"" वो कौन थी ""छोटे छोटे बड़े ही मासूम बच्चे का हुज़ूम और हुजूम में एक नन्ही सी बच्ची आखिर में " वो कौन थी "

   "" वो कौन थी   ""
छोटे छोटे बड़े ही मासूम बच्चे का हुज़ूम और हुजूम में एक नन्ही सी बच्ची आखिर में " वो कौन थी "


जनक्रांति कार्यालय से केंद्रीय ब्यूरो चीफ प्रमोद कुमार सिन्हा की रिपोर्ट 
        🖋️प्रमोद कुमार सिन्हा 
इंडिया न्यूज़ डेस्क (जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन कार्यालय न्यूज़ डेस्क 6 मार्च, 2026)। " वो कौन थी ' सत्य घटना मैं व्यक्त कर रहा हूँ, दिनांक ०४- o३- २०२६ की घटना है होली उत्सव था प्रत्येक वर्ष की भाँति इस वर्ष भी मध्ययान क़े करीब ४ बजे मैंने मेन गेट खोला औऱ बैठ गया अपने बिजनेस पर यानी दरवाजा में कुर्सी टेबल लगाकर टेबल पर एक ट्रे रखा ट्रे में तीन छोटे कटोरी प्रत्येक छोटे कटोरी में छोटा छोटा मिश्री किसी में किशमिश मिश्रण तीसरे में टॉफ़ी चौथे में अबीर लेकर कुर्सी पर बैठ गया, बच्चे सब आते गये अबीर लगाते गये आशीर्वाद लिया, टॉफ़ी लिया मिश्री इत्यादि होने क़े बाद भी वो सभी टॉफ़ी ही ले रहे थे आ रहे थे जा रहे थे 
 अचानक छोटे छोटे बड़े ही मासूम बच्चे का हुज़ूम आया औऱ सबों ने पैरों पर अबीर रख आशीर्वाद लिया पूरब - पश्चिम रुख में बैठा मैं बीच में प्लास्टिक चलन्त टेबुल, टेबल पर ट्रे रखा हुआ एक ऒर मैं पूरब साइड से बैठा मैं औऱ पश्चिम साइड से बच्चे खड़े थे अचानक एक अबोध बहुत ही कम उम्र की जिसे ये भी पता नहीं था अबीर कहाँ लगाना है भोला भाला चौरा मस्तिष्क छोटी बच्ची टेबुल पर झुकी मेरे मस्तक पर अबीर लगाने मैं भी उससे अबीर लगाने को शरीर को झुकाया औऱ बोला बौआ अबीर दादा क़े पैर पर लगाया जाता है सर पर नहीं परन्तु सुनी अनसुनी कर उसने मेरे ललाट औऱ मशतशक में अबीर लगा दी मैं कुछ समझ नहीं सका हाँ गौर से देखा औऱ टॉफ़ी दिया औऱ बच्चे का वो हुज़ूम चला गया।
 इसी प्रकार बच्चे का हुज़ूम आते रहे - जाते रहे अचानक मुझे ध्यान आया एकाएक ""वो कौन थी  ""जो मेरे मस्तशक में अबीर लगा गयी मुहल्ले का कोई बच्चा मेरे ध्यान में नहीं आ रहा है ये टॉफ़ी बाँटने का शिला गत चार - या पाँच वर्षों से लगातार चला आ रहा है।
अचानक जो ख्याल मेरे मन में आया तब से बराबर वो दृश्य औऱ झलक मैं सपने की भाँति देखने लगा औऱ बार - बार सोचने लगा "वो कौन थी  " प्रश्न औऱ उलझते जा रहे हैँ मैंने बाबाजी की पुस्तक  "शून्य से सम्पूर्णता की ऒर  " पढ़ी है औऱ एक घटना पर बार बार ध्यान जा रहा है। एक मंदिर में कोई पुजा चल रहा था सम्भवतः नव रात्री दुर्गा पुजा औऱ पुजारी जी को एक आबाश्यक काम से जाना था तो उसने बाबाजी से रिक्वेस्ट करी की आज भगवत पुजा पंडित जी तेरे माथे औऱ अपनी व्यवस्था का वर्णन कर पुजा हेतु अनुरोध किया जिसे बाबाजी ने स्वीकार कर लिया ठीक मेरे बाली घटना उनके जीवन में घटी एक छोटी सी बच्ची ने उनके ललाट पर तिलक लगा कर चली तो गई बाद में बाबाजी को ख्याल आया "वो कौन थी  " जिसने मेरे मस्तक पर तिलक लगाई औऱ प्रश्न अनुत्तरीत रहे गया। वही प्रश्न मेरे मन में खलबली मचाये हुए है कि "वो कौन थी  " प्रश्न सनुत्तरीत है कोई जबाब नहीं मिल रहा है।
उपरोक्त आलेख प्रकाशन हेतु प्रमोद कुमार सिन्हा केंद्रीय ब्यूरो चीफ जनक्रांति हिंदी न्यूज़ बुलेटिन द्वारा संप्रेषित व समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक /सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित।

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