दोषी कौन.. ??? सरकारी सिस्टम या सरकार या कर्मचारी - पदाधिकारी आखिर है कौन...???
दोषी कौन.. ??? सरकारी सिस्टम या सरकार या कर्मचारी - पदाधिकारी आखिर है कौन...???
जनक्रांति कार्यालय से केंद्रीय ब्यूरो चीफ प्रमोद कुमार सिन्हा
कुर्सियां बिक रही है, थाना बिक रहा है, सिपाही बिकता है आई ए एस बिकता, मिनिस्टर औऱ विधायक बिकते हैँ,कौन नहीं बिकता है। सभी बिकाऊ माल हैँ खरीददार चाहिये तो दोषी कौन हुआ.. ? ये जनता सोचे : केन्द्रीय ब्यूरो चीफ
इंडिया जनक्रांति न्यूज़ डेस्क (जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन कार्यालय 23 फ़रवरी, 2026)। जी हाँ आज मैं इसी बिंदु पर लिख रहा हूँ गहन - चिंतन - मनन की परम आवश्यकता है लिखना भी बहुत जरूरी है यदि नहीं लिखूँ तो दोषी कौन ? जानकर व्यक्ति ही होगा मैं सारे सिस्टम को देख चुका हूँ मैं एक बहुत ही साधारण कर्मचारी बिहार सरकार में रहा हूँ।
आइये मैं अपने जीवन की पहलू से कुछ अवगत कराना चाहता हूँ मेरा नाम प्रमोद कुमार सिन्हा है घर मेरा बेगूसराय के अंतर्गत जिनेंदपुर नामक वस्ती है जहाँ का मैं भगीनमान हूँ मेरा ओरिजिनल घर तेघरा के पास बजलपुरा अंतर्गत हरिहर पुर है जहाँ मैं कल ही यानी दिनांक २१-०२-२०२६को भ्रमण कर लौटा हूँ यही मेरा वास्तविक परदादा मुंशी हनुमान लाल दादा मुंशी शौखी लाल पिता स्व सिया शरण का पाँच पुत्रों में सबसे छोटा हूँ।
देखिये जीवन की एक पहलू से मैंने अबगत कराया है मैं सन १९७२ में मेट्रिकुलेशन की परीक्षा पास कर पटना कॉलेज ऑफ़ कॉमर्स ( मगध यूनिवर्सिटी का छात्र रहा हूँ मैं N C C में सीनियर डिवीज़न में L C PL पद पर ट्रेनिंग ले रहा था औऱ मेरे अंडर ऑफिसर श्री बिक्रम कुंवर जी थे।
मैंने ग़रीबी नज़दीक से भुगती है जिसका जिक्र मैं अपनी जीवनी लेखन यानी (ऑटोबायोग्राफी ) में कर चुका हूँ जो अब अंतिम स्टेज पर चल रहा है।
लीजिये ये मेरी कुछ भूमिका थी जिसे बताना बहुत ही जरूरी था मेरी ट्रेनिंग से मेरे अंडर ऑफिसर श्री बिक्रम कुंवर बहुत ही प्रभावित थे वे हमारे कॉलेज के छात्र नेता थे उन्होंने मुझे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद नगर इकाई पटना से जोड़ा औऱ मैं भी सबसे कम उम्र का एक छात्र नेता हो गया यानी मेरी राजनितिक गुरु श्री बिक्रम कुंवर थे। अपने कॉलेज के छात्र नेता में श्री बिक्रम कुंवर, श्री नन्द किशोर यादव औऱ मैं यानी प्रमोद कुमार सिन्हा तीनों व्यक्ति अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद नगर इकाई पटना से सम्बन्धित था एक औऱ छात्र नेता थे स्व ब्रह्मदेव पटेल जो स्टूडेंट फेडरेशन से थे हम कुल चार छात्र नेता रहे अपने कॉलेज के यहीं से मेरी राजनीती की शुरुआत हुई उस समय विद्यार्थी परिषद " जनसंघ " का युवा इकाई था।
छात्र आंदोलन क्यों हुआ कैसी हुआ इस पचरे ना परकर हम मुख्य विन्दु पर आते हैँ सन १९७४ में बिकराल छात्र आंदोलन हुआ जिसे हम ""आपातकाल "" के नाम से जानते पहचानते हैँ जिसका नितृत्व लोकनायक जय प्रकाश नारायण जी कर रहे थे।
इस आंदोलन का मुख्य विन्दु था " सम्पूर्ण क्रांति " यानी भ्रष्टाचार का बोलबाला उत्कर्ष पर था उस समय मुख्य मंत्री श्री जगन्नाथ मिश्रा थे विस्तृत में नहीं जाकर शॉर्ट कट से हम निकलने का प्रयास कर रहे हैँ हम सभी छात्र नेता सहित समस्त छात्र जे पी के समक्ष कसम खाये थे ना हम भ्रष्टाचार करेंगे औऱ ना हम भ्रष्टाचार सहेंगे।
मुख्यत्या मैं आर एस एस से सम्बन्धित रहा हूँ जहाँ देश भक्ति की जूनून औऱ जलवा की झलक देखने औऱ समझने तथा जीवन में उतारने की जरूरत कूट कूट कर भरा जाता है आंदोलन के अंतर्गत गिरफ्तार हुआ जेल की ईतनायें सहीं उससे अधिक यातनायें पुलिस का हुआ।
बात यहीं समाप्त कर आगे बढ़ते हैँ कश्म हमने खायी थी ना भ्रष्टाचार सहेंगें औऱ ना ही करेंगें लेकिन हस्र ठीक विपरीत हो गया औऱ हम भ्रष्टाचार इतने लिप्त हो गये की जो जो हमारे आंदोलन के मित्र थे आज अरबों अरब की संपत्ति से युक्त हैँ।
जेल जाने पर ज्ञात हुआ राजनीती पैसे बालों के लिये है गरीबों के लिये नहीं, मैंने जेल से निकलने के बाद राजनीती से सन्यास ले किया औऱ जल संसाधन विभाग के ऑडिट विंग में मेरी नियुक्ति हुई यहाँ भी मैंने जो कसमे खायी थी उसे चरितार्थ किया है जिसका गबाह मेरा सेवा पुस्त में अंकित है देखा जा सकता है लेकिन अफ़सोस है जो कसमे हमने खायी थी जीवन में भरसक प्रयास जारी रहा जिसके कारण मैं सहारा का एजेंसी भी किया एस टी डी बूथ भी चलाया लेकिन घुस नहीं लेने की प्रवृत्ति की असर मेरे बच्चे पर पड़ी औऱ आज वे सभी सेटल अच्छे अच्छे पदों पर हैँ, परन्तु मैं फक्कर का फक़्कर ही रह गया आज मैं परम आत्म संतुष्टि औऱ आत्म विश्वास से लबरेज हूँ मैंने देश के लिये कुछ किया है।
लीजिये मेरी विन्दु रही दोषी कौन ??? सिस्टम सरकार या कर्मचारी - पदाधिकारी यही विन्दु पर मेरी विवेचना है चूँकि मैं इंजीनियरग बिभाग से सम्बन्धित रहा हूँ भली भांति जानता हूँ मुख्य रूप से दोषी सरकार औऱ सिस्टम है कर्मचारी नहीं ये कैसे तो मैं विश्लेषण कर रहा हूँ।
सबसे पहले हमारे यहाँ किसी कार्य का सर्वे होता है ततपश्चात एस्टीमेट औऱ डिजाइन बनता है कहने को तो यह सरकारी फण्ड से होता है लेकिन होता है ठीक इसके बिपरीत इंजीनियर जो काम कराना चाहते हैँ वे पहले अपने पैसे से सभी कार्य करते हैँ औऱ एस्टीमेट डिजाइन इत्यादि पास कराने हेतु नीचे से ऊपर तक अपने पॉकेट से पैसा खर्च करना पड़ता है तब एस्टीमेट नक्शा इत्यादी पास होता है ज़ब ऐसी दशा सिस्टम की है तब कौन ऊपरी कमाई गलत ढंग से नहीं करना चाहेगा. ? ये पैसा नीचे से ऊपर यानी मिनिस्टर, चीफ मिनिस्टर तक जाता है मजाल है जो कोई उँगुली उठा सके आज एके दुके कर्मचारी फसते हैँ औऱ इतिश्री हो जाती है। विधायक औऱ मिनिस्टर क्यों नहीं..? है इसका जबाब उनकी संपत्ति अरबो खरबों तक कैसे हो जाती है..? है इसका जबाब.? जनाब यहाँ एक बिभाग की बात नहीं यह परसेंटेज सभी बिभाग में धडल्ले से चल रहा है सभी कुर्सियां बिक रही है थाना बिकता है सिपाही बिकता है आई ए एस बिकता मिनिस्टर औऱ विधायक बिकते हैँ कौन नहीं बिकता है। सभी बिकाऊ माल हैँ खरीददार चाहिये तो दोषी कौन हुआ.. ? ये जनता सोचे, कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा जनता भी बिकती है थोड़े से पैसे लेकर वोट देती है यानी प्रत्येक आइटम ही बिकाऊ ही बिकाऊ है स्वं मुझे भी सही काम में भी गलत ढंग से पैसा नहीं लेने पर भी प्रत्येक टेबल पर पैसा खर्च करना पड़ा घुस देना पड़ा।
यहाँ तक की जे पी सेनानी सम्मान में भी भी मुझे गृह बिभाग से कारा बिभाग तक खर्च करना पड़ा।
सबसे दुःखद पहलू तो ये हुआ सेवा निवृत पश्चात मेरा ए सी पी / एम सी पी में भी प्रति टेबल पैसा भुगतान करना पड़ा कहने को तो लाखों रूपया मैंने प्राप्त किया आई कर लगा लेकिन लाखों रूपया जो मैंने खर्च किया उसका जिम्मेबार कौन है.? आज मेरी निजी संचिका को जाँचा जाये तो पता चलेगा सारे पेमेंट की जानकारी सेवा पुस्त में होने के बाद भुगतान की बिबरनी जहाँ मैं पीछे जिस कार्यालय से माँग किया जाना किस नियम के अंतर्गत किया गया है औऱ भ्रष्ट कार्यपालक अभियंता महेश प्रसाद सिंह औऱ सम्बंधित सहायक पर आज तक जाँच कर सरकार कार्रबाई करना चाहेगी ? ठीक उसी प्रकार आदेश निकलने के बाद पैसे रिलीज़ नहीं करने पर सचिवालय सहायक से लेकर मुख्य अभियंता कार्यालय के सहायक पर कार्र वाई करना चाहेगी ? कहने को तो सरकार ने आई कर पुरे पैसे पर लिया परन्तु मिला मुझे किया ? लाखों लाख रूपया जो मेरे निजी पैसे लगे उस पर आई कर क्यों ? है इसका जबाब किसी के पास।
मैं " असाधारण अंकेक्षक " रहा हूँ ये मेरे सेवा पुस्त में अंकित है औऱ मुझे सन २००१के बाद सुबडिवीज़न में बैठाकर यानी शेर को पिंजरे में कैद कर रखा गया औऱ तनखाव दिया गया क्या मैं इसी लायक था है इसका जबाब ? इसीलिये मैंने शीर्षक दिया है दोषी कौन ??? सिस्टम सरकार या कर्मचारी - पदाधिकारी , इसका जबाब कौन देगा ? उत्तर ना ही मिलेगा औऱ ना ही हल होगा पुरा का पुरा ही सिस्टम भ्रष्ट है एक्का दुक्का पकड़ने से काम नहीं चलेगा।
इसीलिये मैंने माननीय मुख्यमंत्री नीतीश जी, माननीय उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी जी, माननीय उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा जी माननीय वित्त मंत्री जी बिजेंद्र प्रसाद यादव जी से अपने जे पी सेनानी लेटर पैड पर सुझाव दिया है ये नोटिंग ड्राफ्टिंग कंप्यूटरी कृत हो ताकी गलत लिखने बाले पर तुरत कार्रवाई हो।

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