इजराइल - ईरान - संयुक्त राज्य अमेरिका का युद्ध विश्व युद्ध की सुगबुगाहट की आगाज तो नहीं ???

इजराइल - ईरान - संयुक्त राज्य अमेरिका का युद्ध विश्व युद्ध की सुगबुगाहट की आगाज तो नहीं ???

जनक्रांति कार्यालय से केंद्रीय ब्यूरो चीफ प्रमोद कुमार सिन्हा क़ी रिपोर्ट 
 विश्व दो खेमों में बँटता नजर आ रहा है.?????

वर्ल्ड जनक्रांति न्यूज़ डेस्क (जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन कार्यालय न्यूज़ डेस्क 
आज हम बड़े ही गंभीर विषय पर चिंतन हेतु मजबूर हो गये हैँ कहीं यह युद्ध तीसरे विश्व युद्ध की ऒर अग्रसर तो नहीं हो जाये संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है पुरा विश्व दो खेमों में बँटता नजर आ रहा है आइये इसके बेसिक विषय की ऒर हम आपको लिये चलते हैँ।
  यह युद्ध का उद्देश्य ईरान में सत्ता पलटना नहीं था बल्कि मुख्य रूप से ईरान क़े परमाणु कार्यक्रम औऱ बैलिस्टिक मिसाइल भंडार को गंभीर औऱ महत्वपूर्ण क्षति पहुंचना था ।     
  यह युद्ध की शुरुआत इज़राइल ने ईरान में सैन्य औऱ परमाणु सुबिधाओं पर अचानक हमला करते हुए बम्बारी की जिसमें प्रमुख सैन्य नेताओं, परमाणु वैज्ञानिकों औऱ राजनेताओं की हत्या की इसमें इज़राइल ने ईरान को अपने अस्तित्व पर खतरा मंडराते हुए महसूस किया।
 वैसे तो ईरान से संयुक्त राज्य अमेरिका सन १९८० से ही खफा था ईरान औऱ अमेरिका क़े बीच सन १९८० से कोई औपचारिक संबंध नहीं है औऱ पाकिस्तान संयुक्त राज्य अमेरिका में ईरान की रक्षा शक्ति क़े रूप में कार्य करता है जबकि स्विट्ज़रलैंड ईरान में संयुक्त राज्य अमेरिका की रक्षा शक्ति क़े रूप में कार्य करता है।
भौगोलिक स्थिति यह है अरब सागर क़े उत्तर तथा कैपसीयन सागर क़े बीच स्तिथ है इसका क्षेत्र फल १६, ४८, ००० वर्ग किलोमीटर है जो भारत क़े कुल क्षेत्र से लगभग आधा है।
 इज़राइल एकमात्र ऐसा मुल्क है जिसने ऑपरेशन " सिन्दूर " में भारत का समर्थन किया था। ऐसी परिस्थिति में स्वाभाविक है भारत इज़राइल का समर्थन करेगा औऱ साथ रहेगा, ग्लोबध फायवर द्वारा जारी २०२६ की रैंकिंग में इज़राइल विश्व स्तर पर १५ वें स्थान पर रहा जबकि ईरान १६ वें स्थान पर रहा औऱ पैगम्बर मोहम्मद क़े ३८वें वंशज अयातुल्लाह अली खेमनई की मृत्यु हो गयी।
पुनः खेमनई की मौत पर दुःख जताने क़े लिये इमाम स्क्वापर पर इकट्ठा हुए ईरानी खामनेई औऱ टीम का आखिरी वीडियो ईरान में करो या मरो की नौबत, ईरानी औरतें सड़क पर जश्न मना रही हैँ - बिना बाल ढ़के महिला एंकर क़े चीखते हुए अमेरिका को धमकाया औऱ खामनेई की मौत पर विरोध प्रदर्शन.......
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खामनेई की मौत पर दुःख जताने क़े लिये इमाम स्क्वापर पर इकठ्ठा हुए ईरानी खेमनाई औऱ टीम की की आखिरी वीडियो ईरान में करो या मरो की नौबत, ईरानी औरतें जश्न मना रही हैँ - बिना बाल ढ़के महिला न्यूज़ एंकर अमेरिका को धमका रही हैँ , अमेरिका का वार से ईरानी समुद्री युद्धपोत चकनाचूर हो गया संभावना है। यह युद्ध तीसरे विश्व युद्ध का रूप ना ले ले, समुन्दर से आसमान तक हमला जोरदार तरीके से हो रहा है ऐसे में सोनिया गाँधी का चरित्र छिछोला पूर्वक है की माननीय मोदी जी खाम नेई की मृत्यु पर चुप्पी क्यों साधे हुए हैँ पूर्ण बचकानी औऱ बेहूदी पूर्वक उनकी सोच है ज़ब ऑपरेशन सिन्दूर चल रहा था तब ईरान ने क्या भारत का समर्थन किया था ? इटली की सोच रखकर वे कुछ से कुछ बोलती चली जा रही हैँ उन्हें कूटनीति की जानकारी का अभाव है इस कारण भारत की जनता उन्हें नकारते जा रही है वहीं उनके पुत्र जयचंद की भूमिका में विदेश में जाकर भारत क़े विरुद्ध अनाप सनाप प्रलाप करते रहते हैँ क्या उन्हें नहीं पता की महाभारत काल में कौरबों का नाश हो गया परन्तु एक कौरब युयुत्सु बचा रह गया उसका मुख्य कारण था सत्य का साथ देना औऱ वह पांडव खेमें में शरण ले चुका था, खेमनाई की मौत पर माननीय प्रधान मंत्री क्यों बोलेंगें. ? कूटनीति तो यही कहती है ये शायद सोनिया जी भुल रही हैँ।
 उपरोक्त आलेख प्रकाशन हेतु प्रमोद कुमार सिन्हा, केंद्रीय ब्यूरो चीफ , जनक्रांति हिंदी न्यूज़ बुलेटिन द्वारा प्रेषित व समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक / सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित।

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