बेमौसम बरसात का कहर उत्तर बिहार क़े किसानों पर ढाया कहर जिसके गम से किसानों क़े हौसले हुऐ पस्त
बेमौसम बरसात का कहर उत्तर बिहार क़े किसानों पर ढाया कहर जिसके गम से किसानों क़े हौसले हुऐ पस्त
जनक्रांति कार्यालय से केन्द्रीय ब्यूरो चीफ प्रमोद कुमार सिन्हा की रिपोर्ट
समस्तीपुर/बेगूसराय, बिहार (जनक्रांति हिन्दी न्यूज बुलेटिन कार्यालय न्यूज डेस्क 22 मार्च, 2026)। बेमौसम बरसात ने उत्तर बिहार क़े किसानों पर जो कहर ढाया है जिसने किसानों की रीढ़ की हड्डी को तोड़ मरोड़ कर चकनाचूर कर दिया है।जिसके गम से किसानों क़े हौसले पस्त हो गये हैँ।
वर्षा के कारण खेतों में खड़ी फसलें बर्बाद हो गई हैं।
🌾 गेहूं की फसल चौपट
🌽 मक्के की फसल भी पूरी तरह नष्ट
इस आपदा के चलते किसानों के चेहरे पर चिंता और निराशा साफ झलक रही है।
कई किसानों के हौसले पस्त हो गए हैं और वे आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।
📢 किसानों की मांग:
सरकार से तत्काल मुआवजा और सहायता की अपील :
अभी कटनी की शुरुआत भी नहीं हो पायी थी की जबरदस्त तूफानी हवाओं औऱ बारिश ने फसलों को नीचे जमींदोज कर दिया है। किसानों में हाहाकार मचा हुआ है गेहूं की फसल ही चौपट नहीं हुई वरण मक्के क़े फसल भी बर्बाद हो गये।
आम औऱ लीची की बात बेमानी साबित हो रही है मंजर झड चुके हैँ ना लीची देखने को मिलेगा औऱ ना ही आम, जबकि इस बार किसान बहुत हर्षित थे। फसल भी अच्छा था औऱ आम क़े पेडों पर मंजर औऱ लीची क़े पेडों पर मंजर देखकर किसान बहुत हर्षित थे, लेकिन दो दिनों की बेमौसम बरसात औऱ तूफानी हवाओं ने सबकुछ मटियामेट कर दिया है, सबके सपने अधूरे रह गये , दो दिनों कि तूफानी हवा औऱ ओला बृष्टि साथ ही एकाएक मौसम तापमान में गिरावट ने लोगों को रजाई औऱ कंबल निकालने को मजबूर कर दिया है।आज अधखिली धुप में बैठ लोग राहत महसूस कर रहे हैँ, लोग अपने अपने छत क़े ऊपर औऱ जिसे जो जगह महफूज लग रहा है, धुप में जहाँ लोग खड़ा होना भी पसंद नहीं कर रहे थे। आज सबों को शकून चैन मिल रहा है। लोग एकाएक तापमान गिरने से कंप कम्पी महसूस करने लगे थे। ये प्रकृति का करिश्मा है, प्रकृति यदि चाहे तो पल में विनाश ला सकती है, लेकिन लोग आज प्रकृति क़े साथ ही खिलबाड़ कर रहे हैँ। अंधाधुंध पेरों की कटाई की गयी है, लेकिन एक भी पेड लगाया नहीं गया है यही है प्रकृति से खिलवाड़, जिस अनुपात में पेड़ों की कटाई हुई है, उस अनुपात में पेड़ नहीं लगाये गये हैँ। जिससे पुरा वातावरण दूषित हो चुका है पेड़ लगाना बहुत ही जरूरी है पेड़ लगने से प्रकृति संतुलित हो जायेगी।
👆उपरोक्त आलेख प्रकाशन हेतु प्रमोद कुमार सिन्हा, केंद्रीय ब्यूरो चीफ, जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन द्वारा संप्रेषित व समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशित व प्रसारित।

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