🔥 ओ३म् .....! 👉🙏🏿सुप्रभात्🙏🏿👈
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🔥 ओ३म् .....!
👉🙏🏿सुप्रभात्🙏🏿👈
🗣️✍️ जनक्रान्ति कार्यालय से गुलशन कुमार की अध्यात्मिक विचार
समस्तीपुर, बिहार ( जनक्रान्ति हिन्दी न्यूज बुलेटिन कार्यालय 08 नवंबर, 2020 ) ।
🌷विपत्तियों, बाधाओं और असफलताओं से घबराना और निराश होना उचित नहीं क्योंकि इनसे हमारी क्षमता और योग्यता की परीक्षा होती है। जैसे कसौटी पर कसने, घिसने काटने और आग में तपा कर हथौड़ी से कूटने पर सोने की परीक्षा होती है वैसे ही संघर्ष, पराक्रम, धैर्य, साहस और शील- चरित्र से हमारी परीक्षा होती है।
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⛳🕉️आज का वेद मंत्र 🕉️⛳
🌷 ओ३म् यस्मादृते न सिध्यति यज्ञों विपश्चितश्चन ।स धीनां योगमिन्वति।।
💐 अर्थ:- ( यस्मात् विपश्चित; ऋते यज्ञ: चन न सिध्यति)
जिस ज्ञानी, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के बिना संसार रूप यज्ञ भी नहीं सिद्ध हो सकता ।
( स: धीनां योगमार्ग इन्वति)
वह जगदीश्वर सब मनुष्यों की बुद्धि और कर्मों के संयोग को व्याप्त करता है वा जानता है ।
बुद्धि को सजग करने वाले जिस ज्ञानी परमेश्वर के बिना यह यज्ञ रूप संसार कभी बन नहीं सकता, वही परमेश्वर इस संसार में उत्पन्न होने वाले सब मनुष्यों के ज्ञान और कर्मों के योग को भलीभांति जानकर सबको अपने - अपने कर्मों के अनुसार फल प्रदान कराता है ।
बड़े बड़े ज्ञानी, विद्वानों के भी श्रेष्ठ कर्म, उत्तम् कर्म उसकी कृपा के बिना कभी सफल नहीं होते। अपने शुभं कर्मों के आरम्भ में उसका आह्वान करते हैं ।वह समस्त बुद्धियों ,वृत्तियों और कर्मों, आचरणों को योग में लगाने पर अर्थात एकाग्र चित्त ध्यान योग करने पर मिलता है ।
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🕉🙏🏿आज का संकल्प पाठ 🙏🏿🕉
(सृष्टि संवत् - संवत्सर-अयन - ऋतु- मास-तिथि- नक्षत्र)🔥💥🌟☀️
👉🗣️🕉️ 🙏🏿ओं तत्सद्।श्री व्रह्मणो दिवसे द्वितीये प्रहरार्धे सप्तमे वैवस्वते मन्वन्तरे अष्टाविंशतितमे कलियुगे कलिप्रथमचरणे ,{ एकोवृन्दः षण्णवतिकोटि: अष्टलक्षानि त्रिपञ्चाशत्सहस्राणि एकविंशत्युत्तरशततमे ( १,९६,०८,५३,१२१) सृष्टिसंवत्सरे } { पच्चसहस्स्राणि एकविंशत्युत्तरशततमे ( ५१२१ ) कलियुगे } { सप्तसप्तत्युत्तर द्विसहस्रतमे ( २०७७) विक्रमसंवत्सरे } {षण्णवत्यधिकशततमे (१९६) दयानंद संवत्सरे } रवि दक्षिणायाने, हेमंत ऋतौ, कार्तिक मासे, कृष्ण पक्षे, सप्तमी तिथि, पुष्य नक्षत्रे, रविवासरे, तदनुसार ०८ नवम्बर २०२०
जम्बूद्वीपे, भरतखण्डे आर्यावर्त्तान्तरगते .........प्रदेशे ,........जनपदे.. ..नगरे......गोत्रोत्पन्नः....श्रीमान. (पितामह)....(पिता)...पुत्रस्य... अहम् .'(स्वयं का नाम)....अद्य प्रातः कालीन वेलायाम् सुख शांति समृद्धि हितार्थ ,आत्मकल्याणार्थ ,रोग -शोक निवारणार्थ च यज्ञ कर्मकरणाय भवन्तम् वृणे।
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🕉️🙏 ओ३म् सादर नमस्ते जी 🙏🕉️
🌷🍃 आपका दिन शुभ हो 🌷🍃
दिनांक - - ०८ नवम्बर २०२०
दिन - - रविवार
तिथि - - सप्तमी ( प्रातः ०७:२९ तक उपरान्त अष्टमी )
नक्षत्र - - पुष्य ( प्रातः ०८:४५ तक उपरान्त आश्लेषा )
पक्ष - -कृष्ण
माह - - कार्तिक
ऋतु - - हेमन्त
सूर्य - - दक्षिणायण
🌞 सूर्योदय - - ( दिल्ली में प्रातः ६ बजकर ३८ मिनट पर )
🌞 सूर्यास्त - - ( दिल्ली में सायं ५ बजकर ३१ मिनट पर)
सृष्टि संवत् - - १,९६,०८,५३,१२१
कलयुगाब्द - - ५१२१
विक्रम संवत् - - २०७७
शक संवत् - - १९४२
दयानंदाब्द - - १९६
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🌷🍃🌷🍃 ओ३म् सुदिनम्🌷🍃🌷🍃
🌷🍃🌷🍃ओ३म् सुप्रभातम्🌷🍃🌷🍃
🌷🍃🌷🍃ओ३म् सर्वेभ्यो नम:🌷🍃🌷🍃
🕉🙏 कृण्वन्तोविश्वमार्यम् 🙏🏿🕉️
जय आर्यावर्त 🕉जय भारत☪️जय बिहार✝️जय मिथिल
जनक्रान्ति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक/सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा गुलशन कुमार की रिपोर्ट प्रकाशित व प्रसारित ।





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