“मैं वकील हूँ — ज़रूरत पड़े तो याद कर लेना, बात करना छोड़ सकता हूँ लेकिन अन्याय के खिलाफ साथ देना नहीं” : मो. बैरम रकी
जब सिस्टम बोलने नहीं देता, तब वकील खड़ा होता है : अधिवक्ता मो. बैरम रकी
जनक्रांति कार्यालय रिपोर्ट
“मैं वकील हूँ — ज़रूरत पड़े तो याद कर लेना, बात करना छोड़ सकता हूँ लेकिन अन्याय के खिलाफ साथ देना नहीं” : मो. बैरम रकी
✍️ लेखक: एडवोकेट मोहम्मद बैरम रकी
वकील जब बोलता है तो दलील देता है,
और जब चुप होता है तो इतिहास लिखता है।
जनक्रांति इंडिया न्यूज़ डेस्क/खगड़िया/समस्तीपुर, बिहार ( जनक्रांति कार्यालय)। यह कोई डायलॉग नहीं है।
यह कोई सोशल मीडिया स्टेटस नहीं है।
यह एक संविधानिक चेतावनी है।
👉 “ज़रूरत पड़े तो याद कर लेना — वकील हूँ,
बात करना छोड़ सकता हूँ,
लेकिन साथ देना नहीं।”
⚖️ वकील होना पेशा नहीं, ज़िम्मेदारी है
वकील वह नहीं होता जो सिर्फ फीस देखकर केस उठाए।
वकील वह होता है जो अन्याय देखकर चुप न रहे।
मैं बात करना छोड़ सकता हूँ —
क्योंकि कभी-कभी शब्द कमजोर पड़ जाते हैं।
लेकिन साथ देना नहीं छोड़ सकता —
क्योंकि संविधान गवाह है।
🩸 जब सिस्टम बोलने नहीं देता, तब वकील खड़ा होता है
जब गरीब की आवाज़ दबाई जाती है,
जब पुलिस FIR लिखने से मना कर देती है,
जब अफसर फाइल में ज़हर भर देता है,
जब नेता मंच से झूठ बोलकर उतर जाता है —
तब कोई पत्रकार नहीं,
कोई नेता नहीं,
सबसे पहले वकील को याद किया जाता है।
🔥 यह साथ फोटो से नहीं, लड़ाई से जुड़ा है.....
आज के दौर में
साथ देना मतलब —
सेल्फी नहीं,
साझा नहीं,
हैशटैग नहीं।
साथ देना मतलब —
कोर्ट में खड़ा होना,
कानून की किताब खोलना,
सिस्टम से भिड़ जाना।
और हाँ,
इसके बाद बात करना
ज़रूरी नहीं रहता।
🧑⚖️ वकील चुप हो सकता है, बिक नहीं सकता
मैं चुप रह सकता हूँ —
लेकिन गलत के साथ नहीं।
मैं पीछे हट सकता हूँ —
लेकिन अन्याय के सामने नहीं।
मैं समझौता कर सकता हूँ —
लेकिन संविधान के साथ नहीं।
याद रखिए,
वकील जब बोलता है तो दलील देता है,
और जब चुप होता है तो इतिहास लिखता है।
🇮🇳 यह सिर्फ एक वकील की बात नहीं है
यह उस हर इंसान की आवाज़ है
जो सच के साथ खड़ा है।
जो डरता नहीं,
जो झुकता नहीं,
जो बिकता नहीं।
अगर कभी लगे कि
सिस्टम आपको अकेला कर रहा है —
तो याद कर लेना,
👉 “एक वकील है,
जो बात करना छोड़ सकता है,
लेकिन साथ देना नहीं।”
🛑 यह लेख अहंकार नहीं, ऐलान है।
🛑 यह धमकी नहीं, भरोसा है।
✊ खगड़िया से उठी यह आवाज़
हिंदुस्तान ही नहीं,
पूरी दुनिया को यह याद दिलाने के लिए है —
⚖️ जब तक एक भी वकील ज़िंदा है,
अन्याय पूरी तरह जीत नहीं सकता।
उपरोक्त आलेख वाट्सऐप माध्यम से प्रकाशन कार्यालय को संप्रेषित जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक /सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित।

Comments