स्वरचित काव्य रचना : चिराग थी अब दिल है बीराग जिये जा रहा हूँ जिये जा रहा हूँ एक तेरा नाम लेकर पिये जा रहा हूँ..

 स्वरचित काव्य रचना : चिराग थी अब दिल है बीराग 
जिये जा रहा हूँ जिये जा रहा हूँ 
एक तेरा नाम लेकर पिये जा रहा हूँ..

        🖋️प्रमोद कुमार सिन्हा, बाघी

जिये जा रहा हूँ जिये जा रहा हूँ 
एक तेरा नाम लेकर पिये जा रहा हूँ 
बस जुबां पर तेरा ही नाम लेकर 
याद तेरी आती है तड़प तड़प जाता हूँ 
नींद नहीं आती है रात गुज़र जाती है 
करवटें बदलते बदलते बीत जाती है 
हर घड़ी हर पल बस तू ही तू है दिल में 
बिछावन सिल्वटेंन बदलते बदलते 
केवल औऱ केवल तेरी यादें सताती है 
हाल - बेहाल है दिल भी परेशान है 
सुनाऊँ क्या हाल अब मैं अपना तुझे 
रात कैसे गुजरती है दिन कैसे ?
सब होते भी दिल मेरा श्मशान है 
अंधेरा नहीं तू थी तो दिन था उजाला 
अब दिन उजाला रात होती है दिबाला 
तू ही तो चिराग थी अब दिल भी है 
बीराग 
सब कुछ तो है फिर भी दिल है परेशान 
ना दोस्त रहा ना ही है कोई अनुराग 
जिंदगी अधूरी की अधूरी रह गयी है 
बिन तेरे कैसे सब के सब सबूरी रह गयी है 
कट रही है ज़िन्दगी मेरी रात के अंधियारे में 
जग कर लिख रहा हूँ दिल के सुने गलियारे में 
सुना - सुना - सुना है बस केवल एक तेरे बिना 
क्या लिखूँ क्या बोलूं अधुरा रह गया तेरे बिना 
अधुरा पन अब खलता है ज़िन्दगी बर्बाद लगता है 
आबाद हूँ चार फुल खिलखिला रहे हैं तेरा बिना 
बहुत लिखा है अब परेशान मत करना 
सोने जा रहा हूँ कल से दिल आबाद करना 
बाय बाय है मेरा टाटा है आखिरी बार..
उपरोक्त रचना प्रकाशन हेतु प्रमोद कुमार सिन्हा, केंद्रीय ब्यूरो, जनक्रांति हिंदी न्यूज़ बुलेटिन द्वारा प्रेषित समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक/सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित।

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