स्व रचित काव्य रचना : पता नहीं क्यों बीस वर्ष बाद तुम याद आ रही हो....
स्व रचित काव्य रचना :
पता नहीं क्यों बीस वर्ष बाद तुम याद आ रही हो....
यादें....
पता नहीं क्यों बीस वर्ष बाद तुम याद आ रही हो ,
तरस गये हैँ नैन हमारे भरी जवानी याद दिला रही हो ,
वहीं जा रहा हूँ जहाँ हर कोना में तुम बस्ती थी ,
हर क्षण हर पल बीते लम्हें की क्यों याद दिला रही हो,
पता नहीं क्यों......
मेरी याद में पल पल तुम्हारा दिन गुजरता था ,
रूठ जाता था ज़ब भी तुम बहुत घबड़ा जाती थी,
सुनहरा पल बीत गये जवानी भी ढल गयी है अब ,
फिर भी गुज़रा पल आज बरबस तुम्हारी याद सताती है,
पता नहीं क्यों.......
वो चाँदनी रातें बांहों में बाहें डाल फिर से बुला रही है ,
कुछ भी नहीं बदला सब धरे वही मीठी बातें सता रही है ,
कैसे हमने बितायी है जिंदगी की ये घड़ी कैसे बताऊं ?
वही तुम्हारा घर गुज़रा जहाँ बचपन दिल में समा रही है ,
पता नहीं क्यों.....
प्रमोद तुम्हारा था है औऱ तुम्हारा ही रहेगा धरकन बता रही है,
कसक दिल की अश्क़ आज भी क्यों घुला रही है ,
बीत गये लम्हें कितने फूल तुम्हारे संजोये कैसे मैंने ,
खिलता हुआ गुलशन चार फूलों की सुगन्धि आ रही है ,
पता नहीं क्यों ------???
उपरोक्त 👆स्व रचित काव्य रचना प्रकाशन हेतु प्रमोद कुमार सिन्हा द्वारा समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय को संप्रेषित व प्रकाशक /सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित।

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