ह्रदय में मुझको बसा लीजिये  , 
चंचल मन और है चंचल इन्द्रिय हाथ बढ़ा कर मुझको उठा लीजिये.  2
जनम -जनम का पापी पतितों में हूँ पतित और अधमों में नामी , 
ऐसे हालतों में अपनी जुल्फों में मुझको इस अधम को छुपा लीजिये , 
बस जाइये या बसा......... 
सुना है जगत में तू पतितों को भी है परम पावन बना देता , 
इसलिए ज्ञानी जन वेद पुराण संत सभी  पतित पावन है गाता , 
योग जप तप व्रत ध्यान मुझसे संभव नहीं कदापि हो पाया , 
अब तो इस प्रमोद पापी को भी परम पावन बना दीजिये , 
बस जाइये या बसा...... 
कितनों को है तुमने अबतक इस पार से उस पार लगाया , 
मेरे कारण नाथ बंद कर लिया क्यों दर भारी ताला लगाया ,
जब तुम्हारे दर पर ही अधम से अधम का ठिकाना है , 
हे नाथ !

मेरी विनती सुन मुझे अब तो किनारा लगा दीजिये , 
बस जाइये या बसा लीजिये.......।
संत समागम हरी कथा संसार में दुर्लभ 
चोरी ठगी भ्रष्टाचार झूठ है बड़ी सुलभ 
हरी चर्चा बिद्वानजन सुनने से बचते हैँ 
ठग साधु चमत्कारिक बाबा में फसते हैँ 
साधु भेष कालनेमी और रावण का भी 
पर नकली सिक्के असली बन चलते हैँ ।
साधु से पूछिए आत्मा दिखाने की बात 
ओ देंगे तंत्र मन्त्र चमत्कार की सौगात 
साधु आत्मा दिखाने की बात करते हैँ।
उनके पास पहुँचने बाले होते कोई कोई 
सन्यासी वस्त्र है पर लूट खसोट है भारी 
किसी ना किसी बहाने पैसे की बीमारी 
लाखों दरबार यहाँ सभी कहतेअबतारी ।
कोई तन लूटेरा कोई धन लूटेरा मिलते 
राजनीती थाम धन बचाते हैँ बड़ा भारी 
अबतार की कमी नहीं सब हैँ अबतार 
कोई विष्णु कोई शिव देवी भी करतार 
कलियुग ने रूप बदल बन गया है साधु 
कैसे जानोगे असली है या नकली साधु 
बड़ी जटिल समस्या सब हैँ धन पुजारी 
साधु विलाशी जनता है यहाँ दुख यारी ।

समस्तीपुर कार्यालय से राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रमोद कुमार सिन्हा की काव्य प्रकाशित । Published by Rajesh kumar verma

Comments