काव्य रचना :- . प्रेम है बेदर्द देखता हूँ ज़ब भी कहीं इधर - उधर , ठहर जाती मेरी नज़र हो तू जिधर ,

काव्य रचना :- 
.                प्रेम है बेदर्द 
देखता हूँ ज़ब भी कहीं इधर - उधर ,     ठहर जाती मेरी नज़र हो तू जिधर ,    
.        🖋️प्रमोद कुमार सिन्हा 
                प्रेम है बेदर्द   
देखता हूँ ज़ब भी कहीं इधर - उधर ,    ठहर जाती मेरी नज़र हो तू जिधर ,       बड़ी मुक़्क़त से दिल जो मैं लगाया,      आहें भरता रहता ह्रदय को जगाया ,      बेदर्द हैँ सभी मिल मुझे जो सताया,     प्रेम है क्या ये जाना ना मैं कभी ,         अश्रु बहते आँखों नें दिखाया मुझे,        सितम सहते - सहते ऑंखें भर गया,  
मस्ती में रही तू चकनाचूर मैं हो गया,    प्यार का है ये कसूर कभी सोचा ना था खाद बीज डाल ऐसा कभी बोया ना था                                        
धीरे - धीरे दिल में मेरे उतरती गयी,      दस्तूर रहा तेरा दुर - दुर तू होती गयी    
बड़ी बेमुर्ववत है बेदर्द है ये जमाना,      कहीं का अफसाना कहीं का फ़साना
तू ही मेरे दिल में है पल -पल समायी    
करवटऐं बदलते हुए आँसू भर आयी   
वाह! ये खुदा है तेरी ये कैसी खुदायी   
तड़पा - तड़पा तुझे तरस ना आयी ,
ह्रदय देख कह रहा है कैसी है तू ,       इधर तड़प रहा ना देखा कभी भी तू   
 प्रेम करना जानता मैं है बड़ा गुनाह,     
तो तेरे से पहले दुर ले लेता पनाह ,       दिल की बात क्या करूँ भी कैसे,         अफसाना - फ़साना तेरे ही हैँ जैसे,     
हे परवरदिगार तूने रहम भुला दिया,   दीपक -  बाती बन मुझे जला दिया,     वाह!वाह!वाह! कैसे तेरी ये खुदायी,      कर दिया दुर -दुर हो गया है जुदायी,    
हो गया जुदायी करिश्मा है ये तेरी,      आ जा - आ जा कर ना अब तू देरी,
.        🖋️ प्रमोद कुमार सिन्हा, बाघी
काव्य रचनाकार  प्रमोद कुमार सिन्हा की काव्य समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक/सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित।

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