स्व-रचित रचना : मैं तुमसे दूर बहुत दूर हो गया हूँ
स्व-रचित रचना :
मैं तुमसे दूर बहुत दूर हो गया हूँ
मैं तुमसे दूर बहुत दूर हो गया हूँ
अपने आप में ही विलीन हो गया हूँ..,
मैं तुमसे दूर बहुत दूर हो गया हूँ
अपने आप में ही विलीन हो गया हूँ
ढूंढ़ते रह जाओगे मुझे ना पाओगे
खुदा मर्जी से मैं मजबूर हो गया हूँ
मैं तुमसे दूर.......?
रहमत गर खुदा की ना होती तो
तुम मुझे भी यहाँ ही खोज पाती
दम भरकर देख लिया है मैंने भी
उसके हाथों मैं मगरूर हो गया हूँ
मैं तुमसे दूर.........?
अब तेरा मेरा रहा है कैसा नाता
दर - दर ठोकरें क़े काबिल हो तुम
अपने ही बल पर अब तक खड़ा हूँ
शराबे शौक से मैं सुरूर हो गया हूँ
मैं तुमसे दूर...........?
प्रमोद की अब कोई कशक नहीं
गफलत की भी जरूरत नहीं रही
नत मस्तक हो गया हूँ उसके आगे
इशारे पे नाचने को मैं मजबूर हो गया हूँ
मैं तुमसे दूर...........?

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