गजल : रूठ गया तो मनाती फिरोगी नजर ना आऊंगा ढूंढती फिरोगी तमन्ना होगी फिर से मिलने की तब्बसुम में आँसू बहाती फिरोगी मैं रूठ गया..........??

गजल : रूठ गया तो मनाती फिरोगी 
नजर ना आऊंगा ढूंढती फिरोगी 
तमन्ना होगी फिर से मिलने की 
तब्बसुम में आँसू बहाती फिरोगी 
मैं रूठ गया..........??
     🖋️प्रमोद कुमार सिन्हा, बाघी 

मैं रूठ गया तो मनाती फिरोगी 
नजर ना आऊंगा ढूंढती फिरोगी 
तमन्ना होगी फिर से मिलने की 
तब्बसुम में आँसू बहाती फिरोगी 
मैं रूठ गया..........
नज़रें इनायत होगी ज़ब खुदा की 
नज़रें झुकाती दिल से याद करोगी 
गर मिल गया तो मेहरबानी उसकी 
पछताती पथ पर खोजती फिरोगी 
मैं रूठ गया तो.......
दीदार तेरा हुस्ने -, ए - बहार है यदि 
कम नहीं तुमसे मुहब्बतें इज़हार है 
मुक़्क़मल तू नहीं तो कोई औऱ सही 
काबिले तारीफ हो चमन ए बहार है 
मैं रूठ गया...........
जानेमन तेरे शहर में दीदार हुआ है 
गुलशन गुलशन में फुहार हुआ है 
मझधार में तुम खो गयी हो कहीं 
कैसे कह दूँ मैं तुमसे प्यार हुआ है 
मैं रूठ गया तो......
चिलमन उठाकर झांको तो जड़ा 
चाँद सा चमकता चाँदनी दिखेगी 
कहती फिरोगी बांहों में आ जाओ 
नज़र ना आऊंगा टकटकी लगेगी 
मैं रूठ गया.....??
👆उपरोक्त ग़ज़ल प्रकाशन हेतु स्व रचित ग़ज़ल, प्रमोद कुमार सिन्हा, केंद्रीय ब्यूरो, जनक्रांति हिंदी न्यूज़ द्वारा प्रेषित व समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक /संपादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित।

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