जंगल का संविधान: शेर—जो राजा इसलिए नहीं, क्योंकि वह डराता है, बल्कि इसलिए कि वह डरता नहीं
जंगल का संविधान: शेर—जो राजा इसलिए नहीं, क्योंकि वह डराता है, बल्कि इसलिए कि वह डरता नहीं
जनक्रांति कार्यालय रिपोर्ट
एक सोच है, एक तेवर है, एक ऐलान है। जब जंगल सोता है, तब भी शेर जागता है। जब सब भागते हैं, तब शेर खड़ा रहता है। वह इसलिए राजा नहीं कि उसके पास ताक़त है,बल्कि इसलिए कि वह अपनी ताक़त को काबू में रखता है।
इंडिया न्यूज़ डेस्क, (जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन न्यूज़ डेस्क,15 जनवरी, 2026 बिहार )। जंगल का संविधान: शेर—जो राजा इसलिए नहीं, क्योंकि वह डराता है, बल्कि इसलिए कि वह डरता नहीं शेर…सिर्फ एक जानवर नहीं,
एक सोच है, एक तेवर है, एक ऐलान है।
जब जंगल सोता है, तब भी शेर जागता है।
जब सब भागते हैं, तब शेर खड़ा रहता है।
वह इसलिए राजा नहीं कि उसके पास ताक़त है,
बल्कि इसलिए कि वह अपनी ताक़त को काबू में रखता है।
शेर को देख कर ही समझ आता है—
खामोशी भी सबसे बड़ा शोर हो सकती है।
शेर झुंड में रहता ज़रूर है,
लेकिन लड़ाई अकेले लड़ता है।
वह पीठ पीछे वार नहीं करता,
वह सामने से आता है—
सीधा, साफ़ और साफ़ नीयत के साथ।
आज की दुनिया में
जहाँ हर कोई चालाकी, साज़िश और छल में जी रहा है,
वहाँ शेर हमें सिखाता है—
“सीधा रहो, मज़बूत रहो, और सच के साथ रहो।”
शेर और इंसान: एक आईना
अगर इंसान शेर से कुछ सीख ले—
तो डर के आगे घुटने न टेके
तो झूठी भीड़ का हिस्सा न बने
तो कमज़ोर पर हमला न करे
और ताक़त में भी इंसानियत न भूले
तो शायद समाज को
ना नकली राजा चाहिए,
ना नकली बहादुर।
⚖️ शेर का न्याय
शेर भूखा होता है,
लेकिन ज़रूरत से ज़्यादा नहीं मारता।
वह बच्चों को नहीं मारता,
वह कमजोर को यूँ ही नहीं कुचलता।
काश!
आख़िरी दहाड़
आज जब हर गली में
काग़ज़ी शेर घूम रहे हैं,
तब असली शेर की पहचान ज़रूरी है।
शेर वो नहीं जो सोशल मीडिया पर दहाड़े,
शेर वो है जो ज़रूरत पड़ने पर
सच के लिए अकेला खड़ा हो जाए।
शेर मेरा पसंदीदा जानवर है,
क्योंकि वह मुझे याद दिलाता है—
राजा बनने के लिए ताज नहीं,
हिम्मत चाहिए।

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