जीवन सार : एक महान व्यक्तित्व क़े धनी रहे जल संसाधन विभाग क़े अधीक्षण अभियंता सुरेश प्रसाद सिंह
जीवन सार : एक महान व्यक्तित्व क़े धनी रहे जल संसाधन विभाग क़े अधीक्षण अभियंता सुरेश प्रसाद सिंह
जनक्रांति कार्यालय से केन्द्रीय ब्यूरो चीफ प्रमोद कुमार सिन्हा की रिपोर्ट
ऐ बडे उच्च पदाधिकारी लेकिन अभिमान नाम की कोई चीज नहीं थी औऱ मेरी झोपडी नुमा मकान में आने जाने में कभी भी आनाकानी इन्होंने नहीं की या आदर भाव में आजतक कोई कमी मुझे नहीं महसूस हुआ : प्रमोद कुमार सिन्हा
इंडिया जनक्रांति न्यूज डेस्क (जनक्रांति हिन्दी न्यूज बुलेटिन कार्यालय न्यूज डेस्क 26 फरवरी, 2026)। आइये आज हम एक ऐसे शख्स से परिचय कराते हैँ जिनका नाम है सुरेश प्रसाद सिंह भूतपूर्व अधीक्षण अभियंता जल संसाधन बिभाग, बिहार सरकार से जी हाँ ये हमारे गार्जियन तुल्य रहे, मित्रवत रहे औऱ पारिवारिक सम्बन्ध से ओत प्रोत रहे हैँ।मेरा उनसे परिचय दरभंगा में पदस्थापना क़े समय हुआ औऱ धीरे - धीरे सम्बन्ध बढ़ता - बढ़ता दोस्ताना औऱ पारिवारिक होता चला गया। हम आपस में कम से कम सप्ताह में एक दिन मुलाक़ात करते रहे हैँ।
संजोग ही कहा जायेगा की मैं बेगूसराय बाघी ( पूर्व में जिनेदपुर ) औऱ इनका घर ( पूर्व में नावकोठी रहा है ) वर्तमान में ये मीरगंज मोहल्ले औऱ मैं बाघी मुहल्ले का वासी बनकर रह गये।
ये अपने कार्य में परम कुशल ही नहीं बल्कि जीवन भर कोई इन्हें रुपया पैसा से खरीद नहीं सका ठीक उसी प्रकार मेरी भी कार्य कुशलता रही है। इस कारण धीरे -धीरे सम्बन्ध प्रगाढ होता चला गया।
कुछ दैवीय कारण से ये निलंबित भी वर्षो तक रहे जबकि इनका कोई कसूर नहीं था, बाद में विस्तृत जाँच में इन्हें दोष से मुक्त कर दिया गया, उस समय ये अवर प्रमंडल पदाधिकारी क़े पद पर पदासीन थे औऱ मैं भी प्री - चेक ( ऑडिट ) से था दोनों की कार्य शैली एक समान रही ना मैं झुकने को तैयार था औऱ ना ही ये गलत कार्य में झुकने क़े तैयार थे इस कारण सम्बन्ध नजदीक से नजदीक ही नहीं दोस्ताना होते होते पारिबारीक़ होता गया।
इनके निर्देश क़े आलोक में ही बेगूसराय क़े नामी गिरामी शिक्षा क़े आलोक में मेरे सभी पुत्र "गाँधी शिक्षण संस्थान " जैसे स्कूल से स्कूली शिक्षा प्राप्त कर सके औऱ इनका पुत्र भी "गाँधी शिक्षण संस्थान " रतनपुर से स्कूली शिक्षा से काविल हुए।
सेंट जेबियर कॉलेज राँची से इनकी शिक्षा हुई औऱ इंजीनियर हो गये। परन्तु इंजीनियर क़े कार्य कलाप औऱ दबाव से ये परेशान रहा करते थे। इस कारण इन्होंने दृढ़ संकल्प लिया की भविष्य में ये अपने पुत्र को कभी भी इंजीनियर नहीं बनायेंगे औऱ हुआ भी ऐसा ही, आज इनके बड़े पुत्र इंग्लिश में पटना यूनिवर्सिटी से गोल्ड मैडलिस्ट होते हुए भी प्राध्यापक नहीं हो पाये। हाँ बंदूवार १०+२ स्कूल में प्रधानाध्यापक पद पर पदासीन हैँ औऱ दूसरे पुत्र सफल व्यवसाई "विंध्यवासिनी " नाम से फर्म चलता है।
समय क़े अंतराल में इनकी पदस्थाना औऱ मेरी पदस्थाना बिभिन्न जगहों पर रही परन्तु सप्ताहमें मिलन होता रहा।
मेरे घर का डिजाइन में इनका ही योगदान रहा जहाँ मिस्त्री द्वारा कुछ गडबडिया भी हुई ये कार्यपालक अभियंता हुए अधीक्षण अभियंता हुए जो एक कमीशनर रैंक होता है, परन्तु मेरी दोस्ताना औऱ पारिवारिक सम्बन्ध में कोई फर्क नहीं पड़ा। जहाँ मैं एक साधारण कर्मचारी था वहीं दुसरी ऒर ये बड़े ही उच्च पदाधिकारी लेकिन अभिमान नाम की कोई चीज नहीं थी औऱ मेरी झोपडी नुमा मकान में आने जाने में कभी भी आनाकानी इन्होंने नहीं की या आदर भाव में आजतक कोई कमी मुझे नहीं महसूस हुआ।
बहुत अरसे की बात है "वाचस्पति मिश्र की जीवनी मैंने प्रथम बार इनक़े मुखारविन्द से सुना था औऱ आज मैं परम सृष्टि सृजनहार मेरे गुरुदेव "" बाबाजी विजय वत्स "" क़े प्रवचन से सुना।
दरभंगा क़े बाद ये मुझसे अलग होते गये औऱ मैं भी अलग होता गया पदस्थापना की वजह से परन्तु साप्ताहिक मिलन बरकरार रही, दुसरी बार हम दोनों की पुनर पदस्थापना एक ही कार्यपालक अभियंता खगरिया में हुई जहाँ मैं ऑडिट में था जो कार्यपालक अभियंता क़े अधीन नहीं था। वहीं ये एज एस्टीमेटिंग ऑफिसर थे। इन्हें गलत एस्टीमेट का दबाव कार्यपालक अभियंता से लेकर अधीक्षण अभियंता स्तर पर हुआ परन्तु ये डिगे नहीं बल्कि स्पष्ट तौर पर कहा मुझे इग्नोर कर आपलोग एस्टीमेट बनाकर कार्य कर लें ज़ब तक मैं इस चेयर पर हूँ मेरा दस्तख्त नहीं होगा। आपलोग सक्षम हैँ स्वंय कर लें दबाव क़े आगे ये झुके नहीं।
पुनः मेरी पदस्थापना अलग अलग जगहों पर होती रही औऱ इनकी पदस्थापना भी भिन्न भिन्न जगहों पर परन्तु मिलन होता रहा आना जाना जारी रहा।
दुःखद स्थिति रही की मैं भी सेवानिवृत हुआ औऱ मुझसे पहले ये भी सेवा निवृत हुए। आज एक बहुत ही लम्बे अंतराल क़े बाद इनसे मेरी मुलाकात हुई है औऱ काफ़ी समय तक परिवार औऱ पुत्रों की सारी जानकारी आदान - प्रदान हुआ, मेरी कामना है ऐसे ईमानदार व्यक्तित्व क़े धनी अधीक्षण अभियंता को बिहार सरकार पुरस्कृत नहीं कर सकती थी.? परन्तु सरकारी सिस्टम की देन है हम दोनों आदमियों की अहमियत सरकार द्वारा नहीं की गयी। जहाँ एक ऒर मुझे प्रशासनिक पद पर मनोनयन हेतु अनुशंसा की गयी थी विशेष औऱ सीनियर ऑडिट ऑफिसर क़े द्वारा जो कार्मिक बिभाग क़े नियमानुकूल था। वहीं मैं जिस कार्यपालक अभियंता पर मैं आपत्ति प्रगट करता था इसके इतर भी कार्यपालक अभियंता ने वित्तीय परामर्शी को पत्र भेजकर उक्त प्रशासनिक पद पर मनोनयन हेतु पत्र लिखा।
सभी पत्रों की छाया प्रति संलग्न है, वहीं दुसरी ऒर कहाबत है भ्रष्ट अधीक्षक लेखा स्व एस एन वरियार ने नियम से इतर जाकर कार्मिक विभाग क़े नियम क़े विपरीत नोटिंग ड्राफ्टिंग कर मेरी संचिका को तोड़ मरोड़ कर दिया गया।
कहावत है की "गैरों में कहाँ दम था मुझे मारने की अपनों ही नहीं मुझे मारा मेरी किस्ती वहीं डूबी जहाँ पानी कम था।'
ये नोटिंग डालने वाले मेरी जाति विरादरी क़े लोग रहे यानी कायस्थ से बिलोंग करते थे। आज यदि वे जिन्दा होते तो मैं उनकी पेंशन पर पी आई एल दायर करता, अफ़सोस है वे स्व सिधार गये लेकिन इसकी सजा वे जरूर पाये होंगें औऱ यदि नहीं पाये तो उनका अगला जन्म में इसकी सजा अबश्य ही मिलेगी।
समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक/सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित।

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