चरित्र का बीज, भविष्य की फसल “गलत चयन से सिर्फ़ रिश्ता नहीं, नस्लें बर्बाद होती हैं”

 चरित्र का बीज, भविष्य की फसल 
“गलत चयन से सिर्फ़ रिश्ता नहीं, नस्लें बर्बाद होती हैं”
जनक्रांति कार्यालय से अधिवक्ता मोहम्मद बैरम रकी की रिपोर्ट 

इंडिया न्यूज़ डेस्क, (जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन न्यूज़ डेस्क, 15 जनवरी, 2026 खगड़िया,बिहार)। चरित्र का बीज, भविष्य की फसल 
“गलत चयन से सिर्फ़ रिश्ता नहीं, नस्लें बर्बाद होती हैं”।
समाज की सबसे बड़ी भूल
यह मान लेना है कि
शादी सिर्फ़ दो लोगों का निजी फैसला है।
नहीं—
यह भविष्य की पीढ़ियों का समझौता होता है।
जिस मिट्टी में बीज बोया जाता है,
उसी से फसल उगती है।
और जिस चरित्र के साथ
जीवन की नींव रखी जाती है,
उसी से औलाद का संस्कार बनता है।
अगर सोच गंदी हो,
अगर आदतें भ्रष्ट हों,
अगर नैतिकता खोखली हो—
तो सिर्फ़ घर नहीं बिगड़ता,
समाज बीमार होता है।
शादी = सामाजिक अनुबंध
शादी कोई फ़िल्मी दृश्य नहीं,
यह एक संवैधानिक जिम्मेदारी है—
जहाँ दो लोग
एक नई पीढ़ी के नैतिक निर्माता बनते हैं।
जब चयन चरित्र पर नहीं,
सिर्फ़ लालच, मजबूरी या दिखावे पर होता है—
तो उसका परिणाम
बच्चों के व्यवहार,
उनकी सोच
और उनके कर्मों में दिखाई देता है।
अपराधी समाज यूँ ही नहीं बनता
बलात्कार, हिंसा, भ्रष्टाचार, नशा—
ये अचानक पैदा नहीं होते।
इनकी जड़ें
घर के भीतर बोई जाती हैं।
जहाँ पिता उदाहरण नहीं होता,
जहाँ माँ असुरक्षित होती है,
जहाँ रिश्ते ज़हर से भरे होते हैं—
वहाँ पैदा होने वाली पीढ़ी
कैसे अमृत बन सकती है.?
यह स्त्री या पुरुष पर हमला नहीं—
यह चयन की चेतावनी है।
समाज को समझना होगा—
चरित्रहीनता निजी मामला नहीं,
सार्वजनिक आपदा है।
अगर हम आज
गलत लोगों को
जीवनसाथी चुनते रहेंगे,
तो कल
अदालतें भरती रहेंगी,
जेलें भरती रहेंगी,
और इंसानियत खाली होती जाएगी।
आख़िरी सत्य
फसल को कोसने से पहले
बीज और ज़मीन देखनी पड़ती है।
अगर भविष्य साफ़ चाहिए,
तो आज का चयन साफ़ होना चाहिए।
क्योंकि
चरित्र से ही पीढ़ी बनती है—
और पीढ़ी से ही राष्ट्र।
समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक /सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित।

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