एक शख्ससियस ऐसा भी जीवन परिचय : दिलीप कुमार दीपक

        एक शख्ससियस ऐसा भी     
 जीवन परिचय : दिलीप कुमार दीपक 

दुनिया में ऐसा भी होता है जो व्यक्तित्व के महान धनी ही नहीं बल्कि इतने स्वाभिमानी होते हैँ कि अपने मन की बात को भी किसी के आगे बोलने की बताने की वे जरूरत ही नहीं समझते हैँ 
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.      आलेख : 🖋️प्रमोद कुमार सिन्हा

इंडिया न्यूज़ डेस्क, (जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन कार्यालय न्यूज़ डेस्क 16 जनवरी, 2026)। हाँ दुनिया में ऐसा भी होता है जो व्यक्तित्व के महान धनी ही नहीं बल्कि इतने स्वाभिमानी होते हैँ कि अपने मन की बात को भी किसी के आगे बोलने की बताने की वे जरूरत ही नहीं समझते हैँ इतने स्वभिमानी की नजदीकी लोगों के समक्ष कहने में संकोच ही नहीं करते बल्कि अनवरत उस राह पर बिना सोचे समझे जो उचित कर्म होता है वे करते चले जाते हैँ जिसे भगवान श्री कृष्ण ने अपनी गीता में अर्जुन के प्रति कहा है " कर्मन्ये वाधिका रस्ते मा फ्लेशू कदाचन   " हे अर्जुन तेरा अधिकार सिर्फ और सिर्फ कर्म करने में ही है फल में नहीं, फल ईश्वर के हाथों में है 
फल की चिंता किये बिना जो निरन्तर अपने कर्तव्य कर्म पर   आरुढ हो जाता है उसका फल की चिंता भगवान के हाथों में होता है तो आइये आज हम उस महान शख्ससियस का आपके समक्ष परिचय कराते हैँ वाह!वाह!वाह! पृथ्वी ऐसे ही शख्ससियस के यों ही नहीं चलती बल्कि उसको चलाने में पुरी की पुरी प्रकृति ही तैयार खड़ा होती है।
 महान व्यक्तित्व के धनी परम स्वभिमानी किसी के आगे हाथ पसारने की या झुकने को वे तैयार नहीं होते हैँ जिन्होंने "आपातकाल " के दरम्यान मीसा के अंतर्गत एक - दो नहीं बल्कि ५ - ६ ( पाँच - छौ ) बार जेल की यातनायें सही हैँ फिर भी ये * अंधी और गूंगी * सरकार द्वारा भी आज तक इन्हें जे पी सेनानी से सम्मानित नहीं किया गया है जो धिक्कार पूर्वक है , बिहार सरकार द्वारा इन्हें सम्मान नहीं दिया जाना कितना खेदजनक और दुखदायी ये किसी शब्द द्वारा बता पाना या कहना मुमकिन नहीं है जो साफ इस ऒर इंगित करता है की सरकार में मंत्री से लेकर संत्री तक कितने असंवेदनशील हैँ यहाँ तक ही नहीं बल्कि ये इशारा करती है कि सरकार की स्थिति इतनी आक्रमण्य क्या हो सकती है.? बल्कि शर्मनाक की स्थिति के पड़े ही कहा जा सकता है।
मैं सरकारी सेवा से सेवा निवृत होकर प्रदेश महासचिव, जे पी सेनानी मंच की हैसियत से प्रथम बार पूर्णिया कोर्ट में श्री प्रफफुल रंजन वर्मा जिलाध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी, पूर्णिया से मुलाक़ात कर पूर्णिया के जे पी सेनानियों से मुलाक़ात की ईच्छा जतायी तो उन्होंनें तत्कालीन पूर्णिया जिला मिडिया प्रभारी श्री सुमित प्रकाश को आदेश देते हुए कहा की इन्हें श्री दिलीप कुमार दीपक से मुलाक़ात करा दें हाँ उस शख्स का नाम दिलीप कुमार साह है जो दिलीप कुमार दीपक के नाम से जाने जाते हैँ 
 विदित हो कि विद्यार्थी जीवन में मैं भी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद,
नगर इकाई पटना का बड़ा ही कर्मठ और सक्रिय सदस्य रहा हूँ और इस इकाई में मैं ही अकेला एक शख्स रहा था जो सबसे कम उम्र होने के बाद भी शायद ही कोई रविवार ( जिस दिन À B V P का बैठक निर्धारित होता था )मुझसे छुटा हो , उस समय, नगर इकाई पटना के प्रमुख सदस्यों में स्व सुशील मोदी , रविशंकर प्रसाद, अश्वनी चौबे, नन्द किशोर यादव, बिक्रम कुंवर, रामाकांत पाण्डेय, सहित लगभग पचीस से तीस सदस्य हुआ करते थे जिसमें सबसे कम उमर मैं प्रमोद कुमार सिन्हा ही रहे,

 ज्ञात हो की सभी सदस्य पटना यूनिवर्सिटी से सम्बन्धित थे हम तीन श्री बिक्रम कुंवर, नन्द किशोर यादव और स्वं मैं अर्थात प्रमोद कुमार सिन्हा मगध यूनिवर्सिटी अंतर्गत एक ही कॉलेज, कॉलेज ऑफ़ कामर्स पटना के छात्र थे.। 
  हमारे कॉलेज ऑफ़ कामर्स में चार छात्र नेता थे, श्री बिक्रम कुंवर, श्री नन्द किशोर यादव मैं सबसे कम उमर ही नहीं बल्कि जूनियर था. तीनों अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से तथा श्री स्व ब्रह्मदेव पटेल स्टूडेंट फेडरेसन से थे यह भी विदित हो की उपरोक्त तीनों बी ए के अंतिम वर्ष के क्षात्र थे और एक अकेला मैं इंटर का छात्र, यह भी विदित हो कि श्री बिक्रम कुंवर ही वह शख्स थे जो मुझे राजनीती के पाठ ही नहीं पढ़ाया करते थे बल्कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद नगर इकाई पटना से जोड़ने में उनकी अहम और महत्वपूर्ण स्थान रहा , चूँकि मैं  N C C में L C P L था और वे हमारे अंडर ऑफिसर , राजनीती में A B C D सिखाने में उनकी मेरे प्रति ममत्व और लगन को लेखनी में व्यक्त करने में अपने आप में असमर्थ हूँ, श्री नन्द किशोर जी पटना सिटी से और मैं पश्चिम दरवाजा पटना से मीटिंग में भाग लेने प्रति रविवार आते थे चूँकि
 मेरे परम पुज्य जीजा जी उस समय नाम श्री के के सिन्हा, पटना सिटी, स्टेट बैंक ऑफ़ इण्डिया में ब्रांच मैनेजर थे और मैं उन्हीं पर आश्रित था, बाद में प्रोन्नति पाते -पाते वरिय डी जी एम हुए और पलामू क्षेत्रीय बैंक के चेयरमैन से सेवा निवृत हुए और अब वे इस दुनिया से अलविदा हो चुके हैँ मात्र दो साल पीछे , तो लीजिये ये भूमिका बताने के लिये इसलिए बाध्य होना पड़ा कि सरकारी सेवा से सेवा निवृत पश्चात मैं जे पी सेनानी प्रदेश अध्यक्ष बिहार श्री देवेंद्र प्रसाद द्वारा बिहार जे पी सेनानी का प्रदेश महासचिव मनोनीत किया गया और बैठक कर उन्होंने इसकी सम्पूष्टी भी प्राप्त कर ली है जो आज तक लगातार जारी है।
 ज्ञात हो कि बेगूसराय के जे पी सेनानीयों से मेरा कोई कोई जान - पहचान नहीं था, समाचार पत्र के माध्यम से सूचित किया गया था की बिहार के समस्त जे पी सेनानी को जे पी गोलम्बर, गाँधी मैदान में एकत्रित होकर आंदोलन की अपील ही नहीं आना जरूरी था उसी जाने के क्रम में ट्रैन के एक ही बोगी में एक ही सीट के आमने सामने वार्ता क्रम में जानकारी हुई की वे लोग भी एक जे पी सेनानी हैँ और उनके बगल में बैठे सीताराम शास्त्री आर्य भी थे वे भी जे पी सेनानी हैँ संयोग ऐसा था हम सभी एक ही रेल गाड़ी और एक ही डिब्बे और एक ही सीट के ठीक आमने सामने बैठे हुए थे 
  लीजिये मैं कहानी को कहाँ से लेकर कहाँ तक चला आया अब पुनः मैं उपरोक्त बिंदु पर आता हूँ श्री सुमित प्रकाश भारतीय जनता पार्टी जिला मिडिया प्रभारी द्वारा मेरी मुलाक़ात पूर्णिया कोर्ट कंपाउंड अंतर्गत उनके चेम्बर में मुलाक़ात हुई जो श्री दिलीप कुमार दीपक वरिय अधिवक्ता हैँ वहाँ चेम्बर में फ्रेम में लगा शायद तीन फ्रेम में माननीय मुख्य मंत्री नीतीश जी शाल ओढ़ाकर उन्हें सम्मानित किये हुए हैँ श्री सुमित प्रकाश जी नें मेरा परिचय देकर उनसे अर्थात श्री दिलीप कुमार दीपक जी से मुलाक़ात करबाया जहाँ उन्होंने बड़ा ही खुशनुमा माहौल में मुझसे बातें की पूर्णिया अंतर्गत समस्त जे पी सेनानीयों का पता बताया और मैंने सबों से बारी - बारी से मिलकर भविष्य की जानकारी से उन सबों को अबगत कराया।
मेरी लेखनी विषय विन्दु से भटक रही है अतएब मैं पुनः उस विन्दु पर आता हूँ जब मैं भारतीय जनता पार्टी जिला प्रवक्ता श्री दिलीप कुमार दीपक जी से पूछा की आप जे पी सेनानी के प्रमाण से विभुषित हैँ तो उन्होंनें बड़े ही रूहाँसे शब्दों में उस विज्ञप्ति का हबाला दिया की प्रमोद बाबू वित्त बिभाग बिहार सरकार के विज्ञप्ति अनुसार मात्र मुझे आबेदन देना था जो बिलकुल सत्य है मैंने आवेदन दे दिया लेकिन मुझे आज तक जे पी सेनानी का प्रमाण नहीं मिला है मैंने पूछा सर जी आप माननीय उप मुख्य मंत्री सह वित्त मंत्री माननीय सुशील मोदी जी से निकटतम होते हुए भी उनसे बात क्यों नहीं की माननीय मोदीजी प्रायः पूर्णिया जाया करते थे इस पर उन्होंने कहा मैं स्वभिमानी हूँ किसी के आगे गुहार लगाना और झुकना मैंने अपने जीवन में सीखा ही नहीं है मैं चुप हो गया मैंने अपना साक्षात्कार हेतु उनसे अनुरोध किया पत्र दिखाया की हमारी ये मांगें हैं, तब उन्होंने तत्काल channel पूर्णिया के नम्बर tahsin ८२१०२६९७५५से बात कर बुलाया
 और मैंने अपनी बात उस चेंनेल से की और पुनः वापस आ गया।
 लेकिन वापस बेगूसराय आने के उपरांत भी मेरी टेलीफॉनिक टॉक बराबर होती रही और बराबर मैं जानकारी हासिल करता रहा की उन्हें यह सम्मान आज तक मिला है या नहीं.?
 इसलिये तो काका कालेश्वर कहे हैँ की ऊपर ऊपर ही पा जाते हैँ जो पानेबाले हैँ कहते हैँ ऐसे ही जीते हैँ जो जीने बाले हैँ कितना खेद की बात है माननीय उप मुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री स्वo सुशील मोदी जी ने विज्ञापन में ठीक यही बात कही थी की आपको कुछ करना नहीं है सिर्फ आवेदन देना बाकी काम सरकार का है लेकिन ये बात उनका हबा हबाई ही था ही नहीं बल्कि अब भी वही हाल है स्वं मुझे इस सम्मान को पाने हेतु एक लम्बी अंतहीन श्रृंखला से गुज़रना पड़ा है व्यक्त नहीं किया जा सकता है मैं बारह साथियों सहित पीरबहोर थाना में अरेस्ट हुआ था एक ही धारा और एक साथ लेकिन खेद है की बारह में से पाँच को सम्मान दिया गया और सात को छोड़ दिया गया जिसमें मैं भी था कितना हास्यसपद बात है सभी के सभी एक साथ ही पकड़ाए समान धारा समान केस अंतर्गत तो आखिर कौन से कारण और परिस्थिति रहा जो सात को छोड़ दिया गया क्या यह सरकार की अकर्मनायता नहीं है? क्या ऐसे पदाधिकारी को दण्डित आज तक किया गया ? विज्ञापन का कथन कुछ और करनी कुछ, बाह रे बाह बिहार सरकार के मंत्री कर्मचारी पदाधिकारी सभी के सभी इसमें लिप्त हैँ स्वं मुझे भी सालों तक लड़ाई लड़नी पड़ी है सरकार के पदाधिकारी झूठ बोलते हैँ या मंत्री कह पाना कठिन है लेकिन यदि मंत्री सही रहे तो किसी भी पदाधिकारी को गलत पर गलत करने की क्या हिम्मत होगी ? बोलना नहीं समझने की बात है सच सभी जानते हैँ दाल में काला कहाँ है एक बहुत ही लम्बी लड़ाई के बाद मुझे सम्मान की प्राप्ति हुई और सबसे दुःखद पहलू है की हमारे एक साथी जिनका नाम उमेश प्रसाद था दाँत रगड़ते रगड़ते इस दुनिया से विदा हो गये  आखिर दोषी कौन है ? सरकार सिस्टम या कर्मचारी ? सोचनीय बात है दोष तो सरकार पर ही जायेगा आखिर सरकार सही हो तो सिस्टम ठीक तो कर्मचारी ठीक
अंततः सब कुछ होने के बाद भी उमेश प्रसाद को सम्मान नहीं मिला ठीक इस प्रकार जैसे स्वभिमान से युक्त भारतीय जनता पार्टी के ब्रिशिष्ठतम जिला प्रवक्ता को सम्मान नहीं मिलना किस चीज का द्योतक है ? क्या सरकार का जबाब है इसके पास तो लीजिये उनके अनुभव और इस अंतहीन सूचनाकी ऒर ध्यान आकृष्ट करते हुए माननीय उप मुख्य मंत्री सम्राट चौधरी, वित्त मंत्रीमाननीय बिजेंद्र यादव जी और माननीय मुख्य मंत्री नीतीश जी से व्यक्ति गत तौर पर अनुरोध करते हैँ की दोषी कर्मचारी पदाधिकारी को चिन्हित कर उन्हें दंडित किया जाये और बर्षों वर्षों से जिला प्रबक्ता श्री दिलीप कुमार दीपक जी के आबेदन खोजकर कर्मचारी पदाधिकारी को ना केवल दंडित किया जाये बल्कि उनकी वर्खास्तगी की जाये और यदि वे सेवा मुक्त हो चुके हैँ तो उनकी पेंशन पर रोक लगाई जाये तो लीजिये पूर्णिया जिला प्रबक्ता दिलीप कुमार दीपक की बायोडाटा निम्न है।
🫲दिलीप कुमार दीपक का जीवन परिचय
 नाम दिलीप कुमार साह
 उर्फ    दिलीप कुमार दीपक
 पिता का नाम स्वर्गीय राम रतन साह
 भट्ठा बाजार वार्ड नंबर 25 जिला पूर्णिया
 जाति हवाई अत्यंत पिछड़ा वर्ग जन्मतिथि 23 अगस्त 1949
 शैक्षणिक योग्यता एम ए  एल एल बी
 वकालत का अनुभव 48 वर्ष
 नगर जनसंघ मंत्री पूर्णिया 1965
 नगर जंक्शन उपाध्यक्ष 1967
 अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद महासचिव 1970 पूर्णिया कॉलेज
 हिंदी साहित्य परिषद पूर्णिया कॉलेज सचिब
 विद्यार्थी परिषद भागलपुर  विश्वविद्यालय सचिब 1971 से 1974
 संयोजक छात्र संघर्ष समिति पूर्णिया 1974 से 1977
 मिशा  बंदी 15 अगस्त 1974
 जेल यात्रा 5    6 बार
 जिला अध्यक्ष जनता युवा मोर्चा पूर्णिया 1977 1979
 जिला महासचिव भारतीय जनता पार्टी 1984 से 1986
 जिला अध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी पूर्णिया 1987 से 1989
 जिला भाजपा प्रवक्ता लगभग 33 वर्षों से
 सदस्य पुलिस परिवार परामर्श केंद्र 2006 से लेकर 2024 तक सोनपुर  मेला अवार्ड
पांच बार बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एवं डीजीपी प्राप्त
बिहार प्रदेश कार्य समिति
 सदस्य
 अधिवक्ता मंच  1994 से 1996
 भाजपा किसान मोर्चा कानूनी सलाहकार
 1967 ई से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ साथ संपर्क प्रथम वर्ष एवं द्वितीय वर्ष संघ शिक्षा वर्ग ओटीसी 1967 एवं 1971
 सामाजिक संस्था सिंधु विकास मंच पूर्व संरक्ष कानूनी सलाहकार सुलेमान क्लब
कानूनी सलाहकार सीमांचल टाइम्स
 वैश्य  वाटिका मासिक पत्रिका कानूनी सलाहकार,सवेरा गैर सरकारी संगठन
 सदस्य शांति समिति पूर्णिया जिला
 सचिब रेनू सेवा समिति
 सचिन सुखदेव कुमार स्मृति संस्थान
l विश्व मानव कल्याण भारती प्रव प् प्रवक्ता
अखिल भारतीय मध्यादेशीय वैश्य महासम्मेलन प्रवक्ता दिलीप कुमार दीपक।
समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रमोद कुमार सिन्हा का आलेख प्रकाशक/संपादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित।
 

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