दो पहिया वाहन जाँच के नाम पर पुलिसिया धांधली जोड़ों पर नागरिक परेशान है भयादोहन से
दो पहिया वाहन जाँच के नाम पर पुलिसिया धांधली जोड़ों पर नागरिक परेशान है भयादोहन से
जनक्रांति कार्यालय रिपोर्ट
समस्तीपुर, बिहार (जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन कार्यालय न्यूज़ न्यूज़ डेस्क 23 मार्च, 2026)। समस्तीपुर शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों के निवासी इनदिनों दो पहिया वाहन जांच के नाम पर पुलिसिया कार्यशैली से आर्थिक शोषण के शिकार हो रहे है. जिससे आमजन भयभीत हो अपने वाहन से चलने को मजबूर है। बताते है की वाहन के कागजात सही होने पर भी अवैध चढावा लिए बिना नहीं छोडा जाता है। दो पहिया वाहन जाँच के नाम पर पुलिसिया धांधली का मामला सामने आ रहा है।
आरोप है कि सड़कों पर चलने वाले आम नागरिकों को बेवजह रोका जा रहा है और उनसे डर दिखाकर वसूली की जा रही है।
रिपोर्ट:
जनक्रांति हिंदी न्यूज़ बुलेटिन की इस खास रिपोर्ट में हम आपको दिखा रहे हैं कि किस तरह वाहन जांच के नाम पर आम लोगों को परेशान किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना किसी स्पष्ट कारण के बाइक सवारों को रोका जाता है, कागजात होने के बावजूद भी चालान या पैसे की मांग की जाती है।
कई नागरिकों ने आरोप लगाया है कि यह पूरी प्रक्रिया नियमों के बजाय भयादोहन का जरिया बनती जा रही है।
(नागरिक):
“हमारे पास सभी कागज थे, फिर भी रोका गया और पैसे मांगे गए। नहीं देने पर चालान काटने की धमकी दी गई।”
100 से लेकर 500 रुपये तक की अवैध वसूली की जा रही है। ऐ नजारा देखना है तो चले जाईऐ सुदूर ग्रामीण क्षेत्र के इलाकों में, शहर के ओवरब्रीज के निकट, मगरदही घाट, बाईपास बांध, मुसरीघरारी, नेशनल हाईवे इत्यादि सडक मार्ग पर ऐसा नजारा रोजाना देखने को मिल जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रैफिक नियमों का पालन कराना जरूरी है, लेकिन यदि जांच के नाम पर भ्रष्टाचार हो रहा है तो यह गंभीर चिंता का विषय है।
प्रशासन को चाहिए कि इस पर सख्त कार्रवाई करे और पारदर्शिता सुनिश्चित करे।
अब सवाल यह उठता है कि क्या इस तरह की कार्रवाई से कानून का सम्मान बढ़ेगा या जनता का भरोसा टूटेगा?
देखना होगा कि प्रशासन इस पर क्या कदम उठाता है। इसकी अगर उच्चस्तरीय जांच की जाऐ तो सत्यता सामने होगी।
समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशित व प्रसारित।

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