🔥ओ३म्🔥 🌷श्रावणी पर्व की महत्ता 🌷
🔥ओ३म्🔥
🌷श्रावणी पर्व की महत्ता 🌷

🕉️ 🙏ओ३म् सादर नमस्ते जी 🕉️🙏
जनक्रान्ति कार्यालय रिपोर्ट
समस्तीपुर,बिहार ( जनक्रान्ति हिन्दी न्यूज बुलेटिन कार्यालय 03 अगस्त, 2020 ) ।
🔥ओ३म्🔥
🌷श्रावणी पर्व की महत्ता 🌷
👉🌹🙏 सावन मास श्रावण का परिवर्तित नाम है। इस मास की महत्ता ऋषि मुनियों के समय से प्रचलित है। विक्रमी संवत् के अनुसार श्रावण पांचवा मास है। प्राचीन काल में श्रावण मास को जीवन का अभिन्न अंग समझा जाता था। कालांतर में विदेशी संस्कृति के प्रचार से जनमानस इसे भूल गया है।
श्रावणी पर्व के तीन लाभ है।
आध्यात्मिक - वैज्ञानिक - सामाजिक।

आध्यात्मिक पक्ष
श्रावण का अर्थ होता है जिसमें सुना जाए। अब सुना किसे जाता है। संसार में सबसे अधिक महत्वपूर्ण ईश्वरीय ज्ञान वेद है। इसलिए इस मास में वेदों को सुना जाता है। श्रावण में गर्मी के पश्चात् वर्षा आरम्भ होती है। वर्षा में मनुष्य को राहत मिलती हैं। चित वातावरण के अनुकूल होने के कारण शांत हो जाता है। वर्षा के कारण मनुष्य अधिक से अधिक समय अपने घर पर व्यतीत करता है। ऐसे अवसर को हमारे वैज्ञानिक सोच वाले ऋषि मुनियों ने वेदों के स्वाध्याय, चिंतन, मनन एवं आचरण के लिए अनुकूल माना।वेदों के स्वाध्याय एवं आचरण से मनुष्य अपनी आध्यात्मिक उन्नति करे। यही श्रावणी पर्व का आध्यात्मिक प्रयोजन है।
वैज्ञानिक पक्ष
श्रावण में वर्षा के कारण कीट,पतंगे से लेकर वायरस, बैक्टीरिया सभी का प्रकोप होता है। इससे अनेक बीमारियां फैलती है। प्राचीन काल से अग्निहोत्र के माध्यम से बिमारियों को रोका जाता था। श्रावण मास में वेदों के स्वाध्याय के साथ साथ दैनिक अग्निहोत्र का विशेष प्रावधान किया जाता है। इसलिए वेद परायण यज्ञ को इसमें सम्मिलित किया गया था। श्रावणी पर्व का वैज्ञानिक पक्ष पर्यावरण रक्षा के रूप में प्रचलित हैं।
सामाजिक पक्ष
श्रावण मास में वर्षा के कारण सन्यासी, वानप्रस्थी आदि वन त्यागकर नगर के समीप स्थानों पर आकर वास करते हैं। गृहस्थ आश्रम का पालन करने वाले लोग अपनी आध्यात्मिक उन्नति के लिए महात्माओं का सत्संग करने के लिए उनके पास जाते है। महात्माओं के धर्मानुसार जीवन यापन, वैदिक ज्ञान, योग उन्नति एवं अनुभव गृहस्थियों के जीवन मार्ग दर्शन एवं प्रबंध में लाभदायक होता है। श्रावणी पर्व का सामाजिक पक्ष ज्ञानी मनुष्यों द्वारा समाज को दिशा-निर्देश एवं धर्म भावना को समृद्ध करता है।
रक्षाबंधन :

रक्षाबंधन का पर्व भारत की संस्कृति से जुड़ा पर्व है। रक्षाबंधन पर बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है और भाई भी बहन को वचन देता है कि वह जीवन भर उसकी रक्षा व सहायता करेंगा।
🌷श्रावणी पर्व व रक्षा बन्धन की आप सभी को हार्दिक बधाई और शुभकामनायें। परमात्मा आप सब को उत्तम् स्वास्थ्य, दीर्घायु, ऐश्वर्य, यश कीर्ति प्रदान करें।
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🔥ओ३म्🔥

दिनांक - - ०३ अगस्त २०२०
दिन - - सोमवार
तिथि - - पूर्णिमा ( श्रावणी पर्व व रक्षाबंधन )
नक्षत्र - - उत्तराषाढ़
पक्ष - - शुक्ल
माह - - श्रावण
ऋतु - - वर्षा
सूर्य - - दक्षिणायन
सृष्टि संवत - - १,९६,०८,५३,१२१
कलयुगाब्द - - ५१२१
विक्रम संवत - - २०७७
शक संवत - - १९४२
दयानंदाब्द - - १९६
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🕉️⛳आज का वेद मंत्र ⛳🕉️
🌷ओ३म् स्वस्ति पन्थामनुचरेम सूर्याचन्द्रमसाविव। पुनर्ददताध्नता जानता सं गमेमहि (ऋग्वेद ५|५१|१५ )
💐अर्थ :- हम सूर्य और चन्द्रमा की भांति कल्याण-युक्त मार्ग पर चलते रहे। दानी, अहिंसाकारी, ज्ञानी जनों तथा परमात्मा से हम मेल कर सदा सुख प्राप्त करें ।
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🕉🌹 🌵आज का संकल्प पाठ 🌵🌹🕉
(सृष्टि संवत् - संवत्सर-अयन - ऋतु- मास-तिथि- नक्षत्र)
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👉☝️🌹 ओं तत्सद्।श्री व्रह्मणो दिवसे द्वितीये प्रहरार्धे सप्तमे वैवस्वते मन्वन्तरे अष्टाविंशतितमे कलियुगे कलिप्रथमचरणे ,{ एकोवृन्दः षण्णवतिकोटि: अष्टलक्षानि त्रिपञ्चाशत्सहस्राणि एकविंशत्युत्तरशततमे ( १,९६,०८,५३,१२१) सृष्टिसंवत्सरे } { पच्चसहस्स्राणि एकविंशत्युत्तरशततमे ( ५१२१ ) कलियुगे } { सप्तसप्तत्युत्तर द्विसहस्रतमे ( २०७७) विक्रमसंवत्सरे } {षण्णवत्यधिकशततमे (१९६) दयानंद संवत्सरे } रवि दक्षिणायाने, वर्षा ऋतौ,श्रावण मासे, शुक्ल पक्षे, पूर्णिमा तिथि, उत्तराषाढ़ नक्षत्रे, सोमवासरे तदनुसार ०३ अगस्त २०२०
जम्बूद्वीपे, भरतखण्डे आर्यावर्त्तान्तरगते .........प्रदेशे ,........जनपदे.. ..नगरे......गोत्रोत्पन्नः....श्रीमान. (पितामह)....(पिता)...पुत्रस्य... अहम् .'(स्वयं का नाम)....अद्य प्रातः कालीन वेलायाम् सुख शांति समृद्धि हितार्थ ,आत्मकल्याणार्थ ,रोग -शोक निवारणार्थ च यज्ञ कर्मकरणाय भवन्तम् वृणे।
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🌷🍃🌷🍃 ओ३म् सुदिनम्🌷🍃🌷🍃
🌹🌾🍃ओ३म् सुप्रभातम्🌹🌾🍃 🌷🍃🌷🍃 ओ३म् सर्वेभ्यो नम:🌷🍃🌷🍃
🙏🕉🙏 कृण्वन्तोविश्वमार्यम् 🙏🕉️🙏
जय आर्यावर्त 🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳 जय भारत

समस्तीपुर कार्यालय से राजेश कुमार वर्मा द्वारा गुलशन कुमार की विचारधारा प्रकाशित । Published by Jankranti.....

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