दूर के ज़ख़्म, पास की बेपरवाही सोशल मीडिया पर—बांग्लादेश पर बहसें ग़ज़ा पर नारे, अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर ज्ञान

"ग़ज़ा–बांग्लादेश पर आँसू, अपने मोहल्ले पर खामोशी:भारत की सबसे खतरनाक नैतिक पाखंड”

✍️ लेखक: एडवोकेट मोहम्मद बैरम रकी

दूर के ज़ख़्म, पास की बेपरवाही
सोशल मीडिया पर—बांग्लादेश पर बहसें ग़ज़ा पर नारे, अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर ज्ञान

जनक्रांति कार्यालय रिपोर्ट

समस्तीपुर /खगड़िया,बिहार(जनक्रांति न्यूज़ डेस्क )। हिंदुओं को बांग्लादेश की चिंता खाए जाती है,मुसलमानों को ग़ज़ा की।
लेकिन सवाल यह है—
अपने देश, अपने शहर,अपने मोहल्ले की चिंता किसे है..?
हम दुनिया के हर कोने के लिए भावुक हो जाते हैं,पर अपने घर के आँगन में गिरती दीवार हमें दिखाई नहीं देती।
यही वह बीमारी है,जिसने भारत को संवेदनशील नहीं,संवेदनाहीन बना दिया है।
🌍 दूर के ज़ख़्म, पास की बेपरवाही
सोशल मीडिया पर—बांग्लादेश पर बहसें
ग़ज़ा पर नारे, अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर ज्ञान लेकिन उसी वक्त—
पड़ोस का स्कूल बंद है,
गली का नल सूखा है,
पंचायत भ्रष्ट है,
बेरोज़गार युवा टूट रहा है,
और हम...?
हम रील देख रहे हैं, स्टेटस लगा रहे हैं।
🧠 यह धर्म नहीं, पलायन है
धर्म अगर इंसान को अपने पड़ोसी के दुख से काट दे,तो वह धर्म नहीं—
भावनात्मक पलायन है।
सच्चा हिंदू वही है, जो अपने गांव के मंदिर के साथ अपने गांव के स्कूल की भी चिंता करे।
सच्चा मुसलमान वही है, जो ग़ज़ा के लिए दुआ के साथ अपने मोहल्ले के बच्चे की फीस का भी सवाल उठाए।
.         देश का तीसरा विकल्प 
युग क्रांति दल की सदस्य्ता ग्रहण कर देश में व्याप्त राजनीति भ्र्ष्टाचार को समाप्त कर जनता सरकार का गठन करें..

🔥 सवाल जो किसी धर्म से नहीं, ज़मीर से है :-अगर—
आपका पड़ोसी भूखा है,
आपकी पंचायत लूटी जा रही है,
आपके शहर में न्याय बिक रहा है,
तो ग़ज़ा और बांग्लादेश पर आपकी संवेदना केवल शोर है,संस्कार नहीं।
🇮🇳 भारत को नारों नहीं, उदाहरणों की ज़रूरत है,
भारत को चाहिए—
मोहल्ले में इंसाफ...??
पंचायत में ईमानदारी...???
स्कूल में शिक्षा...????
अस्पताल में इलाज...??????
क्योंकि जो देश अपने घर को नहीं संभाल पाता,वह दुनिया को क्या दिशा देगा...?????
⚖️ असली राष्ट्रवाद, असली इंसानियत
राष्ट्रवाद झंडे से नहीं,
जिम्मेदारी से बनता है।
इंसानियत आँसू से नहीं,
कर्म से साबित होती है।
अगर हम अपने आस–पड़ोस को
ठीक कर लें,
तो न हिंदू कमजोर होंगे
न मुसलमान।
तब भारत सिर्फ़ बोलेगा नहीं,
दुनिया को उदाहरण देगा।
🫱आख़िरी पंक्ति (जो तहलका मचाएगी)
दूर के दर्द पर रोना आसान है,
पास के ज़ुल्म से लड़ना मुश्किल—
और भारत को अब
रोने वाले नहीं,
लड़ने वाले नागरिक चाहिए।
#IndiaFirst
#AsliInsaniyat
#BeyondReligion
#MohallaFirst
#बिहारसेभारत
उपरोक्त आलेख wapp माध्यम से जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन प्रकाशन कार्यालय को दिया गया.. प्रधान कार्यालय से प्रकाशक/सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रसारित व प्रकाशित।

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