"दिव्यांग नहीं, दलालों का ‘दिव्य’ खेल — GMCH पूर्णिया में MBBS घोटाले ने हिला दिया बिहार”

"दिव्यांग नहीं, दलालों का ‘दिव्य’ खेल — GMCH पूर्णिया में MBBS घोटाले ने हिला दिया बिहार”

जनक्रांति कार्यालय से मोहम्मद बैरम रकी अधिवक्ता की रिपोर्ट 
GMCH (Government Medical College & Hospital), पूर्णिया यहाँ जो खुलासा हुआ है, वह सिर्फ एक कॉलेज का मामला नहीं,
यह पूरे सिस्टम पर करारा तमाचा है।

अब सवाल सिर्फ छात्रों का नहीं, सिस्टम का है सर्टिफिकेट किसने बनाया.?
किस डॉक्टर ने साइन किया.?
कॉलेज ने बिना जांच कैसे एडमिशन दे दिया..?

इंडिया न्यूज डेस्क, (जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन कार्यालय न्यूज डेस्क,15 जनवरी, 2026 पूर्णिया,बिहार )।
"दिव्यांग नहीं, दलालों का ‘दिव्य’ खेल — GMCH पूर्णिया में MBBS घोटाले ने हिला दिया बिहारजहाँ एक तरफ़ गरीब और सच में दिव्यांग छात्र मेडिकल की पढ़ाई का सपना देखते-देखते उम्र बिता देते हैं,
वहीं दूसरी तरफ़ दिव्यांग कोटे को दलालों ने धंधा बना दिया।
GMCH (Government Medical College & Hospital), पूर्णिया यहाँ जो खुलासा हुआ है, वह सिर्फ एक कॉलेज का मामला नहीं,
यह पूरे सिस्टम पर करारा तमाचा है।
 MBBS में फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट का बड़ा खेल
तीन वर्षों में GMCH पूर्णिया में
दिव्यांग कोटे से 15 नामांकन हुए।
जांच हुई…तो सच्चाई बाहर आई —
 7 छात्रों के दिव्यांग प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए। और इससे भी बड़ा झटका 
2023 और 2024 बैच के सभी 7 आरोपी छात्र फरार!
मतलब साफ है —
ये गलती नहीं,
ये संगठित रैकेट है। 
कान से दिव्यांगता… सबका एक जैसा बहाना!
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि
 सभी 7 छात्रों के पास “कान से दिव्यांगता” का सर्टिफिकेट था।
सवाल उठता है —
क्या संयोग से सभी को एक ही बीमारी थी.?
या फिर सर्टिफिकेट बनाने वाली फैक्ट्री एक ही थी.?.
यहीं से शक गहराता है कि यह पूरा नेटवर्क डॉक्टरों, दलालों और सिस्टम के अंदर बैठे लोगों की मिलीभगत का नतीजा है।
पहले भी खुल चुका है मामला, फिर भी सिस्टम सोता रहा।
यह पहला केस नहीं है।
इससे पहले कार्तिक यादव नाम का एक छात्र इसी घोटाले में गिरफ्तार होकर जेल जा चुका है।
फिर सवाल उठता है — जब एक मामला सामने आ चुका था, तो कॉलेज स्तर पर
सर्टिफिकेट जांच की व्यवस्था क्यों नहीं मजबूत की गई.?
आखिर किसके संरक्षण में ऐ फर्जीवाड़ा सालों तक चलता रहा..?
असली दिव्यांगों के हक़ पर डाका
यह घोटाला सिर्फ कानून तोड़ने का मामला नहीं है,
यह इंसानियत के खिलाफ अपराध है।
असली दिव्यांग छात्र बाहर रह गए
फर्जी छात्र MBBS की सीट ले गए
और सिस्टम तमाशबीन बना रहा
यह सीधे-सीधे संविधान में दिए गए सामाजिक न्याय के अधिकार का मज़ाक है।
अब सवाल सिर्फ छात्रों का नहीं, सिस्टम का है सर्टिफिकेट किसने बनाया.?
किस डॉक्टर ने साइन किया.?
कॉलेज ने बिना जांच कैसे एडमिशन दे दिया..?
मेडिकल काउंसिल और राज्य सरकार क्या कर रही थी?
अगर ईमानदार जांच हुई
तो सिर्फ छात्र नहीं,
कई बड़े नाम बेनकाब होंगे।
बिहार अब और नहीं सहेगा
बिहार ने बहुत देख लिया —
पेपर लीक
फर्जी डिग्री
नौकरी घोटाले
और अब मेडिकल शिक्षा में माफिया राज अब वक्त है कि इस मामले की CBI या हाई-लेवल SIT से जांच हो
 फर्जी छात्रों की डिग्री रद्द हो रैकेट चलाने वालों को सलाखों के पीछे भेजा जाएइस लेख को शेयर कीजिए।
ताकि यह मामला सिर्फ पूर्णिया तक सीमित न रहे,
बल्कि पूरे हिंदुस्तान में तहलका मचा दे।
क्योंकि जब शिक्षा बिकती है,
तो देश बीमार पड़ जाता है।
समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से अधिवक्ता मोहम्मद बैरम रकी की रिपोर्ट प्रकाशक/सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित।

Comments