"जब सवाल पूछना गुनाह बन जाए — सत्ता के आगे घुटने टेकता मीडिया और दम तोड़ता लोकतंत्र”

"जब सवाल पूछना गुनाह बन जाए — सत्ता के आगे घुटने टेकता मीडिया और दम तोड़ता लोकतंत्र”

जनक्रांति न्यूज डेस्क मो. बैरम रकी की
 रिपोर्ट 
जनता की आवाज़ को दबाने में मीडिया सबसे आगे खड़ा है। लोकतंत्र में मीडिया का काम है,सत्ता पर निगरानी रखना,
लेकिन आज मीडिया सत्ता की ढाल बन चुका है।
यह कैसा लोकतंत्र है,जहां सवाल पूछना देशद्रोह,और सत्ता की चापलूसी करना राष्ट्रभक्ति बन गया है.?
आज मीडिया अदालत नहीं, दलाल बन चुका है।

न्यूज डेस्क, इंडिया (जनक्रांति हिन्दी न्यूज बुलेटिन कार्यालय 5 जनवरी, 2026)। कभी जिस मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता था, आज वही मीडिया सत्ता का पांचवां पहिया बन चुका है।
आज का सबसे कड़वा सच यह है कि सत्ता से सवाल करने वाला कोई भी बड़ा मीडिया संगठन दिखाई नहीं देता।
टीआरपी की होड़, सरकारी विज्ञापनों की मलाई और सत्ता के गलियारों तक पहुंच — इन तीनों ने मिलकर मीडिया की रीढ़ तोड़ दी है।
आज न्यूज़ रूम में खबर नहीं, एजेंडा तय होता है।
आज पत्रकार नहीं, प्रवक्ता बोलते हैं।
कल तक जो चैनल सरकार से पूछते थे। 
महंगाई क्यों बढ़ रही है.?
बेरोज़गारी क्यों रिकॉर्ड तोड़ रही है.?
किसान आत्महत्या क्यों कर रहे हैं.?
आज वही चैनल पूछते हैं —
“सरकार ने इतना सब कुछ कर दिया, फिर भी लोग सवाल क्यों कर रहे हैं.?”
यह कैसा लोकतंत्र है,
जहां सवाल पूछना देशद्रोह,
और सत्ता की चापलूसी करना राष्ट्रभक्ति बन गया है.?
आज मीडिया अदालत नहीं, दलाल बन चुका है।
सच दिखाने की जगह सच छुपाने का ठेका ले चुका है।
जो पत्रकार सत्ता से सवाल करता है, उसे राष्ट्रविरोधी कहा जाता है,
एजेंट बताया जाता है,
या फिर नौकरी से बाहर कर दिया जाता है।
बिहार हो या दिल्ली,
गांव हो या संसद —
जनता की आवाज़ को दबाने में मीडिया सबसे आगे खड़ा है।
लोकतंत्र में मीडिया का काम है
सत्ता पर निगरानी रखना,
लेकिन आज मीडिया सत्ता की ढाल बन चुका है।
अगर मीडिया ही बिक जाए,
अगर सवाल ही बंद हो जाएं,
तो फिर चुनाव, संसद और संविधान
सिर्फ दिखावा बनकर रह जाते हैं।
यह लेख किसी पार्टी के खिलाफ नहीं है,
यह पूरे सिस्टम के खिलाफ एक चेतावनी है।
अगर आज भी मीडिया ने आंखें नहीं खोलीं,
तो कल इतिहास लिखेगा —
कि लोकतंत्र मरा नहीं था,
उसे चुपचाप मार दिया गया था।
अब फैसला जनता को करना है —
क्या वह सवाल पूछने वाले मीडिया के साथ खड़ी होगी,
या चुप रहने वाले गुलाम मीडिया के साथ.?
समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक/सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा अधिवक्ता मोहम्मद बैरम रकी की. रिपोर्ट प्रकाशित व प्रसारित।

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