आज की राजनीति का सबसे खतरनाक रूप कोई पार्टी नहीं, कोई चेहरा नहीं —सबसे खतरनाक रूप है नफ़रत..??

आज की राजनीति का सबसे खतरनाक रूप कोई पार्टी नहीं, कोई चेहरा नहीं —
सबसे खतरनाक रूप है नफ़रत..??

जनक्रांति कार्यालय से अधिवक्ता मोहम्मद बैरम रकी की रिपोर्ट
राजनीति सत्ता का खेल नहीं, सेवा का नाम है,जीत का नशा और नफ़रत का ज़हर जब सत्ता मिलती है, तो दो रास्ते होते हैं..?

इंडिया न्यूज़ डेस्क, (जबक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन कार्यालय 13 जनवरी, 2026 )। नफ़रत की राजनीति नहीं, अब एक हार की ज़रूरत है।
जब जीत इंसान को अंधा और नफ़रत को हथियार बना दे।
आज की राजनीति का सबसे खतरनाक रूप कोई पार्टी नहीं, कोई चेहरा नहीं —
सबसे खतरनाक रूप है नफ़रत।
जब किसी दल की भाषा में प्रेम नहीं, सहिष्णुता नहीं, आत्ममंथन नहीं बचता 
तो समझ लीजिए कि जीत ने उसे अंधा कर दिया है।
आज “आप” की नफ़रत भरी बातों से साफ़ झलकता है कि
आपको अब जीत नहीं, एक हार की ज़रूरत है।
हार — ताकि अहंकार टूटे।
हार — ताकि आईना देखने की हिम्मत लौटे।
हार — ताकि यह याद आए कि राजनीति सत्ता का खेल नहीं, सेवा का नाम है।
जीत का नशा और नफ़रत का ज़हर
जब सत्ता मिलती है, तो दो रास्ते होते हैं 
या तो आप झुकते हैं जनता के सामने,
या जनता को झुकाने लगते हैं।
दुर्भाग्य यह है कि आज का रास्ता दूसरा चुना गया है।
विरोध को गाली, सवाल को देशद्रोह,
और असहमति को नफ़रत से कुचलने की कोशिश की जा रही है।
यह लोकतंत्र नहीं — यह डर का कारोबार है।
प्यार की राजनीति कमज़ोरी नहीं होती
जो लोग प्यार, भाईचारे और इंसानियत को “कमज़ोरी” समझते हैं,
उन्हें इतिहास पढ़ने की ज़रूरत है।
नेल्सन मंडेला, गांधी, मार्टिन लूथर किंग 
इनकी ताक़त नफ़रत नहीं, प्यार था।
आज अगर कोई दल नफ़रत की भाषा बोल रहा है,
तो साफ़ है कि उसके पास काम दिखाने को कुछ नहीं बचा।
एक हार जो देश को बचा सकती है
कभी-कभी हार किसी पार्टी की नहीं होती,
वह देश के लिए ज़रूरी इलाज बन जाती है।
यह हार सिखाती है कि
जनता मालिक है
सत्ता स्थायी नहीं
और नफ़रत की उम्र बहुत छोटी होती है
आज अगर “आप” को हार मिलती है,
तो शायद कल आप इंसानियत की भाषा बोलना सीखें।
आख़िरी सवाल
क्या देश को नफ़रत चाहिए या मोहब्बत.?
क्या राजनीति को ज़हर चाहिए या ज़िम्मेदारी.?
अगर जवाब मोहब्बत है —
तो फिर नफ़रत की राजनीति करने वालों को एक करारी हार की सख़्त ज़रूरत है।
लेखक: Md Bairam Rakee (Adv)
खगड़िया, बिहार।
समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक/सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित।

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