यू जी सी बिल पर स्व-रचित रचनाश्मशान भूमि है जाना हमें एक दिन
यू जी सी बिल पर स्व-रचित रचना
श्मशान भूमि है जाना हमें एक दिन
पल दो पल की है मात्र जिंदगी
वक़्त कम है कर ले खुदा बंदगी
समय बीते पीछे पछताना पड़ेगा
बीत ना जाये पल होगा शर्मिंदगी
पल दो पल की है........
समय गुज़र रहा है वक़्त बीत रहा
हाथ से निकला तीर बिंधता ही रहा
आगे दीन पाछे गया पछताना क्यों
सम्भल जा तू अब युधिष्ठिर ना रहा
पल दो पल की है........
अर्जुन - भीम की है अबकी बारी
धर्म छोड़ लड़ने की करो तैयारी
बिगुल बज चुका है पीछे ना हटना
सोच समझ उतरना चाहे है यैयारी
पल दो पल की है........
सरकार अब हमारा तुम्हारा ना है
दलितों पिछड़ों वोट खरीद रहा है
यू जी सी बिल सबरणों की है मौत
तीर अर्जुन का पुतली बिंध रहा है
पल दो पल की है........
अबकी जय या पराजय होगी
कटने मरने की हमारी बारी होगी
देखना है जोड़ कितना समर में है
उखाड़ फेंकना है समय हमारी होगी
पल दो पल की है.......
शंख बज चुका समर के बीच में
उठा गाण्डीव कृष्ण हमारे बीच में
देर करो नहीं चाहे भीष्म हो खड़ा
अलग सर कर द्रोन है जो बीच में
पल दो पल की है........
ये दो अंधे की टोली उजाड़ फेंको
सह चुके बहुत गद्दी से उतार फेंको
घिगघी बंधी रहती है शेर कहाता है
सुनता नहीं किसी को उधार फेंको
पल दो पल की है........
मौत से क्या डरना आयेगी एकदिन
जान जानी निश्चय एक ना एक दीन
मौत से लड़ना सीखो कायर ना बनो
श्मशान भूमि है जाना हमें एकदिन
पल दो पल की है.......??
यू जी सी बिल पर आधारित स्व रचित रचना प्रकाशन हेतु प्रमोद कुमार सिन्हा, केंद्रीय ब्यूरो, जनक्रांति हिंदी न्यूज़ बुलेटिन द्वारा प्रेषित व समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक /सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित।

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