चापलूसी भरी आज की पत्रकारिता— सच से दूरी, सत्ता से नज़दीकी

चापलूसी भरी आज की पत्रकारिता
— सच से दूरी, सत्ता से नज़दीकी

जनक्रांति कार्यालय रिपोर्ट 
मीडिया संस्थानों पर TRP और विज्ञापन का दबाव बढ़ता जा रहा है। इसी कारण कई बार खबरों की प्राथमिकता बदल जाती है: आर. के. वर्मा 

समस्तीपुर, बिहार (जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन कार्यालय न्यूज़ डेस्क 27 मार्च 2026)। लोकतंत्र में पत्रकारिता को चौथा स्तंभ माना जाता है। इसका उद्देश्य जनता तक निष्पक्ष, सटीक और निर्भीक जानकारी पहुँचाना होता है। लेकिन बदलते समय के साथ पत्रकारिता का स्वरूप भी बदलता नजर आ रहा है। आज के दौर में पत्रकारिता का एक हिस्सा चापलूसी की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है, जो लोकतंत्र और समाज दोनों के लिए चिंता का विषय बन गया है।

सवाल पूछने से बचती पत्रकारिता

एक समय था जब पत्रकार सत्ता से तीखे सवाल पूछते थे, भ्रष्टाचार उजागर करते थे और जनता की आवाज़ बनते थे। लेकिन अब कई जगह पत्रकारिता सवाल पूछने के बजाय सत्ता और प्रभावशाली लोगों की प्रशंसा में लगी नजर आती है। बड़ी समस्याओं जैसे बेरोजगारी, महंगाई, शिक्षा और स्वास्थ्य पर चर्चा कम और नेताओं की उपलब्धियों का प्रचार ज्यादा देखने को मिलता है।

TRP और विज्ञापन का बढ़ता दबाव

मीडिया संस्थानों पर TRP और विज्ञापन का दबाव बढ़ता जा रहा है। इसी कारण कई बार खबरों की प्राथमिकता बदल जाती है। जो खबरें सत्ता या बड़े संस्थानों को असहज कर सकती हैं, उन्हें कम महत्व दिया जाता है, जबकि सकारात्मक छवि बनाने वाली खबरों को प्रमुखता मिलती है।

पत्रकारिता की निष्पक्षता पर सवाल

चापलूसी भरी पत्रकारिता से मीडिया की विश्वसनीयता प्रभावित हो रही है। जनता के बीच यह धारणा बनती जा रही है कि कुछ मीडिया संस्थान निष्पक्ष नहीं रहे। इससे लोकतंत्र कमजोर होता है, क्योंकि जनता तक सही और संतुलित जानकारी नहीं पहुँच पाती।

जनता के मुद्दे पीछे छूट रहे

ग्रामीण समस्याएँ, बेरोजगारी, किसानों की परेशानी, शिक्षा व्यवस्था की कमजोरियाँ — ये सभी मुद्दे धीरे-धीरे मीडिया की सुर्खियों से गायब होते जा रहे हैं। इसके स्थान पर राजनीतिक बयानबाजी और प्रचार आधारित खबरें प्रमुख बनती जा रही हैं।

जिम्मेदार पत्रकारिता की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि पत्रकारिता को अपनी मूल भूमिका में लौटना होगा। पत्रकारों को निष्पक्ष होकर सवाल पूछने चाहिए और जनता के मुद्दों को प्राथमिकता देनी चाहिए। मीडिया की विश्वसनीयता तभी कायम रहेगी जब पत्रकारिता निष्पक्ष और साहसी होगी।

निष्कर्ष

चापलूसी भरी पत्रकारिता लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी है। पत्रकारिता का धर्म सत्ता की प्रशंसा नहीं, बल्कि जनता के हित में सच को सामने लाना है। जब मीडिया स्वतंत्र और निष्पक्ष रहेगा, तभी लोकतंत्र मजबूत होगा और जनता का विश्वास कायम रहेगा।
 रिपोर्ट : Rk. Verma की समस्तीपुर जन-क्रांति हिंदी न्यूज़ बुलेटिन प्रधान कार्यालय से प्रकाशित व प्रसारित।

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