किसी एक नेता पर आरोप नहीं—यह पूरे समाज के चेहरे पर रखा गया आईना है: मो.बैरम रकी

जब समाज ही चोर हो जाए, तो ईमानदार नेता किस मिट्टी से जन्म ले..?

 जब समाज ही चोर हो जाए, तो ईमानदार नेता किस मिट्टी से जन्म ले.?

यह किसी एक नेता पर आरोप नहीं—
यह पूरे समाज के चेहरे पर रखा गया आईना है : Adv. बैरम रकी

जनक्रान्ति कार्यालय रिपोर्ट 

 🔥लेखक:
✒️ एडवोकेट Md. Bairam Rakee

(भारत की आत्मा से पूछे गए सबसे खतरनाक सवाल पर एक खुला इकरार)
=====

जनक्रान्ति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन न्यूज़ डेस्क, भारत। 
यह सवाल कोई नारा नहीं है।
यह किसी पार्टी के खिलाफ भाषण नहीं है ।
यह किसी एक नेता पर आरोप नहीं—
यह पूरे समाज के चेहरे पर रखा गया आईना है।
जब समाज ही चोर हो जाए, तो नेता ईमानदार कहां से होगा...???
हम रोज़ गाली नेता को देते हैं,
लेकिन कभी खुद से नहीं पूछते—
रिश्वत हम देते हैं, दोष नेता का..????

.     युग क्रांति दल के सदस्य बनें

जाति देखकर वोट हम डालते हैं, गलती नेता की..??
फॉर्म में झूठ हम लिखते हैं, पाप सांसद का...???
लाइन तोड़कर हम घुसते हैं, चरित्र विधायक का..???
अगर बीज सड़ा हुआ हो,
तो क्या फसल ईमानदार होगी..?
🧠 समाज: अपराध की नर्सरी
नेता आसमान से नहीं उतरते।
वे हमारे ही मोहल्ले, हमारे ही घर,
हमारी ही सोच, हमारी ही चुप्पी से निकलते हैं।
जिस समाज में नक़ल को “जुगाड़” कहा जाए रिश्वत को “सिस्टम”
झूठ को “समझदारी” और अन्याय पर चुप्पी को “शांति” वहाँ ईमानदार नेता पैदा होना कुदरत के खिलाफ़ साजिश है।
⚖️ संविधान नहीं मरा, चरित्र मरा है
हम कहते हैं—
“देश बर्बाद हो गया”
नहीं....!
देश नहीं, समाज बर्बाद हुआ है।
संविधान आज भी ज़िंदा है,
लेकिन संवेदनाएं मर चुकी हैं।
हम न्याय चाहते हैं,
लेकिन तब तक—
जब तक वो हमारे खिलाफ़ न हो।
हम भ्रष्टाचार के खिलाफ़ हैं,
लेकिन तब तक—
जब तक उसमें हमारा फायदा न छुपा हो।
🔥 नेता नहीं, समाज कठघरे में है,
यह समय नेता को कोसने का नहीं,
खुद को कटघरे में खड़ा करने का है ।
ईमानदार नेता चाहिए...???
तो पहले—
ईमानदार मतदाता बनो,
ईमानदार नागरिक बनो,
ईमानदार अभिभावक बनो
ईमानदार शिक्षक बनो
ईमानदार वकील, डॉक्टर, अफसर बनो
क्योंकि चरित्रहीन समाज में ईमानदार नेता एक दुर्घटना होता है—
नियम नहीं।
=======
🌍 यह लेख भारत तक सीमित नहीं
यह सवाल अफ्रीका से अमेरिका तक है,
यूरोप से एशिया तक है—
जहाँ-जहाँ
लोकतंत्र है
और चरित्र कमजोर है।
यह लेख हर उस देश के लिए है
जहाँ लोग कहते हैं—
> “हम ठीक हैं, नेता खराब हैं”
=====
✍️ आख़िरी सच (जो चुभेगा)
अगर आपको यह लेख बुरा लगा—
तो समझिए यह सच आपके दरवाज़े तक पहुँच चुका है। क्योंकि समाज जब तक खुद ईमानदार नहीं बनेगा,
तब तक ईमानदार नेता=
केवल भाषणों में ही पैदा होते रहेंगे।
®®®®®®®®®®
> “क्रांति संसद से नहीं,
चरित्र से शुरू होती है।”
Advocate Md Bairam Rakee 
District Bar Association khagdiya, Bihar। 
उपरोक्त जानकारी वाट्सऐप माध्यम से प्रधान कार्यालय को दिया गया। जनक्रान्ति प्रकाशन कार्यालय से प्रकाशक/सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित।

Comments