स्व रचित काव्य रचना : पथ --- प्रदर्शक बटोहिया राह बता हमें अब, किस डगर पर जाना है,या धृष्टता -- संकृन्तापूर्ण, जाती - पाती का समाज पाना है ,
स्व रचित काव्य रचना :
पथ --- प्रदर्शक
बटोहिया राह बता हमें अब,
किस डगर पर जाना है,
या धृष्टता -- संकृन्तापूर्ण,
जाती - पाती का समाज पाना है ,
🖋️रचनाकार : प्रमोद कुमार सिन्हा
बटोहिया राह बता हमें अब,
किस डगर पर जाना है,
या धृष्टता -- संकृन्तापूर्ण,
जाती - पाती का समाज पाना है,
पुनः आज घर -घर उजड़ा क्यों है.?
आज समाज बिखड़ा क्यों है.?
प्रकृत प्रदत्त स्वच्छन्द आकाश में रहना है
या घृणा - विदेश्वपूर्ण बिखराव समाज पाना है.?
आखिर नैया का पतवार है
किसके हाथ में,
या आँख मुंदकर जा रहे हैँ
देश तोड़ने बाले क़े साथ में,
अमन - चैन -सुख -शांति गीत गाना है,
या मनोमालिन्य पथभ्रष्ट्र समाज पाना है.?
नर हो नारी आज उबाऊ क्यों.?
संत्री या मंत्री आज बिकाऊ क्यों.?
धन - बैभव मोटर कार चाहना है.?
या ( जिन्दा नारी जलाने बाला )
दहेज लोलुप समाज पाना है
बटोहिया......
उपरोक्त स्वरचित पद प्रकाशन हेतु प्रमोद कुमार सिन्हा, केंद्रीय ब्यूरो चीफ, जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन द्वारा संप्रेषित व समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशित व प्रसारित।

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