"जनता का पैसा, सांसद का ‘निजी अधिकार’?” — 18वीं लोकसभा में लोकतंत्र से बड़ा सवाल

"जनता का पैसा, सांसद का ‘निजी अधिकार’?” — 18वीं लोकसभा में लोकतंत्र से बड़ा सवाल

जनक्रांति कार्यालय से अधिवक्ता मोहम्मद बैरम रकी की रिपोर्ट
जब सवाल उठा तो जवाब आया—
“एमपी फंड खर्च करना मेरा निजी अधिकार है,मैं विपक्ष के दबाव में कोई फैसला नहीं लूंगी।” # शाम्भवी चौधरी सांसद 

इंडिया न्यूज़ डेस्क, (जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन कार्यालय न्यूज़ डेस्क,
खगड़िया,बिहार 13 जनवरी, 2026)।
लोकसभा चुनाव 2024 के बाद बनी 18वीं लोकसभा अब दो साल पूरे करने जा रही है।
दो साल—यानी
सैकड़ों बैठकें,
हजारों भाषण,
करोड़ों रुपये वेतन-भत्ते,
लेकिन बिहार के 6 सांसदों ने सांसद निधि (MPLADS) से एक रुपया भी खर्च नहीं किया।
यह आंकड़ा नहीं,
लोकतंत्र का एक्स-रे रिपोर्ट है।
इन सांसदों में शामिल हैं
समस्तीपुर से एलजेपी (रामविलास) की सांसद और देश की सबसे युवा सांसद — शांभवी चौधरी।
जब सवाल उठा तो जवाब आया—
“एमपी फंड खर्च करना मेरा निजी अधिकार है,
मैं विपक्ष के दबाव में कोई फैसला नहीं लूंगी।”
यहीं से सवाल शुरू होता है।
🔍 सवाल नंबर 1:
क्या सांसद निधि निजी संपत्ति है
या जनता के विकास का औज़ार?..
सांसद निधि किसी सांसद की जेब से नहीं आती,
यह उसी जनता का पैसा है
जो टूटी सड़कों पर गिरती है,
बिना अस्पताल के मरती है,
और बिना स्कूल के भविष्य खो देती है।
अगर दो साल में एक नाली नहीं बनी,
एक स्कूल नहीं सुधरा,
एक अस्पताल को उपकरण नहीं मिला,
तो यह निर्णय नहीं—लापरवाही कहलाएगी।
🔍 सवाल नंबर 2:
“विपक्ष का दबाव” कहकर
क्या जवाबदेही से बचा जा सकता है?
लोकतंत्र में
सवाल पूछना दबाव नहीं,
संविधान का अधिकार है।
जो सांसद सवाल से डर जाए,
वह विकास कैसे करेगा?
🔍 सबसे बड़ा सवाल:
देश की सबसे युवा सांसद से
देश को सबसे बड़ी उम्मीद थी।
युवाओं से कहा जाता है—
“तुम बदलाव हो।”
लेकिन अगर
युवा नेतृत्व भी
“मेरा अधिकार” कहकर
जनता से दूरी बना ले,
तो बदलाव कहाँ से आएगा?
यह लेख किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं,
यह एक सोच के खिलाफ आरोपपत्र है।
✊ लोकतंत्र में याद रखने वाली बात
सांसद निधि खर्च करना
एहसान नहीं,
कर्तव्य है।
सवाल पूछना विरोध नहीं,
जाग्रत जनता की पहचान है।
अगर सांसद जवाबदेह नहीं होंगे,
तो लोकतंत्र पोस्टर बनकर रह जाएगा—
असली ज़िंदगी में नहीं दिखेगा।
अंतिम पंक्ति (वायरल पंचलाइन):
“जनता ने सांसद चुना था,
मालिक नहीं।”
समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक/सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित।

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