🌹🌷🙏सुप्रभात🙏🌷🌹 👉🙏🏿🌹आजका दिन शुभ हों...🌹🙏🏿👈 👉🙏🏿🌹आजका शुभ विचार..🌹🙏🏿👈

                          🌹🌷🙏सुप्रभात🙏🌷🌹

         👉🙏🏿🌹आजका दिन शुभ हों...🌹🙏🏿👈

         👉🙏🏿🌹आजका शुभ विचार..🌹🙏🏿👈

                               🌹🌷🙏सुप्रभात🙏🌷🌹

          👉🙏🏿🌹आजका दिन शुभ हों...🌹🙏🏿👈

           👉🙏🏿🌹आजका शुभ विचार..🌹🙏🏿👈

✍️जनक्रान्ति कार्यालय से नागेन्द्र कुमार सिन्हा की अध्यात्मिक विचार ।

समस्तीपुर, बिहार ( जनक्रान्ति हिन्दी न्यूज बुलेटिन कार्यालय 24 दिसम्बर,2020 ) । जनक्रान्ति हिन्दी न्यूज बुलेटिन/डेली हंट प्रकाशन परिवार की ओर से तमाम देशवासियों हार्दिक शुभकामनाएं व बधाई के साथ ही सबों का आजका दिन मंगलमय हो.. इसी शुभकामना के साथ नित्य रोज का सुबह का राम - राम ॥ 

दिनांक 24 दिसम्बर 2020

दिन - गुरुवार

विक्रम संवत - 2077

शक संवत - 1942

ऋतु - शिशिर

मास - मार्गशीर्ष

पक्ष - शुक्ल

तिथि - दशमी रात्रि 11:17 तक तत्पश्चात एकादशी

नक्षत्र - अश्विनी पूर्ण रात्रि तक

सूर्योदय - 07:14 

सूर्यास्त - 18:02 

          👉🙏🏿🌹आजका शुभ विचार..🌹🙏🏿👈

🌷 मोक्षदा एकादशी🌷

➡ 24 दिसम्बर 2020 गुरुवार को रात्रि 11:17 से 26 दिसम्बर, शनिवार को रात्रि 01:54 तक (यानी 25 दिसम्बर, शुक्रवार को पूरा दिन) एकादशी है ।

💥 विशेष - 25 दिसम्बर, शुक्रवार को एकादशी का व्रत (उपवास) रखे

   👉🙏🏿🌹आरोग्य औषधि विचार..🌹🙏🏿👈

🌷 तुलसी व तुलसी-माला की महिमा🌷

➡ 25 दिसम्बर को तुलसी पूजन दिवस है ।

🌿 तुलसीदल एक उत्कृष्ट रसायन है। यह गर्म और त्रिदोषशामक है। रक्तविकार, ज्वर, वायु, खाँसी एवं कृमि निवारक है तथा हृदय के लिए हितकारी है।

🌿 सफेद तुलसी के सेवन से त्वचा, मांस और हड्डियों के रोग दूर होते हैं।

🌿 काली तुलसी के सेवन से सफेद दाग दूर होते हैं।

🌿 तुलसी की जड़ और पत्ते ज्वर में उपयोगी हैं।

🌿 तुलसी की चाय पीने से ज्वर, आलस्य, सुस्ती तथा वातप विकार दूर होते हैं, भूख बढ़ती है।

🌿 तुलसी सेवन से शरीर स्वस्थ और सुडौल बनता है। मंदाग्नि, कब्जियत, गैस, अम्लता आदि रोगों के लिए यह रामबाण औषधि सिद्ध हुई है। 

🌿 तुलसी की पत्तियों के नियमित सेवन से क्रोधावेश एवं कामोत्तेजना पर नियंत्रण रहता है ।

🌿 तुलसी के समीप पड़ने, संचिन्तन करने से, दीप जलने से और पौधे की परिक्रमा करने से पांचो इन्द्रियों के विकार दूर होते है ।

             🌷 श्रीमद् भगवद् गीता जयंती🌷

➡ 25 दिसम्बर 2020 शुक्रवार को श्रीमद् भगवद् गीता जयंती है।

🙏🏻 धर्म ग्रंथों के अनुसार मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र के मैदान में अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। इसलिए प्रतिवर्ष इस तिथि को गीता जयंती का पर्व मनाया जाता है। गीता एकमात्र ऐसा ग्रंथ है, जिसकी जयंती मनाई जाती है।

🙏🏻 गीता दुनिया के उन चंद ग्रंथों में शुमार है, जो आज भी सबसे ज्यादा पढ़े जा रहे हैं और जीवन के हर पहलू को गीता से जोड़कर व्याख्या की जा रही है। इसके 18 अध्यायों के करीब 700 श्लोकों में हर उस समस्या का समाधान है जो कभी ना कभी हर इंसान के सामने आती है। आज हम आपको इस लेख में गीता के 9 चुनिंदा प्रबंधन सूत्रों से रूबरू करवा रहे हैं, जो इस प्रकार हैं-👇

🌷 01 : श्लोक

👉 कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।

मा कर्मफलहेतु र्भूर्मा ते संगोस्त्वकर्मणि ।।👇

🙏🏻 अर्थ- भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं कि हे अर्जुन। कर्म करने में तेरा अधिकार है। उसके फलों के विषय में मत सोच। इसलिए तू कर्मों के फल का हेतु मत हो और कर्म न करने के विषय में भी तू आग्रह न कर।

➡ मैनेजमेंट सूत्र- भगवान श्रीकृष्ण इस श्लोक के माध्यम से अर्जुन से कहना चाहते हैं कि मनुष्य को बिना फल की इच्छा से अपने कर्तव्यों का पालन पूरी निष्ठा व ईमानदारी से करना चाहिए। यदि कर्म करते समय फल की इच्छा मन में होगी तो आप पूर्ण निष्ठा से साथ वह कर्म नहीं कर पाओगे। निष्काम कर्म ही सर्वश्रेष्ठ परिणाम देता है।

🌷 02 : श्लोक

👉 योगस्थ: कुरु कर्माणि संग त्यक्तवा धनंजय।

सिद्धय-सिद्धयो: समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते।। 👇 

🙏🏻 अर्थ- हे धनंजय (अर्जुन)। कर्म न करने का आग्रह त्याग कर यस अपयश सम बृद्धि होकर योग युक्त होकर कर्म कर ! 

➡ मैनेजमेंट सूत्र- धर्म का अर्थ होता है कर्तव्य। धर्म के नाम पर हम अक्सर सिर्फ कर्मकांड, पूजा-पाठ, तीर्थ-मंदिरों तक सीमित रह जाते हैं। हमारे ग्रंथों ने कर्तव्य को ही धर्म कहा है। भगवान कहते हैं कि अपने कर्तव्य को पूरा करने में कभी यश-अपयश और हानि-लाभ का विचार नहीं करना चाहिए। बुद्धि को सिर्फ अपने कर्तव्य यानी धर्म पर टिकाकर काम करना चाहिए। इससे परिणाम बेहतर मिलेंगे और मन में शांति का वास होगा। मन में शांति होगी तो परमात्मा से आपका योग आसानी से होगा । 👇

🌷 03 : श्लोक 

👉नास्ति बुद्धिरयुक्तस्य न चायुक्तस्य भावना।

न चाभावयत: शांतिरशांतस्य कुत: सुखम्।👇

🙏🏻 अर्थ- योग रहित पुरुष में निश्चय करने की बुद्धि नहीं होती और उसके मन में भावना भी नहीं होती। ऐसे भावना रहित पुरुष को शांति नहीं मिलती और जिसे शांति नहीं, उसे सुख कहां से मिलेगा।👇

➡ मैनेजमेंट सूत्र - हर मनुष्य की इच्छा होती है कि उसे सुख प्राप्त हो, इसके लिए वह भटकता रहता है, लेकिन सुख का मूल तो उसके अपने मन में स्थित होता है। जिस मनुष्य का मन इंद्रियों यानी धन, वासना, आलस्य आदि में लिप्त है, उसके मन में भावना (आत्मज्ञान) नहीं होती।

👉🏻 शेष कल पढ़े..........। 

                                🙏🌹🙏🏿राधे राधे🙏🏿🌹🙏

जनक्रान्ति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक/सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा नागेन्द्र कुमार सिन्हा की अध्यात्मिक विचार प्रकाशित व प्रसारित ।

Comments