अध्यात्म क्षेत्र में उतरना टेढ़ी खीर
अध्यात्म क्षेत्र में उतरना टेढ़ी खीर
🖋️ जनक्रांति अध्यात्म डेस्क रिपोर्ट
कोई बिहानगम योग कर रहा है तो कोई प्राणायाम कर रहा है तो कोई नाड़ी शोधन क्या यही अध्यात्म है ? यहाँ तो कुछ नहीं करना है ये कुछ नहीं करना बड़ा ही टेढ़ी खीर है जो इसे समझ लिया मानव जीवन सफल औऱ सार्थक हो गया : प्रमोद कुमार सिन्हा
इंडिया अध्यात्म न्यूज़ डेस्क (जनक्रांति हिन्दी न्यूज बुलेटिन कार्यालय न्यूज डेस्क 8 मार्च 2026}। अध्यात्म क्षेत्र में कमर कसना पड़ता है, तुलसी दास जी का वचन है " निर्मल जन मन सोही मुझे भावा, छल कपट छिद्र ना दुराबा " यहाँ मन निर्मल होना औऱ छल कपट से रहित होना है। वीरों की भूमि है सर हथेली पर रखना पड़ता है। कबीर साहेब का वचन है "प्रेम ना बारी उपजे प्रेम ना हाट बिकाइ राजा प्रजा जेहि रुचे शीश धर ले जाये " यहाँ शीश को हथेली पर रखना होता है वह भी प्रेम से नहीं तो सैकड़ों दरबाजे खुले हैँ जो कोई पाँच नाम कोई राधे राधे कोई श्याम श्याम तो कोई तोता रटन राम नाम तो कोई ओहम सोहँ इत्यादि योग बता कर लोगों का जीवन ही बर्बाद नहीं कर रहें बल्कि उनका धन शोधन भी कर रहे हैँ। उनके इज़्ज़त पर डकैती कर रहे हैँ फिर भी जीव मोह पाश में बंधा हुआ उनके शरण में ही पनाह लिये हुए हैँ यहाँ तो पग पग पर मौत ही मौत है लेकिन एक ना एक दिन मरना सबों को है तो फिर मौत से भय कैसा ? मौत से जो डर गया समझो मौत क़े पहले ही मर गया , जहाँ भय है वहाँ अध्यात्म नहीं जहाँ अध्यात्म है वहाँ भय नहीं।
राजा सुड्डोंधन ने बुध को कितना रोका था गुरुदेव आप अंगुलीमाल को नहीं जानते हैँ वह बहुत ही क्रूर है पैर पकड़ लिया। आप जंगल में अंगुली माल क़े पास मत जायें बुद्ध ने हँसते हुए जबाब दिया मौत ध्रुब सत्य है। आना है तो एक ना एक दिन मौत होगी तो मर लेंगें लेकिन अंगुलीमाल क़े पास अवश्य ही जायेंगे, अंगुलीमाल क़े पास पहुँच गये अंगुलीमाल जोर से चिल्लाया " रुक जाओ " इतना उसका कहना होता था औऱ लोग डरकर भाग जाते थे या रोने गिरगिढ़ाने लगते थे आज उसे स्वं महसूस हो रहा था यह कौन व्यक्ति है जिसे डर नाम की चीज नहीं है उसने पुनः चिल्लाया "रुक जाओ " औऱ बुद्ध बढ़ते रहे वह हाथ में नंगी तलवार लेकर खड़ा हो गया औऱ बुद्ध शांत चित्त मुस्कुराते हुए बोले मैं तो रुक गया अंगुलीमाल तुम कब रोकेगा ? आज अंगुलीमाल का हाथ थर थर कांप रहा था वो सोचने पर मजबूर था आज तक ऐसा निडर व्यक्ति कभी उसके जीवन में आया भी नहीं था पूछा आप क्या कहना चाहते हैँ बुद्ध मुस्कुराते हुए बोले बस तेरे सामने पीपल का बृक्ष है एक पत्ता मुझे चाहिये औऱ उसने अहं से एक डाली तलवार से काटकर बुद्ध को दे दिया बुद्ध मुस्कुराते हुए बोले वत्स मैंने तो एक पत्ता ही माँगा था तूने एक डाल ही काट दिया अब ऐसा करो पुनः इस डाल को जोड़ दो तब अंगुलीमाल धीमा पड़ चुका था वह बुद्ध का आदेश मानने को विवश था जो आज तक वो किसी का आदेश नहीं माना आज वह बिबश था कहा ये डाल तो नहीं जुड़ सकता है तब बुद्ध ने कहा मुझे पता चला था तुम बहुत बहादुर हो येतुम्हारी कैसी बहादुरी ? तोड़ तो मैं भी सकता हूँ जोड़ने की कला होना चाहिये औऱ अंगुलीमाल क़े हाथ से तलवार गिर पड़ा चरणों में झुक गया कहा हैं वत्स मैं तेरी शरण में हूँ मुझे उचित मार्ग दिखाओ औऱ इतना हिंसक औऱ क्रूर व्यक्ति आज बुद्ध क़े चरणों में अपना आँसु बहाने लगा औऱ ब्रह्मत्व को प्राप्त किया ये है आध्यात्म का निचोड़ आज हमारे कायस्थ में मंत्र लेखन करबा रहे हैँ औऱ दूसरे को भो उतप्रेरित कर रहे हैँ लगता है वे बड़े विद्वान हैँ ? कलम दवात क़े साथ चित्रगुप्त की पूजन करा रहे हैँ उन्हें पता ही नहीं चित्रगुप्त घट घट वाशी हैँ वे सुपर कंप्यूटर हैँ आप जो करते हो जिस भाव से करते हो सब उस सुपर कम्प्यूटर में अंकित हो जाता है परिणामतः उसका फल भी तुम्हें भोगना पड़ता है इसलिये कर्म कीजिये लेकिन सम्भलकर, निष्काम भाव से जो आम जन क़े लिये संभव ही नहीं है निष्काम कर्म यदि इतना सस्ता होता तो सभी जीव इसे कर लेते मात्र एक व्यक्ति अर्जुन ही कृष्ण को मिले मात्र एक व्यक्ति नरेंद्र नाथ उर्फ़ विवेकानंद मिले ये भेड़ियों की जमात आध्यात्म को क्या समझेंगें ? कोई बिहानगम योग कर रहा है कोई प्राणायाम कर रहा है कोई नाड़ी शोधन क्या यही अध्यात्म है ? यहाँ तो कुछ नहीं करना है ये कुछ नहीं करना बड़ा ही टेढ़ी खीर है जो इसे समझ लिया मानव जीवन सफल औऱ सार्थक हो गया ।
प्रमोद कुमार सिन्हा, केंद्रीय ब्यूरो, जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन द्वारा प्रेषित व समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक/सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित।

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