जब जमीन का रखवाला ही जमीन निगलने लगे—तो विकास काग़ज़ों में सिमट जाता है।

आरोपों के कटघरे में खड़ा राजस्व विभाग 

जनक्रांति कार्यालय न्यूज डेस्क, भारत 

बिहार के बाबुओं की काली कमाई का रियल एस्टेट साम्राज्य: बनारस से बेंगलुरु तक फैला भ्रष्टाचार का नक्शा—क्या अब खुदाई होगी..?”

✍️ लेखक: एडवोकेट मोहम्मद बैरम रकी

जब जमीन का रखवाला ही जमीन निगलने लगे—तो विकास काग़ज़ों में सिमट जाता है।

पटना,बिहार(जनक्रान्ति हिन्दी न्यूज बुलेटिन कार्यालय न्यूज डेस्क, भारत)।
बनारस–रांची–सिलीगुड़ी–गोरखपुर: भ्रष्टाचार की नई राजधानी..?
बिहार का राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग—जिसका मूल उद्देश्य आम नागरिक को न्याय, जमीन पर अधिकार और पारदर्शिता देना है—आज आरोपों के कटघरे में खड़ा है। चर्चा है कि काली कमाई का सबसे ठोस निवेश अब खेत-खलिहान में नहीं, बल्कि देश के रणनीतिक शहरों की प्रॉपर्टी में हो रहा है—बनारस, रांची, सिलीगुड़ी, गोरखपुर जैसे शहरों में बड़े पैमाने पर रियल एस्टेट।
यह कोई तुक्का नहीं, बल्कि सोची-समझी निवेश रणनीति है—जहाँ पूछने वाला कम, पहचानने वाला कोई नहीं, और पकड़ ढीली।
नोएडा–गुड़गांव–बेंगलुरु: अगली पीढ़ी के लिए ‘सेफ हेवन’
जिन बाबुओं के बच्चे “थोड़े बड़े” हो चुके हैं—उनके लिए निवेश का रुख नोएडा, गुड़गांव और बेंगलुरु की ओर है।
यहाँ फ्लैट, विला, कमर्शियल स्पेस—सब कुछ बेहिसाब।
कारण साफ़ है:
बिहार में खरीदी घट रही है
गोतिया, पड़ोसी, जलनखोर—सूचना लीक कर देता है
बाहर किसी को मतलब नहीं होता
यही है “सेफ इन्वेस्टमेंट मॉडल”।
नेटवर्क, बेनामी और बिचौलिये: सिस्टम के भीतर सिस्टम
यह केवल कुछ अफसरों की कहानी नहीं—यह नेटवर्क है।
बिचौलिये
रिश्तेदारों के नाम
शेल कंपनियाँ
बेनामी सौदे
कैश-टू-एसेट कन्वर्ज़न
यानी काग़ज़ साफ़, ज़मीर गंदा।
सबूत कहाँ हैं? सवाल सही हैं!
सबूत हवा में नहीं होते—वे रजिस्ट्रेशन ऑफिस, स्टाम्प ड्यूटी, नगर निगम, बैंक लोन, आईटी रिटर्न, विदेशी ट्रांजैक्शन—हर जगह बिखरे पड़े हैं।
ज़रूरत है तो बस राजनीतिक इच्छाशक्ति की।
डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा—अब या कभी नहीं
अगर माननीय डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा चाह लें—
.   नववर्ष की हार्दिक शुभकामनायें
तो यह पूरी परत उधेड़ी जा सकती है।
राज्य-स्तरीय टास्क फोर्स
अंतरराज्यीय संपत्ति ऑडिट
सेवा काल बनाम संपत्ति तुलनात्मक जांच
बेनामी अधिनियम का कठोर उपयोग
ईडी/आईटी के साथ समन्वय
यह कदम किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि बिहार के भविष्य के लिए होगा।
बिहार का भला—भ्रष्टाचार की जड़ पर वार
आज बिहार को सड़क, स्कूल, अस्पताल से पहले ईमानदार व्यवस्था चाहिए।
जब जमीन का रखवाला ही जमीन निगलने लगे—तो विकास काग़ज़ों में सिमट जाता है।
यह लेख आरोप नहीं, चेतावनी है।
यह शोर नहीं, सवाल है।
यह राजनीति नहीं, जनहित है।
अंतिम अपील
अगर आज खुदाई नहीं हुई—
तो कल ये साम्राज्य और फैलेंगे।
और फिर इतिहास पूछेगा:
“जब मौका था, तब चुप क्यों थे..?”
बिहार जागे—भ्रष्टाचार भागे।
अब फैसला सत्ता को करना है..??
उपरोक्त आलेख जनक्रांति प्रकाशन कार्यालय को वाट्सऐप माध्यम से संप्रेषित व प्रधान कार्यालय से प्रकाशक/सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित।

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