काव्य संग्रह: है प्रेम जगत मे सार और कोई सार नहीं मन कर ले हरि जी से प्यार और कोई प्यार नहीं :
काव्य संग्रह:
है प्रेम जगत मे सार और कोई सार नहीं मन कर ले हरि जी से प्यार और कोई प्यार नहीं :
🖋️ प्रमोद कुमार सिन्हा
है प्रेम जगत में सार और कोई सार नहीं, मन कर ले हरि जी से प्यार और कोई प्यार नहीं,
हेरि मैं तो प्रेम दीवानी मेरो दर्द ना जाने कोई ---- मीरा
प्रेम ना बारी उपजे प्रेम ना हाट बिकाइ, राजा प्रजा जेहि रुचे शीश धरे घर ले जाये ----- कबीर
वास्तव में आज चहूँ ऒर नफरत ही नफरत है प्रेम कहीं दीखता ही नहीं उसका मुख्य कारण है अपने आप से बिछड़ जाना अपने स्व से दुर जो है वो तो नफरत ही बोयेगा,
बुल्ले साह ने कहा है, बेशक मंदिर -मस्जिद तोड़ो बुल्ले साह मैं कहता, पर प्यार भरा दिल कभी ना तोड़ो इसमें है दिलबर रहता ,
जो अपने ही अन्तः करण में उतर गया वो अल्लाह को समझ गया, जो मस्जिद में उलझ गया बे - अल्लाह हो गया।
समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रमोद कुमार सिन्हा की रचना प्रकाशक/सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित ।

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