"पसंद बनाना आसान है, लेकिन किसी की ज़िंदगी की ज़रूरत बन जाना — यही इंसान होने की सबसे बड़ी जीत है!”
"पसंद बनाना आसान है, लेकिन किसी की ज़िंदगी की ज़रूरत बन जाना — यही इंसान होने की सबसे बड़ी जीत है!”
जनक्रांति कार्यालय से अधिवक्ता मोहम्मद बैरम रकी की रिपोर्ट
आज की दुनिया चुनने में बहुत तेज़ है,
लेकिन निभाने में बेहद कमजोर।
हम कहते हैं — “मुझे यह पसंद है”,
आज दुनिया को और बड़ी इमारतों की नहीं, बड़े दिलों की ज़रूरत है। जहाँ इंसान इंसान को सीढ़ी नहीं, साथी समझे।
इंडिया न्यूज़ डेस्क, (जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन कार्यालय न्यूज़ डेस्क, बिहार 17 जनवरी, 2026)। किसी को अपनी पसंद बना लेना कोई बड़ी बात नहीं।
हम रोज़ ऐसा करते हैं —
किसी इंसान को, किसी विचार को, किसी चीज़ को।
लेकिन…
किसी के भरोसे में जगह बना लेना,
किसी के दुख में नाम बन जाना —
यह कोई साधारण बात नहीं,
यह इंसान होने की सबसे ऊँची मंज़िल है।
आज की दुनिया चुनने में बहुत तेज़ है,
लेकिन निभाने में बेहद कमजोर।
हम कहते हैं — “मुझे यह पसंद है”,
पर कभी नहीं पूछते —
“क्या मैं किसी के लिए मायने रखता हूँ?”
यही फर्क है रिश्तों और रिश्तों के दिखावे में। हम सब एक-दूसरे के बिना कुछ भी नहीं हैं। न वकील बिना मुवक्किल के न डॉक्टर बिना मरीज के, न नेता बिना जनता के,और न इंसान बिना इंसान के।फिर भी,हम सबसे पहले अहम चुनते हैं,साथ नहीं।रिश्तों की खूबसूरती एक-दूसरे को इस्तेमाल करने में नहीं,एक-दूसरे का सहारा बनने में है।
जहाँ आप किसी की पसंद नहीं,
बल्कि उसकी ज़रूरत बन जाते हैं।
याद रखिए — जो सिर्फ पसंद होते हैं,
वे समय बदलते ही बदल जाते हैं।
लेकिन जो दिल में बस जाते हैं,
वे हालात बदलने के बाद भी साथ रहते हैं।
आज दुनिया को और बड़ी इमारतों की नहीं, बड़े दिलों की ज़रूरत है। जहाँ इंसान इंसान को सीढ़ी नहीं, साथी समझे।
समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यक्रम से प्रकाशक/सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा मोहम्मद बैरम रकी की रिपोर्ट प्रकाशित व प्रसारित।

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