काव्य संग्रह :--. 🫱बिखड़ती संस्कृति🫲भ्र्ष्टाचार मिट पायेगा कभी..?- गाँधी के इस देश में --।
काव्य संग्रह :--
. 🫱बिखड़ती संस्कृति🫲
भ्र्ष्टाचार मिट पायेगा कभी..?
- गाँधी के इस देश में --।
जनक्रांति काव्य डेस्क।
भ्र्ष्टाचार मिट पायेगा कभी..?
- गाँधी के इस देश में --
संकीर्णता की है खाई क्यों..?
नज़र आता हर वेश में ---
अहंकार का सैलाब क्यों..?
सूरत पर हर शख्स के --
निराकृत निराश्रय हर कोई -
दुरत्यय दुरंगी निराशा के
समग्र निरभीलाष समाज कहां -
हो पाया क्या..?
बुद्ध के उपदेश से जन -
प्रवाद रुक पाया अबतक -
क्या..?
महाबीर के उपदेश से
बरबस हिंसा और लूट है यहाँ -
सत्य - व - शांति बतलाया करते
अग्रगन्य रहे हम विश्व में -
अब भी क्यों..?
चिल्लाया करते पुरखों ने
है जो ध्वज फहराया -
क्या..?
अब वह सिमट जायेगी?
पाश्चात्य संस्कृति घुलमिल सब -
या अपनी विखड़ती संस्कृति
मिट जायेगी..?
समस्तीपुर जनक्रांति प्रकाशन कार्यालय से प्रकाशक/सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित।

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