बिहार ₹0 का विकास, ₹60 करोड़ का सवाल — क्या बिहार सिर्फ वोट देने की मशीन है.?”
"बिहार की ज़मीनी सच्चाई बनाम सांसदों की चुप्पी..?
जनक्रांति कार्यालय से अधिवक्ता मोहम्मद बैरम रकी की रिपोर्ट
इंडिया न्यूज़ डेस्क (जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन कार्यालय 15 जनवरी, 2026 खगड़िया,बिहार)। बिहार…"₹0 का विकास, ₹60 करोड़ का सवाल — क्या बिहार सिर्फ वोट देने की मशीन है..?”
एक ऐसा राज्य जहाँ सपने गरीबी में पैदा होते हैं,संघर्ष में पलते हैं और अक्सर सिस्टम की लापरवाही में दम तोड़ देते हैं। यही बिहार आज एक ऐसे सच से रू-ब-रू है, जो न सिर्फ चौंकाने वाला है बल्कि लोकतंत्र के मुंह पर जोरदार तमाचा भी है।
हाँ, एक रुपया भी नहीं।
यह कोई अफवाह नहीं,
कोई विपक्षी आरोप नहीं,
बल्कि सरकारी MPLADS डेटा की नंगी हकीकत है।
₹9.8 करोड़ आए… पर विकास गया कहाँ?
नियम साफ है —
हर सांसद को सालाना ₹5 करोड़
यानि दो साल में लगभग ₹9.8 करोड़।
6 सांसद × ₹9.8 करोड़
= लगभग ₹60 करोड़
और खर्च.?
₹0
ना सड़क,
ना स्कूल,
ना अस्पताल,
ना पानी,
ना स्किल सेंटर।
ये हैं वो नाम, जिनसे सवाल पूछना ज़रूरी है:
ललन सिंह (JDU) – केंद्रीय मंत्री
मीसा भारती (RJD)
राजीव प्रताप रूडी (BJP)
डॉ. संजय जायसवाल (BJP)
विवेक ठाकुर (BJP)
शंभवी चौधरी (LJP रामविलास)
पार्टी अलग-अलग है,
लेकिन लापरवाही एक जैसी।
यहाँ लोग इलाज के लिए जमीन बेचते हैं
स्कूलों में बच्चे पेड़ के नीचे पढ़ते हैं
युवा डिग्री लेकर बेरोज़गारी की लाइन में खड़े हैं
गांव आज भी पक्की सड़क का इंतज़ार कर रहे हैं
और वहीं सांसद निधि…
बैंक अकाउंट में सो रही है।
बहाने बहुत होंगे, जवाब कोई नहीं
कोई कहेगा —
“प्रशासनिक देरी है”
कोई बोलेगा —
“तकनीकी अड़चन है”
लेकिन दो साल में एक भी योजना की सिफारिश नहीं करना
ये देरी नहीं,
ये जनता के साथ धोखा है।
सवाल सीधे हैं, तीखे हैं
क्या सांसद सिर्फ चुनाव जीतने के लिए होते हैं?
क्या विकास निधि सिर्फ कागजों में सजाने के लिए है?
क्या बिहार की जनता सवाल पूछने लायक नहीं?
सांसदों की सैलरी — हमारे टैक्स से
संसद का खर्च — हमारे टैक्स से
सत्ता की ताकत — हमारे वोट से
तो फिर हिसाब कौन मांगेगा?
अमेरिका? यूरोप? या चाँद से कोई आएगा?
बिहार को अब
भाषण नहीं, हिसाब चाहिए
वादे नहीं, काम चाहिए
नेतागिरी नहीं, जवाबदेही चाहिए
अगर आज सवाल नहीं पूछा गया,
तो कल ये चुप्पी हमारी सबसे बड़ी गलती बन जाएगी।
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हर सांसद तक पहुँचाइए।
ताकि उन्हें पता चले —
बिहार अब सिर्फ वोट नहीं देगा, हिसाब भी मांगेगा।

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