जब तक सवाल ज़िंदा हैं, तब तक ज़ालिम बेनक़ाब हैं Justice की जंग और झूठे जवाबों का क़ब्रिस्तान

जब तक सवाल ज़िंदा हैं, तब तक ज़ालिम बेनक़ाब हैं Justice की जंग और झूठे जवाबों का क़ब्रिस्तान

जनक्रांति कार्यालय से अधिवक्ता मोहम्मद बैरम रकी की रिपोर्ट
आज का अन्याय बंदूक से नहीं चलता,
वह फाइलों, तारीख़ों, बयान और प्रेस नोट से चलता है।

इंडिया न्यूज़ डेस्क, (जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन कार्यालय न्यूज़ डेस्क, खगड़िया, बिहार 17 जनवरी, 2026)।
जब सवाल ज़िंदा हैं, तब तक ज़ालिम बेनक़ाब हैं Justice की जंग और झूठे जवाबों का क़ब्रिस्तान।
“जब तक Justice सवाल पूछती रहेगी, तब तक ज़ालिम जवाब बदलते रहेंगे।”
यही एक पंक्ति आज के पूरे लोकतंत्र, न्याय व्यवस्था और सत्ता के चरित्र को नंगा करने के लिए काफ़ी है। Justice कोई पत्थर की मूर्ति नहीं, जो अदालतों की सीढ़ियों पर खड़ी रह जाए।
 Justice एक ज़िंदा चेतना है—जो सवाल करती है, टोकती है, ललकारती है। लेकिन समस्या यह है कि
जब भी Justice सवाल पूछती है—
ज़ालिम घबराता नहीं,
वह जवाब बदल लेता है।
आज का अन्याय बंदूक से नहीं चलता,
वह फाइलों, तारीख़ों, बयान और प्रेस नोट से चलता है।
यहाँ सच को मारने के लिए गोली नहीं,
“कमेटी बना दी जाती है।”
Justice पूछती है—
गरीब क्यों कुचला गया?
तो जवाब बदलता है— “जांच जारी है।”
Justice पूछती है—
निर्दोष क्यों जेल में है?
तो जवाब बदलता है— “प्रक्रिया पूरी हो रही है।”
Justice पूछती है—
दोषी खुलेआम क्यों घूम रहा है?
तो जवाब बदलता है— “सबूत नहीं मिले।”
असल में, Justice से डर नहीं लगता उन्हें, डर लगता है सवालों से।
क्योंकि सवाल आवाज़ बनते हैं,
आवाज़ आंदोलन बनती है,
और आंदोलन सत्ता की नींद हराम कर देता है।
आज Hindustan ही नहीं,
पूरी दुनिया में Justice को
कमज़ोर समझ लिया गया है।
लेकिन इतिहास गवाह है—
Justice भले देर से आए,
पर जब आती है,
तो सिंहासन हिलाकर आती है।
जो समाज सवाल करना छोड़ देता है,
वहाँ Justice मर जाती है।
और जहाँ Justice मर जाती है,
वहाँ इंसान सिर्फ़ एक संख्या रह जाता है।
इसलिए अगर आज Justice सवाल पूछ रही है,
तो उसे चुप मत कराइए।
क्योंकि जिस दिन सवाल ख़त्म हो गए,
उस दिन जवाब देने वाले ज़ालिम
भगवान बन बैठेंगे।
Justice को ज़िंदा रखना है तो—
सवाल ज़िंदा रखने होंगे।
क्योंकि जब तक Justice सवाल पूछती रहेगी, तब तक ज़ालिम जवाब बदलते रहेंगे—
और एक दिन, जवाब ख़त्म हो जाएँगे।
समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से अधिवक्ता मोहम्मद बैरम रकी की रिपोर्ट प्रकाशक/सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित।

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