देश का प्रमुख त्यौहार होली ,विविधता में एकता का दिव्य संदेश होली के त्यौहार में है छुपा
देश का प्रमुख त्यौहार होली ,विविधता में एकता का दिव्य संदेश होली के त्यौहार में है छुपा
जनक्रांति कार्यालय रिपोर्ट
हिरणाकश्यप ने अपने पुत्र प्रहलाद को मारने के उद्देश्य अपनी बहन होलिका के साथ अग्नि में प्रवेश करा दिया और उस अग्नि से प्रहलाद जीवित बच गए।
जिस प्रकार कई रंग मिलकर एक नया रंग बनाते हैं उसी प्रकार लोग आपसी भेदभाव भुलाकर आपस में मिल जाते हैं।
इंडिया जनक्रांति न्यूज़ डेस्क (जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन कार्यालय न्यूज़ डेस्क 2 मार्च 2026)। मेरे प्यारे भाइयों और बहनों के साथ माताओं होली का त्यौहार हमारे देश का प्रमुख त्यौहार है,विविधता में एकता का दिव्य संदेश होली के त्यौहार में छुपा हुआ है। जिस प्रकार कई रंग मिलकर एक नया रंग बनाते हैं उसी प्रकार लोग आपसी भेदभाव भुलाकर आपस में मिल जाते हैं।
होली का त्यौहार मात्र हमारे देश भारत में ही नहीं आती संपूर्ण विश्व में पूर्ण हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है,पौराणिक कथाओं के अनुसार हिरणाकश्यप ने अपने पुत्र प्रहलाद को मारने के उद्देश्य अपनी बहन होलिका के साथ अग्नि में प्रवेश करा दिया और उस अग्नि से प्रहलाद जीवित बच गए तब भगवान के भक्तों ने प्रहलाद के सकुशल बच जाने की प्रसन्नता में एक दूसरे को गुलाल लगाकर के हर्ष व्यक्त किया था,तभी से प्रहलाद के विजय उत्सव के रूप में होलिकोत्सव मनाया जाता है,एक तरफ जहां हिरणाकश्यप बुराई का प्रतीक है तो प्रह्लाद विश्वास आनन्द एवं निश्चछलता का उसी प्रकार जब मनुष्य बुराई भरे भूतकाल को छोड़कर एक नये जीवन का प्रारंभ करता है तो उसके जीवन में विविध रंगों का फव्वारा फूट पड़ता है और एक नवज्योति उसके जीवन को आकर्षक बना देती है,
होली में रंगों का बहुत ही महत्व है मनुष्य की भावनाएं भी रंग बिरंगी होती है,होली के त्यौहार के दिन घर में मातृशक्तियों के द्वारा पूड़ी-कचौड़ी-गुझिया आदि विविध प्रकार के पकवान बनाए जाते हैं,ऊंच-नीच का भेदभाव एवं आपसी वैमनस्यता भुलाकर के लोग एक दूसरे से गले मिलते हैं,यही सनातन की दिव्यता है जो मानव मात्र को एक दूसरे से जोड़ती है,ऐसी परंपराएं हमारे देश भारत में ही देखने को मिलती है,समाज का प्रत्येक वर्ग एक दूसरे के घर जाकर के एक दूसरे से मिलकर आपस में बधाइयों का आदान प्रदान करते हैं,जिससे समाज में आपसी सामंजस्य एवं प्रेम की भावना प्रकट होती है,आज आधुनिकता के परिवेश हम अपने त्योहारों के मर्म को भूलते चले जा रहे हैं,आज लगभग प्रत्येक त्यौहार फीके होते चले जा रहे हैं तो उसका एक ही कारण है कि मनुष्य इस अर्थ युग में ज्यादा से ज्यादा धन कमाने के चक्कर में समाज से कटता चला जा रहा है,जिसका प्रभाव यह है कि लोगों के दिलों की वैमनस्यता नहीं समाप्त हो पा रही है,आज घरों की रसोइयों से नाना प्रकार के व्यंजन गायब होते जा रहे हैं,आज हमारे देश को आपसी सामंजस्य की बहुत आवश्यकता है,एक दिन होली का पर्व मना लेने एवं आपस में गले मिल लेने की अपेक्षा अगर यही भाव हमेशा के लिए बना रहे तभी होली मनाना सार्थक होगा,आज हमारे देश का जो परिवेश बनता चला जा रहा है उस परिवेश में हमें अपने त्योहारों से सीख लेने की आवश्यकता है,होली उमंग उल्लास मस्ती रोमांच और प्रेम के आह्वान का त्यौहार है,होलिका की अग्नि में कलुषित भावनाओं को भस्म कर के प्रेम की ज्योत जलाने और सभी को एक सूत्र में बाँधकर आगे बढ़ाने की भावना का प्रसार करना है होली का उद्देश्य,त्यौहार को मनाने का तरीका भले ही अलग-अलग हो सकता है परंतु इस त्यौहार का संदेश एक ही है कि मानवमात्र में प्रेम और आपसी भाईचारा सदैव बना रहना चाहिए,होली मनाने का अर्थ कि आपसी कटुता,शत्रुता आदि को भुलाकर एक दूसरे को रंग-अबीर-गुलाल से सराबोर करके एक नए रंग भरे जीवन की शुरुआत करना |
आयुर्धन शुभ्रयशोभितान्,
निरामय जीवन सम्मानम् !
समागतो होलीकोत्सवोsय,
ददातु ते मांगलिक विधानम् !!
लम्बी आयु धन-वैभव निर्मल यश और सम्मान मिले रंगो के इस त्यौहार पर खुशियों की सौगात मिले आप सभी को होलिकोत्सव की अनेकानेक मङ्गल कामनायों के साथ बधाई हो।
समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक/सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा नागेंद्र कुमार सिन्हा द्वारा प्रेषित संवाद प्रकाशित व प्रसारित।

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