🌷 पूर्व जन्म और परजन्म की मूलभूत जानकारी...। 🙏👉🌵आजका शुभ विचार🌵👈🙏
🌷 पूर्व जन्म और परजन्म की मूलभूत जानकारी...।

🙏🕉️ ऊँ नमः शिवाय्🕉️🙏
✍️गुलशन कुमार
समस्तीपुर, बिहार ( जनक्रान्ति हिन्दी न्यूज बुलेटिन कार्यालय 31 अगस्त, 2020)।
🌷संसार में मनुष्य सहित पशु, पक्षी आदि भिन्न-भिन्न योनियां हैं, इन सभी में हम असंख्य बार आ जा चुके हैं। इस जन्म में भी हम पूर्वजन्म से मरने के बाद ईश्वर की व्यवस्था जाति, आयु, भोग के अनुसार यहां आये हैं। यहां से कुछ समय बाद हमारी मृत्यु होगी और हम पुनः जाति, आयु और भोग के अनुसार नया जन्म प्राप्त करेंगे। हमारे शुभ कर्मों से हमें इस जन्म में भी सुख मिलेगा और परजन्म में भी। इस जन्म में अशुभ कर्म करने पर हमारा यह जीवन भी सुख व शान्ति भंग करने वाला हो सकता है और आने वाला जन्म तो होगा ही। बहुत से लोग अच्छे बुरे दोनों प्रकार के कार्य करते हैं, फिर भी सुखी रहते हैं। इसका कारण यह है कि वह पूर्व कृत शुभ कर्मों के कारण सुखी है। इस जीवन में बुरे कर्मों का परिणाम अवश्यमेव दुःख होगा। वह जब मिलेगा तो मनुष्य त्राहि त्राहि करेगा। अस्पतालों व ट्रामा सेन्टरों में जाकर इस तथ्य की पुष्टि की जा सकती है। ईश्वर न करे हम में किसी को इस स्थिति से गुजरना पड़े। इसी लिए ईश्वरोपासना, यज्ञ एवं परोपकार आदि कर्मों का करना आवश्यक है।
अतः मनुष्य को ज्ञान प्राप्ति और सद्कर्मों के प्रति सावधान रहना चाहिये। उसे सत्यार्थप्रकाश ग्रन्थ का तो अवश्य ही अध्ययन करना चाहिये और उसकी शिक्षाओं को बुद्धि की कसौटी पर कस कर उन पर आचरण करना चाहिये। इससे मनुष्य का यह जन्म व परजन्म दोनों सुखी व उन्नत होंगे, यह निश्चित है।
वैदिक साहित्य व सत्यार्थप्रकाश को पढ़कर मनुष्य को अपने पूर्वजन्म व परजन्म विषय की मूलभूत जानकारी मिलती है।
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🕉️🙏 ओ३म् सादर नमस्ते जी 🕉️🙏
🌷🍃आपका दिन शुभ हो 🌷🍃

दिनांक - - ३१ अगस्त २०२०
दिन - - सोमवार
तिथि - - त्रयोदशी
नक्षत्र - - श्रवण
पक्ष - - शुक्ल
माह - - भाद्रपद
ऋतु - - वर्षा
सूर्य - - दक्षिणायन
सृष्टि संवत् - - १,९६,०८,५३,१२१
कलयुगाब्द - - ५१२१
विक्रम संवत - - २०७७
शक संवत् - - १९४२
दयानंदाब्द - - १९६
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🕉️🚩आज का वेद मंत्र 🕉️🚩
🌷ओ३म् येभ्यो माता मधुमत्पिन्वते पय: पीयूषं धौरदितिरद्रिबर्हा:। उक्थशुष्मान् वृषभरान्त्स्वप्नसस्ताँ आदित्याँ अनुमदा स्वस्तये। (ऋग्वेद १०|६३|३)
💐अर्थ :- जिन विद्वानों के लिए प्रभावशाली मेघ सदृश दानशीलता, अखण्ड वेद विद्या व पृथ्वी माता अति मधुर अमृत व दुग्धादि को देतीं हैं, वे अत्यंत बल वाले, श्रेष्ठों का का पौषण करने हमारे, सुकर्मी, अखण्ड व्रत वाले आदित्य ब्रह्मचारी हमारा मंगल करने वाले हो।
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🕉🚩 आज का संकल्प पाठ 🕉🚩
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(सृष्टि संवत् - संवत्सर-अयन - ऋतु- मास-तिथि- नक्षत्र)
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✍️🙏🕉️👉 ओं तत्सद्।श्री व्रह्मणो दिवसे द्वितीये प्रहरार्धे सप्तमे वैवस्वते मन्वन्तरे अष्टाविंशतितमे कलियुगे कलिप्रथमचरणे ,{ एकोवृन्दः षण्णवतिकोटि: अष्टलक्षानि त्रिपञ्चाशत्सहस्राणि एकविंशत्युत्तरशततमे ( १,९६,०८,५३,१२१) सृष्टिसंवत्सरे } { पच्चसहस्स्राणि एकविंशत्युत्तरशततमे ( ५१२१ ) कलियुगे } { सप्तसप्तत्युत्तर द्विसहस्रतमे ( २०७७) विक्रमसंवत्सरे } {षण्णवत्यधिकशततमे (१९६) दयानंद संवत्सरे } रवि दक्षिणायाने, वर्षा ऋतौ,भाद्रपद मासे, शुक्ल पक्षे, त्रयोदशी तिथि, श्रवण नक्षत्रे, सोमवासरे, तदनुसार ३१ अगस्त २०२०
जम्बूद्वीपे, भरतखण्डे आर्यावर्त्तान्तरगते .........प्रदेशे ,........जनपदे.. ..नगरे......गोत्रोत्पन्नः....श्रीमान. (पितामह)....(पिता)...पुत्रस्य... अहम् .'(स्वयं का नाम)....अद्य प्रातः कालीन वेलायाम् सुख शांति समृद्धि हितार्थ ,आत्मकल्याणार्थ ,रोग -शोक निवारणार्थ च यज्ञ कर्मकरणाय भवन्तम् वृणे।
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🌷🍃🌷🍃 ओ३म् सुदिनम्🌷🍃🌷🍃 🌷🍃🌷🍃ओ३म् सुप्रभातम्🌷🍃🌷🍃 🌷🍃🌷🍃ओ३म् सर्वेभ्यो नम:🌷🍃🌷🍃
🕉🙏🕉 कृण्वन्तोविश्वमार्यम् 🕉🙏🕉️
जय आर्यावर्त🇮🇳जय भारत🇮🇳जय बिहार🇮🇳जय मिथिला

समस्तीपुर कार्यालय से गुलशन कुमार की विचार राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित । Published by Jankranti..

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