"ऊपर भगवान — नीचे संविधान: नफ़रत के अंधेरे में मोहब्बत की अंतिम जीत का ऐलान”

"ऊपर भगवान — नीचे संविधान: नफ़रत के अंधेरे में मोहब्बत की अंतिम जीत का ऐलान”

यह लेख पढ़ना नहीं — महसूस करना है)

जनक्रांति कार्यालय से अधिवक्ता मोहम्मद बैरम रकी 

इंडिया न्यूज डेस्क, जनक्रांति हिन्दी न्यूज बुलेटिन 20 जनवरी, 2026
ऊपर भगवान – नीचे संविधान
लड़ते रहो – बढ़ते रहो
एक दिन अंधेरा जरूर मिटेगा
यह कोई नारा नहीं है।
यह भारत की आत्मा का उद्घोष है।
यह उस देश की पुकार है जहाँ
मंदिर की घंटी, मस्जिद की अज़ान,
गुरुद्वारे की अरदास और चर्च की प्रार्थना, 
सब एक साथ गूंजते हैं।
और उनके ठीक नीचे
एक किताब रखी है,
भारत का संविधान।
भगवान आस्था हैं,
 संविधान अधिकार है।
एक आत्मा को संभालता है,
दूसरा इंसान को बचाता है।
आज भारत किस मोड़ पर खड़ा है?
आज देश के सामने सबसे बड़ा संकट
भूख नहीं, बेरोज़गारी नहीं, महंगाई नहीं, 
बल्कि नफ़रत है।
नफ़रत जो धर्म के नाम पर बोली जाती है, जाति के नाम पर बेची जाती है,
और राजनीति के नाम पर परोसी जाती है।
लेकिन इतिहास गवाह है —
नफ़रत कभी सभ्यता नहीं बना सकी।
सभ्यताएँ बनी हैं।
सिर्फ़ और सिर्फ़ मोहब्बत, न्याय और समानता से।
संविधान: भारत का आधुनिक धर्म
भारत का संविधान
किसी एक धर्म का नहीं,
हर इंसान का ग्रंथ है।
यह कहता है — सब बराबर हैं
यह कहता है — डरने की ज़रूरत नहीं
यह कहता है — सवाल करना गुनाह नहीं
जो संविधान से डरता है,
असल में वह न्याय से डरता है।
लड़ते रहो – बढ़ते रहो
लड़ाई तलवार से नहीं,
लड़ाई विचार से है।
लड़ाई पत्थर से नहीं,
लड़ाई सच से है।
जो युवा सवाल पूछता है,
वही राष्ट्र बनाता है।
जो नागरिक चुप रहता है,
वह इतिहास का बोझ बन जाता है।
अंधेरा स्थायी नहीं होता
इतिहास की हर रात के बाद
सवेरा आया है।
हिटलर हार गया — इंसानियत जीत गई.
रंगभेद टूटा — समानता जीती
तानाशाह गिरे — लोकतंत्र खड़ा हुआ
यह नियम है।
और भारत भी इस नियम से अलग नहीं।
नफ़रत वालों की हार तय है
क्योंकि नफ़रत डर से पैदा होती है
और मोहब्बत साहस से।
जो मोहब्बत करता है
वह अकेला भी हो, तो भारी पड़ता है।
मोहब्बत वालों की जीत निश्चित है
क्योंकि उनके साथ
भगवान भी हैं
और संविधान भी।
ऊपर भगवान —
जो इंसान को इंसान बनाते हैं।
नीचे संविधान —
जो इंसान को अधिकार दिलाते हैं।
यह लेख चेतावनी नहीं — घोषणा है
नफ़रत थक जाएगी
झूठ बेनकाब होगा
संविधान फिर से सिंहासन पर बैठेगा
और जब इतिहास लिखा जाएगा,
तो लिखा जाएगा —
“भारत झुका नहीं था,
भारत लड़ा था।
और भारत जीता था।”
अंतिम पंक्ति (वायरल मंत्र)
“नफ़रत शोर करती है,
मोहब्बत इतिहास बनाती है।”
समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक/सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रधान कार्यालय से प्रकाशित व प्रसारित।

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