"थाने में कैमरा ON — डर ऑफ ! कानून ने खोल दी पुलिस स्टेशन की दीवारें ”

"थाने में कैमरा ON — डर ऑफ ! कानून ने खोल दी पुलिस स्टेशन की दीवारें ”

जनक्रांति कार्यालय से अधिवक्ता मोहम्मद बैरम रकी की रिपोर्ट
कानून ने साफ़ शब्दों में कहा है: डर की ज़रूरत नहीं।
Subhash Rambhau Athare vs State of Maharashtra (2024) में बॉम्बे उच्च न्यायालय ने वह बात कह दी, जिसे सालों से दबाया जा रहा था—
पुलिस स्टेशन, Official Secrets Act, 1923 के तहत ‘प्रतिबंधित स्थान’ नहीं है' :मुंबई उच्च न्यायलय 


इंडिया न्यूज़ डेस्क, (जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन कार्यालय न्यूज़ डेस्क,25 जनवरी, 2026 खगड़िया, बिहार)।
भारत में आम नागरिक और पुलिस स्टेशन—इस रिश्ते में सबसे बड़ा हथियार हमेशा डर रहा है।
डर सवाल पूछने से,
डर अपनी बात रिकॉर्ड करने से,
और डर—“कहीं FIR न हो जाए!”
लेकिन अब कानून ने साफ़ शब्दों में कहा है: डर की ज़रूरत नहीं।
Subhash Rambhau Athare vs State of Maharashtra (2024) में बॉम्बे उच्च न्यायालय ने वह बात कह दी, जिसे सालों से दबाया जा रहा था—
पुलिस स्टेशन, Official Secrets Act, 1923 के तहत ‘प्रतिबंधित स्थान’ नहीं है।
मतलब क्या?
मतलब यह कि—
थाने के भीतर वीडियो रिकॉर्डिंग करना जासूसी नहीं है।
अपनी बातचीत, अपनी अर्ज़ी, अपनी शिकायत को रिकॉर्ड करना अपराध नहीं है।
सिर्फ रिकॉर्डिंग के आधार पर FIR दर्ज नहीं की जा सकती।
यह फैसला सिर्फ एक जजमेंट नहीं—
यह लोकतंत्र की रीढ़ को सीधा करने वाला फैसला है।
क्यों ज़रूरी है थाने में रिकॉर्डिंग?
क्योंकि—
शब्द पलट दिए जाते हैं
बयान बदल दिए जाते हैं
और अक्सर कहा जाता है— “तुमने ऐसा कहा ही नहीं”
अब नागरिक कह सकता है—
 “मैंने कहा था, और ये रहा उसका सबूत।”
पुलिस भी जवाबदेह है
यह फैसला पुलिस के खिलाफ नहीं,
पुलिस व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए है।
ईमानदार पुलिस अधिकारी के लिए रिकॉर्डिंग डर नहीं,
बल्कि ढाल है।
गलत करने वाले के लिए—आईना।
लोकतंत्र में कैमरा अपराध नहीं
जब—
संसद की कार्यवाही रिकॉर्ड होती है
कोर्ट की कार्यवाही रिकॉर्ड होती है
तो नागरिक और पुलिस के बीच बातचीत रिकॉर्ड होना अपराध कैसे हो सकता है.?
एक ज़रूरी बात
यह अधिकार मनमानी या उकसावे के लिए नहीं है।
रिकॉर्डिंग का उद्देश्य होना चाहिए—
अपनी सुरक्षा
पारदर्शिता
 सच का संरक्षण
न कि किसी की निजता भंग करना या कानून व्यवस्था बिगाड़ना।
आख़िरी बात
आज अगर आप थाने जाते हैं,
तो आपके हाथ में सिर्फ आवेदन नहीं—
कानून की ताक़त है।
 कैमरा चालू करें, हक़ बचाएँ।
क्योंकि अब—
थाने में सन्नाटा नहीं, सच बोलेगा।
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समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक/सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित।

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