🔥ओ३म् ....! 🔥 ईश्वर तेरी महिमा 🔥
🔥ओ३म् ....!
🔥 ईश्वर तेरी महिमा 🔥
✍️ Gulshan Kumar

समस्तीपुर, बिहार ( जनक्रान्ति हिन्दी न्यूज बुलेटिन कार्यालय 30 सितम्बर, 2020 ) ।
🔥ओ३म् ....!
🔥 ईश्वर तेरी महिमा 🔥
🌷 मनुष्य मात्र को यह जान लेना चाहिए कि ईश्वर न तो प्रयोग ( Experiment ) करता है और न ही संशोधन ( Modification ) करता है ।सब जीव प्रयोग करके सीखते हैं और उन्नति करते हैं।आज जिस प्रकार के भवन है, ४० वर्ष पूर्व ऐसे भवन नही होते थे, न ही ऐसे अस्त्र -शस्त्र ,वस्त्र,विमान, जलयान व कला थी।मनुष्य प्रयोग कर -करके अपनी कृतियों का विकास करता रहता है ।
मनुष्य अपनी कृतियों के विकास के लिए प्रत्येक कार्य में संशोधन करता रहता है ।परिवर्तनशील जगत् में मनुष्य के बनाए कड़े व कठोर नियमों में भी परिवर्तन होता रहता है । प्रन्तु प्रभु ने मनुष्य की,गाय की, कुत्ते की,घोड़े की, हाथी की,तोते की,आकृति में, जल, वायु व अग्नि के नियमों में लेशमात्र भी संशोधन नही किया।
इसलिए कि प्रभु सर्वज्ञ है, पूर्ण है, सर्वव्यापक है । वह सर्वव्यापक है तभी तो सर्वज्ञ है, वह सर्वज्ञ है तभी तो पूर्ण है । इतना जान लेने से जगत् में बहुत सा भ्रम दूर हो जायेगा ।
परमात्मा के बनाए संविधान ( वेद ज्ञान) में भी अभी तक किसी परिवर्तन कि आवश्यकता नही पड़ी, हमारे देश के संविधान को ही लेलो १९५० से अब तक हजारों परिवर्तन हो चुके ।
ईश्वर के नियम अटल है यह कौन नही जानता ? विज्ञान भी सृष्टि नियमों की अटलता को मानकर ही चलता है ।जब ईश्वर के सब नियम अटल व निर्दोष है तो सृष्टि में आत्मोन्नति, सुख शान्ति को प्राप्त करने के नियम भी अटल ही मानने पडेंगे । प्रभु अपने नियम निरस्त करके नये नियम घड़ता रहता है, यह सोच एक भ्रान्ति है ।यह अन्धविश्वास है ।यह भी एक ज्ञान घोटाला है ।
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🕉️🙏ओ३म् सादर नमस्ते जी 🕉🙏
🌷🍃आपका दिन शुभ हो 🌷🍃

दिनांक - - ३० सितम्बर २०२०
दिन - - बुधवार
तिथि - - चतुर्दशी
नक्षत्र - - पूर्वाभाद्रपद
पक्ष - - शुक्ल
माह - - आश्विन
ऋतु - - शरद
सूर्य - - दक्षिणायण
सृष्टि संवत् - - १,९६,०८,५३,१२१
कलयुगाब्द - - ५१२१
विक्रम संवत् - - २०७७
शक संवत् - - १९४२
दयानंदाब्द - - १९६
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🕉️🚩 आज का वेद मंत्र 🕉️🚩
🌷 ईशा वास्यमिदं सर्वं यत्किंच जगत्वां जगत् ।
तेन त्यक्तेन भुञ्जीवथा मा गृध: कस्य स्विद्वनम् ।। ( यजुर्वेद )
🌷 अर्थ -: इस गतिशील संसार में जो कुछ भी है ईशवर उस सब में बसा हुआ है । इसलिए वह हमें सब ओर से देखता है ।यह जानकर तथा उससे डर कर दुसरों के पदार्थों को अन्याय से लेने की कभी इच्छा मत कर ।अन्याय के त्याग और न्यासचरण रूप धर्म से आनन्द को भोग ।
🕉🚩 आज का संकल्प पाठ 🕉🚩
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(सृष्टि संवत् - संवत्सर-अयन - ऋतु- मास-तिथि- नक्षत्र)
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👉🙏🌹🕉️✍️ ओं तत्सद्।श्री व्रह्मणो दिवसे द्वितीये प्रहरार्धे सप्तमे वैवस्वते मन्वन्तरे अष्टाविंशतितमे कलियुगे कलिप्रथमचरणे ,{ एकोवृन्दः षण्णवतिकोटि: अष्टलक्षानि त्रिपञ्चाशत्सहस्राणि एकविंशत्युत्तरशततमे ( १,९६,०८,५३,१२१) सृष्टिसंवत्सरे } { पच्चसहस्स्राणि एकविंशत्युत्तरशततमे ( ५१२१ ) कलियुगे } { सप्तसप्तत्युत्तर द्विसहस्रतमे ( २०७७) विक्रमसंवत्सरे } {षण्णवत्यधिकशततमे (१९६) दयानंद संवत्सरे } रवि दक्षिणायाने, शरद ऋतौ, आश्विन मासे, शुक्ल पक्षे, चतुर्दशी तिथि, पूर्वाभाद्रपद नक्षत्रे, बुधवासरे , तदनुसार ३० सितम्बर २०२०
जम्बूद्वीपे, भरतखण्डे आर्यावर्त्तान्तरगते .........प्रदेशे ,........जनपदे.. ..नगरे......गोत्रोत्पन्नः....श्रीमान. (पितामह)....(पिता)...पुत्रस्य... अहम् .'(स्वयं का नाम)....अद्य प्रातः कालीन वेलायाम् सुख शांति समृद्धि हितार्थ ,आत्मकल्याणार्थ ,रोग -शोक निवारणार्थ च यज्ञ कर्मकरणाय भवन्तम् वृणे।
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🌷🍃🌷🍃 ओ३म् सुदिनम्🌷🍃🌷🍃
🌷🍃🌷🍃ओ३म् सुप्रभातम्🌷🍃🌷🍃 🌷🍃🌷🍃ओ३म् सर्वेभ्यो नम:🌷🍃🌷🍃
🕉🙏☪️कृण्वन्तोविश्वमार्यम् 🕉🙏☪️
जय आर्यावर्त 🕉जय भारत☪️जय मिथिला 🕉️जय बिहार

समस्तीपुर कार्यालय से प्रकाशक राजेश कुमार वर्मा द्वारा गुलशन कुमार की विचारधारा प्रकाशित । Published by Jankranti.....

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