बछौता पंचायत: लोकतंत्र का श्मशान घाट – सुप्रीम कोर्ट को कब तक इंतज़ार..?":, अधिवक्ता बैरम रकी

"बछौता" पंचायत का भ्रष्टाचार देश की आत्मा पर धब्बा है – इसे मिटाओ, लोकतंत्र बचाओ!": अधिवक्ता बैरम रकी

बछौता पंचायत: लोकतंत्र का श्मशान घाट – सुप्रीम कोर्ट को कब तक इंतज़ार..?"

जनक्रांति कार्यालय से एडवोकेट मोहम्मद बैरम रकी की रिपोर्ट 

आज सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान नहीं लिया, तो कल हर पंचायत बछौता बन जाएगी : अधिवक्ता बैरम रकी 

खगड़िया,बिहार (जनक्रांति हिन्दी न्यूज बुलेटिन न्यूज डेस्क, बिहार )। बिहार का खगड़िया ज़िला और उसमें बछौता पंचायत— जहाँ कभी लोकतंत्र की बुनियाद मज़बूत होनी चाहिए थी, वहाँ अब भ्रष्टाचार, माफियागिरी और लूट का साम्राज्य खड़ा कर दिया गया है।
यहाँ हालात इतने बदतर हैं कि पंचायत अब लोकतंत्र का मंदिर नहीं, बल्कि दलालों का दरबार और अपराधियों का अखाड़ा बन चुकी है।
🔴 बछौता पंचायत की सच्चाई
✔ प्रधानमंत्री आवास योजना – गरीबों के नाम पर पैसे की बंदरबांट, ज़्यादातर घर कागज़ पर बने।
✔ शौचालय योजना – करोड़ों की हेराफेरी, गड्ढे बने लेकिन शौचालय नहीं।
✔ भू-माफिया – गरीबों की ज़मीन हड़पकर लाखों की कमाई, प्रशासन मौन।
✔ शिक्षा माफिया – बच्चों के भविष्य को नीलाम कर दिया गया।
✔ शराब व नशा कारोबार – खुलेआम धंधा, पुलिस और प्रशासन सबकी मिलीभगत।
✔ राशन घोटाला – जनता का अनाज, नेता और डीलर की जेब में।
👉 गाँव के आम लोग पूछते हैं—"क्या लोकतंत्र इसी दिन के लिए था?"
⚖️ कानून और संविधान की रोशनी में
भारतीय संविधान की प्रस्तावना कहती है—न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुता।
लेकिन Bachhauta पंचायत में यह सब कागज़ की किताब तक सीमित हो चुका है।
📜 अनुच्छेद 21 – जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार यहाँ रोज़ कुचला जा रहा है।
📜 अनुच्छेद 38 और 39 – राज्य का दायित्व सामाजिक न्याय और समान अवसर सुनिश्चित करना है, लेकिन यहाँ राज्य खुद अपराध का भागीदार बन चुका है।
BNSS और IPC की धाराएँ जो सीधी लागू होती हैं –
धोखाधड़ी और फर्जीवाड़ा – धारा 420,सरकारी धन का दुरुपयोग – धारा 409जनता को धोखा – धारा 417अवैध शराब और नशा कारोबार – धारा 273, 328भूमि कब्ज़ा और माफियागिरी – धारा 441, 447
साजिश और गिरोहबंदी – धारा 120B, 34।
👉 यानी बछँता पंचायत पूरा का पूरा एक संगठित आपराधिक तंत्र (Organized Crime Syndicate) बन चुका है।
🛑 क्यों ज़रूरी है सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट का हस्तक्षेप.?
यह सिर्फ एक पंचायत की कहानी नहीं है।
यह तो भारत के गाँवों में लोकतंत्र की हत्या का ब्लूप्रिंट है।
👉 अगर आज सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान नहीं लिया, तो कल हर पंचायत बचौटा बन जाएगी।
👉 यहाँ के बच्चे नशे और अंधकार में डूब जाएंगे।
👉 जनता का लोकतंत्र पर से भरोसा हमेशा के लिए उठ जाएगा।
📢 इसलिए ज़रूरी है कि:
सुप्रीम कोर्ट एक विशेष जाँच दल (SIT) बनाए।
पंचायत के मुखिया से लेकर वार्ड सदस्य और अधिकारियों तक, सभी की जाँच व संपत्ति की ऑडिट हो।
बिहार सरकार से जवाब तलब किया जाए कि क्यों पंचायत को माफियाओं के हवाले छोड़ा गया।
🔥 जनता की पुकार
👉 यह लेख सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि 15 हज़ार ग्रामीणों की चीख है।
👉 यह उन ग़रीबों की आवाज़ है जिन्हें घर, शिक्षा और रोज़गार का सपना दिखाकर लूटा गया।
👉 यह उन बच्चों की आह है जो किताबों की जगह शराब की बोतल पकड़ने पर मजबूर कर दिए गए।
🚩 नारा
"बछौता" पंचायत का भ्रष्टाचार देश की आत्मा पर धब्बा है – इसे मिटाओ, लोकतंत्र बचाओ!"
उपरोक्त आलेख जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक/सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा संपादित व प्रकाशित।

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