काव्य रचना :- . प्रेम है बेदर्द देखता हूँ ज़ब भी कहीं इधर - उधर , ठहर जाती मेरी नज़र हो तू जिधर ,
काव्य रचना :-
. प्रेम है बेदर्द
देखता हूँ ज़ब भी कहीं इधर - उधर , ठहर जाती मेरी नज़र हो तू जिधर ,
प्रेम है बेदर्द
देखता हूँ ज़ब भी कहीं इधर - उधर , ठहर जाती मेरी नज़र हो तू जिधर , बड़ी मुक़्क़त से दिल जो मैं लगाया, आहें भरता रहता ह्रदय को जगाया , बेदर्द हैँ सभी मिल मुझे जो सताया, प्रेम है क्या ये जाना ना मैं कभी , अश्रु बहते आँखों नें दिखाया मुझे, सितम सहते - सहते ऑंखें भर गया,
मस्ती में रही तू चकनाचूर मैं हो गया, प्यार का है ये कसूर कभी सोचा ना था खाद बीज डाल ऐसा कभी बोया ना था
धीरे - धीरे दिल में मेरे उतरती गयी, दस्तूर रहा तेरा दुर - दुर तू होती गयी
बड़ी बेमुर्ववत है बेदर्द है ये जमाना, कहीं का अफसाना कहीं का फ़साना
तू ही मेरे दिल में है पल -पल समायी
करवटऐं बदलते हुए आँसू भर आयी
वाह! ये खुदा है तेरी ये कैसी खुदायी
तड़पा - तड़पा तुझे तरस ना आयी ,
ह्रदय देख कह रहा है कैसी है तू , इधर तड़प रहा ना देखा कभी भी तू
प्रेम करना जानता मैं है बड़ा गुनाह,
तो तेरे से पहले दुर ले लेता पनाह , दिल की बात क्या करूँ भी कैसे, अफसाना - फ़साना तेरे ही हैँ जैसे,
हे परवरदिगार तूने रहम भुला दिया, दीपक - बाती बन मुझे जला दिया, वाह!वाह!वाह! कैसे तेरी ये खुदायी, कर दिया दुर -दुर हो गया है जुदायी,
हो गया जुदायी करिश्मा है ये तेरी, आ जा - आ जा कर ना अब तू देरी,
. 🖋️ प्रमोद कुमार सिन्हा, बाघी
काव्य रचनाकार प्रमोद कुमार सिन्हा की काव्य समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक/सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित।

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